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Rajasthan: ब्यूरोक्रेसी के लिए गले की फांस बन सकता है BJP MPs से टकराव, जानिये क्यों हो रहा है ऐसा

हाल ही में पाली सांसद पीपी चौधरी सीधे तौर पर मुख्य सचिव राजीव राजीव स्वरूप के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं.

हाल ही में पाली सांसद पीपी चौधरी सीधे तौर पर मुख्य सचिव राजीव राजीव स्वरूप के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं.

प्रदेश में बीजेपी सांसदों और विधायकों (BJP MPs and MLAs) का ब्यूरोक्रेसी (Bureaucracy) से टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है. इसको देखते बीजेपी सांसद अब लामबंद होते जा रहे हैं.

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जयपुर. राज्य की ब्यूरोक्रेसी (Bureaucracy) के लिए बीजेपी विधायकों-सासंदों से टकराव (Clash) गले की फांस बन सकता है. ब्यूरोक्रेसी की ओर से प्रोटोकॉल की अवहेलना (Protocol violation)  से नाराज मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी के सांसद जिला कलक्टर्स से लेकर से लेकर पुलिस अधीक्षकों के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं. बीजेपी सांसदों (BJP MPs) का आरोप है कि राज्य की ब्यूरोक्रेसी सत्तारूढ़ दल के इशारे पर काम करते हुए अपनी मनमानी कर रही है.

इस मामले को लेकर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ब्यूरोक्रेसी को संसद की विशेषाधिकार समिति तक घसीट चुके हैं. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत जोधपुर के अधिकारियों द्वारा उनका फोन नहीं उठाने की बात कह चुके हैं. अब पाली सांसद पीपी चौधरी ने सीधे तौर पर मुख्य सचिव राजीव राजीव स्वरूप के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. आने वाले दिनों में बीजेपी सांसदों का ब्यूरोक्रेसी के खिलाफ टकराव बढ़ने के आसार हैं. पाली सासंद ने भी मामले को संसद की विशेषाधिकार समिति के समक्ष ले जाने की चेतावनी दी है.

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यह है सांसदों और ब्यूरोक्रेसी के बीच टकराव की बड़ी वजह
- बीजेपी सांसदों का कहना है कि आईएएस से लेकर एसपी तक फोन रिसीव नहीं करते.
- ब्यूरोक्रेट्स प्रोटोकॉल का पालन नहीं करते. उनके साथ दोयम दर्जे का बर्ताव करते हैं.
- शिलान्यास-उद्घाटन समारोह में छपने वाले बैनर पोस्टर और शिलालेखों से सांसदों के नाम गायब कर देते हैं.
- शिलान्यास पट्टिका से वरीयता क्रम में सांसदों का नाम नीचे लिख दिया जाता है.
- सांसदों की जगह अधिकारियों का नाम और फोटो छप रहे हैं.
- DOPT मंत्रालय की स्पष्ट गाइड लाइन है कि प्रोटोकॉल के अनुसार ही सांसदों को जगह मिलनी चाहिए.
- वहीं बीजेपी विधायकों का कहना है कांस्टेबल तक का कर्मचारी उनकी नहीं सुनता है.

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सरकार बदलते ही बदल जाती है ब्यूरोक्रेसी
राज्य में सरकार बदलते ही ब्यूरोक्रेसी को भी बदलने की पुरानी रवायत रही है. ब्यूरोक्रेसी पर सत्तारूढ़ पार्टी के इशारे पर काम करने के आरोप लगते रहे हैं. पिछली बीजेपी सरकार के समय में भी ब्यूरोक्रेसी पर आरोप लगे थे. अब कांग्रेस के शासन के समय में भी ब्यूरोक्रेसी पर आरोप लग रहे हैं. पिछली सरकार में मनमानी करने वाले अधिकारियों को गहलोत सरकार ने प्राइम पोस्टिंग से हटाकर ठंडी पोस्ट पर लगा दिया था. उल्लेखनीय है के राजस्थान में लोकसभा की 25 में से 24 सीटों पर बीजेपी के सांसद हैं. वहीं नागौर में बीजेपी की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल सांसद हैं.

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