Rajgarh SHO suicide case: जांच के लिए अब निगाहें CBI के निर्णय पर टिकी, वह केस को स्वीकार करती या नहीं
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Rajgarh SHO suicide case: जांच के लिए अब निगाहें CBI  के निर्णय पर टिकी, वह केस को स्वीकार करती या नहीं
विश्नोई सुसाइड मामले से पहले पिछले बीते 7 साल में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न मामलों में सीबीआई जांच के लिए भेजी गई सिफारिशों में से अधिकांश को नहीं माना गया.

अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Government) ने भले ही राजगढ़ एसएचओ विष्णुदत्त विश्नोई सुसाइड केस (SHO Vishnudutt Vishnoi Suicide Case) की जांच सीबीआई (CBI) से कराने के लिए डीओपीटी को चिट्ठी लिख दी हो, लेकिन जांच एजेंसी द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद ही वह राहत सांस ले सकती है.

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जयपुर. अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Government) ने भले ही राजगढ़ एसएचओ विष्णुदत्त विश्नोई सुसाइड केस (SHO Vishnudutt Vishnoi Suicide Case) की जांच सीबीआई (CBI) से कराने के लिए डीओपीटी को चिट्ठी लिख दी हो, लेकिन जांच एजेंसी द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद ही वह राहत सांस ले सकती है. अब सबकी निगाहें सीबीआई के निर्णय पर टिकी है. सीबीआई प्रकरण को टेक ओवर करती है या नहीं. यदि केंद्रीय जांच एजेंसी विश्नोई सुसाइड मामले को टेकओवर नहीं करती है तो गहलोत सरकार को एक बार फिर रिमाइंडर भेजना पड़ सकता है.

अधिकांश को जांच की मंजूरी के योग्य ही नहीं माना गया
विश्नोई सुसाइड मामले से पहले पिछले बीते 7 साल में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न मामलों में सीबीआई जांच के लिए भेजी गई सिफारिशों में से अधिकांश को जांच की मंजूरी के योग्य ही नहीं माना गया. केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने केवल आनंदपाल मुठभेड़ प्रकरण और जम्मू-कश्मीर फर्जी हथियार लाइसेंस मामले को ही टेक ओवर किया. सीबीआई ने तो राज्य के बहुचर्चित आनंदपाल मुठभेड़ मामले को भी हाथ में लेने से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में राज्य सरकार द्वारा बार-बार रिमाइंडर भेजने पर ही उसे टेकओवर किया गया. वर्तमान गहलोत सरकार का यह पहला मामला है जिसे सीबीआई जांच के लिए भेजा गया है.

सुसाइड केस में शामिल चेहरों के बेनकाब होने में समय लग सकता है



सीबीआई एसएचओ विष्णु दत्त सुसाइड मामले को टेक ओवर भी कर लेती है तब भी चेहरे बेनकाब होने में लंबा इंतजार करना पड़ेगा. क्योंकि पिछली वसुंधरा सरकार द्वारा केंद्र को भेजी गई सीबीआई जांच की सिफारिशों की फिलहाल जांच ही चल रही है. ऐसे में एसएचओ विश्नोई सुसाइड केस में शामिल चेहरों के बेनकाब होने में समय लग सकता है.



वसुंधरा सरकार ने इन मामलों को भेजा था सीबीआई में

- एम्बुलेंस-108 सेवा के टेंडर केस
- चक राजासर हत्याकांड
- बाड़मेर का डेल्टा केस
- आनंदपाल मुठभेड़ केस
- जम्मू-कश्मीर फर्जी हथियार लाइसेंस

यह हुआ था आनंदपाल मामले में
कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह चूरू जिले के मालसर गांव में 24 जून 2017 को पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था. प्रकरण को लेकर प्रदेशभर में हुए हंगामे के बाद तत्कालीन वसुंधरा सरकार ने 24 जुलाई 2018 को केंद्र सरकार को पत्र भेज मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी, लेकिन 15 नवंबर 2018 को सीबीआई ने जांच से मना कर दिया. उसके बाद 17 दिसंबर को राज्य सरकार ने मामले की सीबीआई जांच को लेकर दोबारा रिमाइंडर भेजा था.

यह है सीबीआई जांच का प्रोसेस
सीबीआई एक केन्द्रीय एजेंसी है और केन्द्र सरकार के प्रति जवाबदेह है. इससे जांच कराने के लिए राज्य के गृह विभाग की तरफ से नोटिफिकेशन और एफआईआर सहित दस्तावेजों की पत्रावली केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय को भेजी जाती है. इसके बाद प्रकरण सीबीआई को भेज दिया जाता है. करीब एक सप्ताह में सीबीआई प्रकरण को टेक ओवर कर सकती है. यदि सीबीआई मामले को टेक ओवर नहीं करती है तो राज्य सरकार को रिमाइंडर पत्र भेजने होते हैं.

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First published: June 5, 2020, 12:33 PM IST
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