Rajasthan: BSP MLAs के कांग्रेस में विलय का प्रकरण, HC में बहस जारी, आज आ सकता है फैसला
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Rajasthan: BSP MLAs के कांग्रेस में विलय का प्रकरण, HC में बहस जारी, आज आ सकता है फैसला
इस मामले में गुरुवार को स्पीकर की तरफ से बहस हुई थी. आज बसपा विधायकों की तरफ से बहस की जा रही है.

बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय के मामले में आज हाई कोर्ट में फिर सुनवाई चल रही है. उम्मीद जताई जा रही है कि इस मामले में स्टे एप्लीकेशन (Stay application) पर आज कोर्ट अपना फैसला सुना सकती है.

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जयपुर. बसपा विधायकों (BSP MLAs ) के कांग्रेस में विलय के मामले में आज फिर हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही है. हाई कोर्ट जस्टिस महेंद्र गोयल की एकलपीठ में यह सुनवाई (Hearing) चल रही है. हाई कोर्ट आज इस मामले में स्टे एप्लीकेशन (Stay application) पर अपना फैसला सुना सकती है. इस मामले में पहले दो बार सुनवाई हो चुकी है. गुरुवार को कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में जयपुर में अदालतों में आधे दिन का अवकाश होने के कारण यह सुनवाई फिर अधूरी रह गई थी. कल इस मामले में स्पीकर की ओर से बहस की गई थी.

आज इस प्रकरण में बसपा से कांग्रेस में शामिल हुये विधायक राजेन्द्र सिंह गुढ़ा की ओर से बहस शुरू हुई है. वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने बहस की शुरुआत की है. अभी तक इस प्रकरण में बसपा समेत बीजेपी विधायक मदन दिलावर, विधानसभा स्पीकर और विधायक लाखन सिंह की ओर से बहस पूरी हो चुकी है. शेष पांच बचे विधायकों और कांग्रेस की ओर से बहस होना है बाकी है.

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कल स्पीकर की तरफ से कपिल सिब्बल ने की थी बहस
उल्लेखनीय है कि प्रकरण में कल विधानसभा स्पीकर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बहस करते हुए कहा था कि स्पीकर के अंतरिम आदेश का ज्यूडिशियल रिव्यू नहीं हो सकता है. उन्होंने गोवा और मणिपुर के मामले का उदाहरण देते हुए बताया था कि वहां भी अदालतों ने स्पीकर के पास जाने के आदेश दिए थे. सिब्बल ने तर्क रखा कि विलय का मतलब यह नहीं है कि हमने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता दे दी. ये केवल विधानसभा में बैठने की व्यवस्था है. विलय प्रशासनिक व्यवस्था है.

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यह है पूरा मामला
बसपा और बीजेपी विधायक मदन दिलावर ने विधानसभा स्पीकर के 18 सितंबर 2019 के विलय के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है. बसपा के सभी 6 विधायकों के विलय के बाद से ही यह मामला काफी चर्चित और विवादास्पद हो गया था. लेकिन प्रदेश में अब उठे सियासी संकट के बाद इसे कोर्ट में लाया गया है.
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