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Rajasthan: इंजीनियरिंग कॉलेजों पर धड़ाधड़ लग रहे हैं ताले, ढूंढने से भी नहीं मिल रहे हैं स्टूडेंट्स

तकनीक शिक्षा मंत्री सुभाष गर्ग इसके लिये केन्द्र की संस्था एआईसीटीई को जिम्मेदार मानते हैं.
तकनीक शिक्षा मंत्री सुभाष गर्ग इसके लिये केन्द्र की संस्था एआईसीटीई को जिम्मेदार मानते हैं.

Bad condition of technical education: राजस्थान में तकनीकी शिक्षा बुरे दौर से गुजर रही है. स्टूडेंट्स के अभाव में प्रदेश में साल-दर-साल इंजीनियरिंग कॉलेजों (Engineering colleges) पर ताले लगते जा रहे हैं.

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जयपुर. इंजिनियरिंग कॉलेजों (Engineering colleges) में घटते दाखिलों के कारण प्रदेश में हर साल तकरीबन 10 से ज्यादा प्राइवेट इंजिनियरिंग कॉलेजों पर ताले (Locks) लगते जा रहे हैं. इस साल भी स्थिति कमाबेश ऐसी ही नजर आ रही है. बार बार दाखिले की तारीखें बढ़ाने के बावजूद भी राज्य के इंजनियरिंग कॉलेजों में इस बार भी पचास फीसदी सीटें भी नहीं भर पा रही हैं. हालात तो ये हैं कई निजी संचालकों ने भारी भरकम खर्चा कर एआईसीटीई (AICTE) से मान्यता लेकर कॉलेज तो खोल लिए लेकिन दाखिले का आंकड़ा नहीं बढ़ पा रहा है.

राज्य में इंजिनियरिंग के प्रति स्टूडेंट्स का रुझान लगातार गिरता जा रहा है. यही वजह है कि इस सत्र में दाखिलों की शुरुआत तो सरकार ने 15 जुलाई से कर दी थी, लेकिन अब तक भी पर्याप्त स्टूडेंट्स नहीं मिल पा रहे हैं. तीन बार तिथियां बढ़ाई दी गई, लेकिन फिर भी अभी तक महज पचास फीसदी सीटें भी नहीं भर पाई हैं. एकीकृत प्रवेश व्यवस्था रीप के तहत प्रदेश के 86 इंजिनियरिंग कॉलेजों की 33912 सीटों पर महज 5687 विद्यार्थी ही प्रवेश लेने पहुंचे हैं. जयपुर, जोधपुर, कोटा और अलवर के कुछ निजी कॉलेज तो ऐसे थे जिनमें सीटें तीन सौ से चार सौ थी. लेकिन इनमें एडमिशन जीरो रहा. निजी तो निजी सरकारी कॉलेजों में भी सीटें पूरी नहीं भर पा रही हैं. जबकि इसके उलट उच्च शिक्षा के कॉलेजों में दाखिलों की मारामारी रहती है.

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13 कॉलेजों में एक भी विद्यार्थी ने एडमिशन के लिए दिलचस्पी नहीं दिखाई


रीप से जब एडमिशन हुए तब तक तो 13 कॉलेजों में एक भी विद्यार्थी ने एडमिशन के लिए दिलचस्पी नहीं दिखाई. जबकि 33 कॉलेज ऐसे थे उनमें दहाई के आंकड़े तक भी एडमिशन नहीं हो सके. लिहाजा जब सीटें नहीं भर सकी तो सीधे दाखिलों के लिए तीसरी बार तिथि बढ़ाकर इसे 31 दिसंबर तक कर दिया गया. ताकि कुछ और सीटें भरी जा सके. इंजिनियरिंग कॉलेजों में साल-दर-साल यही हालात बने हुए हैं. तकनीकी शिक्षा से जुड़े कॉलेज संचालकों और विद्यार्थियों का कहना है कि इसके पीछे क्वालिटी एजुकेशन का अभाव होना है. प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, इंजिनियरिंग में प्लेसमेंट नहीं मिलना और कुकरमुत्ते की तरह बड़ी संख्या में कॉलेजों के खुल जाना भी बड़ा कारण है.

साल-दर-साल घट रहे हैं कॉलेज
प्रदेश में साल 2018-19 में कुल 104 कॉलेज थे जो 2019-20 में घटकर 95 रह गए थे. इस सत्र में कॉलेजों की संख्या फिर कम होकर 86 ही रह गई. दाखिलों में स्थितियां ऐसी ही रही तो अगले साल दस से पन्द्रह कॉलेजों में ताले लटकना तय माना जा रहा है. राज्य के इंजिनियरिंग कॉलेजों की दुर्गति पर तकनीक शिक्षा मंत्री इसे केन्द्र की संस्था एआईसीटीई को जिम्मेदार मानते हैं. गर्ग का कहना है कि उन्होंने धडल्ले से मान्यता देकर बड़ी संख्या में कॉलेज खोल दिए. लेकिन मंत्री सुभाष गर्ग उम्मीद जता रहे है कि आने वाले दिनों में क्वालिटी एजुकेशन में सुधार कर इस दिशा में सुधारात्मक कदम उठाया जायेगा.
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