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Bye-Bye 2020: ऊहापोह में रही राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी, डीबी गुप्ता को हटाने के फैसले ने सभी को चौंकाया

ब्यूरोक्रेसी को बदलने के पीछे अफसरों और मंत्रियों के बीच टकराव प्रमुख वजह रही है.
ब्यूरोक्रेसी को बदलने के पीछे अफसरों और मंत्रियों के बीच टकराव प्रमुख वजह रही है.

Goodbye Year 2020: यह वर्ष राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी (Bureaucracy) के लिए काफी उथलपुथल भरा रहा. इस वर्ष में राज्य की अशाेक गहलोत (Ashok Gehlot) ने सरकार ने थोक के भाव अधिकारियों के तबादले किए. वहीं राज्य सरकार के ब्यूरोक्रेसी से जुड़े कई बड़े फैसले चर्चाओं में रहे.

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जयपुर. वर्ष- 2020 राजस्थान में ब्यूरोक्रेसी (Bureaucracy) के लिए काफी मशक्कत भरा रहा. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने पिछले 4 जुलाई की आधी रात को अचानक ब्यूरोक्रेसी का पूरा स्वरूप ही बदल दिया था. एक साथ 103 आईएएस अफसरों के तबादले कर दिए गये थे. इनमें सबसे चौंकाने वाला फैसला डीबी गुप्ता की जगह राजीव स्वरूप को मुख्य सचिव बनाने का रहा. डीबी गुप्ता तीन महीने बाद सेवानिवृत्त होने वाले थे. मुख्यमंत्री ने शपथ लेते ही मुख्य सचिव डीबी गुप्ता को छोड़कर सभी अफसर बदल दिए थे. पिछली वसुंधरा सरकार (Vasundhara government) ने डीबी गुप्ता को राज्य का मुख्य सचिव बनाया गया था, लेकिन गहलोत ने उनको बनाये रखा. सचिवालय के गलियारों में रिटायरमेंट से 3 महीने पहले डीबी गुप्ता को हटाने की खासी चर्चा रही.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले वर्ष 17 दिसंबर को शपथ लेने के ढाई महीने के भीतर ही 1145 आईएएस, आईपीएस,आरएएस और आरपीएस अफसरों के तबादले कर दिए थे. मुख्यमंत्री ने 2020 में भी ब्यूरोक्रेसी का चेहरा बदलने की कवायद जारी रखी. वसुंधरा सरकार में प्राइम पोस्टों पर रहे आईएएस अफसरों को भी सरकार ने एक बार मैन स्ट्रीम से अलग करने के बाद फिर से गले लगा लिया. वसुंधरा की कोर टीम के अफसरों को गहलोत सरकार ने पहले प्राइम पोस्टों से हटाकर ठंडी पोस्टों पर लगा दिया था.

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अफसरों और मंत्रियों में नहीं बन रही थी


ब्यूरोक्रेसी को बदलने के पीछे अफसरों और मंत्रियों के बीच टकराव प्रमुख वजह रही है. सरकार को पंचायत और निकाय चुनाव के लिए फील्डिंग भी जमानी थी. इस पूरे साल में गहलोत सरकार में अफसरों और मंत्रियों के बीच टकराव की खबरें छन छनकर आती रही है.

राजीव स्वरूप के एक्सटेंशन पर रहा सस्पेंशन
राजीव स्वरूप के एक्सटेंशन देने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने मंजूरी नहीं दी. लिहाजा राजीव स्वरूप 31 नवंबर को सेवानिवृत्त हो गए. राज्य सरकार ने सितंबर में सीएस को एक्सटेंशन देने के लिए प्रस्ताव केंद्र को भेजा था. लेकिन उनकी फाइल मूव ही नहीं हो पाई. ऐसा माना जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का फोन टेपिंग मामले में नाम आना इसकी प्रमुख वजह रही है. दरअसल राज्य में जिस समय कथित तौर पर फोन टेपिंग हुई थी उस समय राजीव स्वरूप गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव थे.

निरंजन आर्य बने CS, 10 वरिष्ठ IAS को पीछे छोड़ा
राज्य सरकार ने राजीव स्वरूप को एक्सटेंशन नहीं मिलने पर 1989 बैच के आईएएस निरंजन आर्य को प्रदेश का नया मुख्य सचिव बनाया है. आर्य जनवरी 2022 तक मुख्य सचिव रहेंगे. आईएएस की वरिष्ठता सूची में निरंजन आर्य का 11 वां नंबर था. लेकिन मुख्यमंत्री ने राज्य के 10 आईएएस अफसरों की वरिष्ठता लांघकर आर्य पर भरोसा जताया है. इसमें 6 आईएएस राजस्थान में और चार आईएएस केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में हैं. निरंजन आर्य के मुख्य सचिव बनने के बाद वर्ष 1987 बैच की सीनियर आईएएस वीनू गुप्ता, 1988 बैच के सुबोध अग्रवाल और 1989 बैच के राजेश्वर सिंह को सचिवालय से दूसरे विभागों की जिम्मेदारी दी गई. सचिवालय में एकमात्र अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित कुमार सिंह की तैनाती की गई है. शेष वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट्स को अन्य जिम्मेदारियां दी गई हैं.
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