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Analysis: क्या वैभव अपने पिता अशोक गहलोत की चाहत पूरी करेंगे?

वैभव गहलोत.
वैभव गहलोत.

अशोक गहलोत ने आखिरकार एक पिता के सपने को जगजाहिर कर दिया. गहलोत ने कहा कि वे चाहते हैं कि वैभव गहलोत उन जैसा बने. क्या वैभव गहलोत सियासत में अपने पिता अशोक गहलोत का अक्स बन पाएंगे? क्या वैभव अपने पिता अशोक गहलोत की चाहत पूरी करेंगे?

  • News18India
  • Last Updated: April 29, 2019, 5:32 AM IST
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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आखिरकार एक पिता के सपने को जगजाहिर कर दिया. गहलोत ने कहा कि वे चाहते हैं कि वैभव गहलोत उन जैसा बने. गहलोत ने ये तमन्ना जाहिर की अपने बेटे वैभव से जोधपुर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में कूदने के बाद. गहलोत चाहते हैं कि वैभव उन्हीं के नक्शे कदम पर चलकर वैसा ही बनकर दिखाए जैसा वे बने पिछले चालीस साल में. गहलोत का इशारा साफ है लेकिन क्या वैभव गहलोत सियासत में अपने पिता अशोक गहलोत का अक्स बन पाएंगे? क्या वैभव अपने पिता अशोक गहलोत की चाहत पूरी करेंगे?

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अशोक गहलोत की छवि गांधीवादी नेता की है. मिलनसारिता स्वभाव में है. गहलोत के राजनीतिक कौशल का लोहा तो विपक्षी भी मानते हैं. अब बेटे में भी गहलोत ये सब गुण देखना चाहते हैं. गहलोत ने वैभव को पिता की ओर से एक सलाह और दी कि वैभव अपने दमखम से जोधपुर में लोकसभा चुनाव लड़े. अपनी ताकत के बलबूते न कि मुख्यमंत्री पिता की ताकत और हैसियत के भरोसे.



गहलोत ने बेटे को सलाह भी दी है और भरोसा भी जताया कि वैभव गहलोत अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे. एक संयोग ये भी है कि अशोक गहलोत ने खुद जोधपुर से पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था, तब ही वैभव गहलोत का जन्म हुआ था, वैभव ने भी सियासी पारी की शुरुआत के लिए पिता के पुराने संसदीय क्षेत्र को ही चुना है.

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Vaibhav Gehlot
पिता अशोक गहलोत के साथ पूर्व पीएम से मिलते वैभव.


गहलोत ने पिता का धर्म वैभव को टिकट मिलने से पहले ही निभाना शुरू कर दिया था. बेटे के लिए जोधपुर में गहलोत ने सियासी होली खेली थी. जोधपुर की जनता को गहलोत ने गुलाल अबीर लगाया और जोधपुर की जनता को संदेश भी कि अब बेटे की नैया उनके भरोसे... शहर के लोगों से गले मिले... वैभव ने पिता के साथ जोधपुर में होली खेलने में कसर नहीं रखी थी.

गहलोत जोधपुर सीट से वैभव को मैदान में उतराने से पहले सरपंचों से लेकर हर इलाके के जनप्रतिनिधियों से मिले, फीडबैक लिया. यकीन होने के बाद अंतिम फैसला किया. बावजूद जोधपुर में वैभव के राहें आसान नहीं है. मुकाबला बीजेपी के हैविवेट गजेंद्र सिंह शेखावत से है. शेखावत न केवल केंद्रीय मंत्री हैं, छह महीने पहले ही बीजेपी नेतृत्व शेखावत को राजस्थान में बीजेपी की कमान सौपना चाहता था. राजे के विकल्प के रूप में शेखावत का खड़ा करने की तैयारी थी, लेकिन राजे के वीटो के चलते ऐसा नहीं हो पाया. बावजूद राजस्थान बीजेपी के न केवल बड़े नेता है संभावित चेहरा भी.

Vaibhav Gehlot
वैभव गहलोत.


अब इंतजार इस बात का है कि अशोक गहलोत बेटे को क्या मैदान में अकेला छोड़ेंगे या फिर जीत तय करने के लिए खुद मोर्चा संभालेंगे? वैभव को इससे पहले गहलोत जालोर- सिरोही से मैदान में उतारना चाहते थे. गहलोत ने जालोर सिरोही में न केवल दौरे किए थे, मठों से लेकर प्रभावशाली जातियों और नेताओं के साथ बैठकें, ईंटेंलीजेंस से फीड बैंक लिया, लेकिन एयर स्ट्राइक के बाद बने माहौल को देखते हुए जालौर से मैदान में उतराने का मानस छोड़ दिया था.

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वैभव गहलोत.


अशोक गहलोत ये जानते थे कि वंशवाद का आरोप उन पर भी लगेगा. गहलोत ने सफाई दी कि अगर वे चाहते थे कि वैभव को 2009 में ही टिकट दे सकते थे, लेकिन वे परिवारवाद नहीं चाहते थे. इस वजह से वैभव के 2009 में टिकट की इच्छा जताने पर मना कर दिया था.

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गहलोत ने सफाई दी कि ऐसे कई मौके आए थे जब कांग्रेस संगठन में भी युवा कांग्रेस लेकर कई अहम पद पर वैभव की ताजपोशी होने वाली थी, लेकिन वे तैयार नहीं थे. गहलोत ने कहा कि 2014 में वे चाहते थे कि वैभव को टिकट मिले, तब वे सीएम नहीं थे, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने टिकट नहीं दिया था. अशोक गहलोत वैभव को शुरुआत में टोंक-सवाई माधोपुर से चुनाव लड़ाना चाहते थे लेकिन सचिन पायलट के टोंक से विधायक बनने के बाद गहलोत ने यहां से उतारने का मानस बदल लिया था.

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