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राजस्थान में बाल विवाह का भी होगा रजिस्ट्रेशन, विपक्ष के भारी हंगामे के बीच बिल पारित

राजस्थान में शादियों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े कानून के तहत अब बाल विवाह का भी रजिस्ट्रेशन होगा...

राजस्थान में शादियों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े कानून के तहत अब बाल विवाह का भी रजिस्ट्रेशन होगा...

Rajasthan News: प्रदेश में अब हर शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा, भले ही शादी वैध हो या अवैध. विपक्ष ने एतराज जताते हुए मत विभाजन की मांग की जिसे भी अस्वीकार कर दिया गया. आखिर विपक्ष ने वेल में आकर हंगामा किया और सदन से वॉकआउट किया.

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जयपुर. विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच शुक्रवार को राज्य विधानसभा में विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण संशोधन विधेयक 2021 पारित कर दिया गया. प्रदेश में अब हर शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा, भले ही शादी वैध हो या अवैध. बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष के साथ ही निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने भी इस पर कड़ा ऐतराज जताया और बिल को जनमत जानने के लिए परिचालित करने की मांग की. विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए विधेयक को सदन में ध्वनिमत से पारित करवाया गया. इस पर विपक्ष ने एतराज जताते हुए मत विभाजन की मांग की जिसे भी अस्वीकार कर दिया गया. आखिर विपक्ष ने वेल में आकर हंगामा किया और सदन से वॉकआउट किया.


बिल पर चर्चा के दौरान बोलते हुए विधायक अशोक लाहोटी ने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार बाल विवाह की अनुमति दे रही है. अगर यह बिल पारित हुआ तो विधानसभा में यह काला दिन होगा और सदन को सर्वसम्मति से इसे रोकना चाहिए. नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने भी कहा कि यह कानून बिल्कुल गलत है और लगता है बनाने वालों ने इसे सही तरीके से नहीं देखा. यह एक्ट बाल विवाह अधिनियम की अवहेलना कर रहा है और इसे पारित करना बहुत बड़ी भूल होगी. वहीं निर्दलीय विधायक संयम लोढा ने भी कहा कि इस कानून पर नागरिकों को विश्वास में लिया जाना चाहिए. बाल विवाह को जस्टिफाई करेंगे तो देश के सामने गलत उदाहरण जाएगा. इस तरह के कानून को पास नहीं होने देना चाहिए ताकि सदन की प्रगतिशील छवि कायम रहे. विधायक संयम लोढ़ा ने मंत्री धारीवाल के जवाब पर एतराज जताते हुए कहा कि आप कुतर्क कर रहे हैं. इस पर लोढ़ा और धारीवाल के बीच हल्की नोंक-झोंक भी हुई.

मंत्री धारीवाल ने दिया यह जवाब

बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री शांति धारीवाल ने विपक्ष द्वारा कही गई बातों को खारिज किया. धारीवाल ने कहा कि इस विधेयक को लाए जाने के कई महत्वपूर्ण कारण है. साल 2009 के विधेयक में केवल जिला विवाह रजिस्ट्रेशन अधिकारी का प्रावधान है जबकि इसमें अतिरिक्त जिला विवाह रजिस्ट्रेशन अधिकारी और ब्लॉक विवाह रजिस्ट्रेशन अधिकारी का प्रावधान भी जोड़ा गया है. मैरिज सर्टिफिकेट एक लीगल डॉक्यूमेंट है और विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होने से विधवा महिलाओं से जुड़े और उत्तराधिकार के मामलों से जुड़े मसले सुलझाने में आसानी होगी. धारीवाल ने कहा कि यह अधिनियम कहीं भी यह नहीं कहता है कि बाल विवाह वैध होंगे बल्कि रजिस्ट्रेशन के बाद भी कम उम्र के विवाहों पर कार्रवाई की जा सकती है. अवयस्क बालिका की यदि शादी होती है तो वह 18 साल की होने पर उसे कैंसल कर सकती है. धारीवाल ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि शादी चाहे वयस्क की हो या अवयस्क उसका रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है और इसीलिए यह बिल लाया गया है.

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