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वसुंधरा के मुकाबले भामाशाहों ने CM अशोक गहलोत के राज में दिया दोगुना आर्थिक सहयोग

Babulal Dhayal | News18 Rajasthan
Updated: December 14, 2019, 5:48 PM IST
वसुंधरा के मुकाबले भामाशाहों ने CM अशोक गहलोत के राज में दिया दोगुना आर्थिक सहयोग
वसुंधरा सरकार के आखिरी साल में जहां भामाशाहों ने 85 करोड़ रुपए दान किए थे. वहीं इस साल के जून महीने तक ही भामाशाहों के दान की राशि का आंकड़ा 152 करोड़ तक जा पहुंचा.

सीएम अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने भामाशाहों (Bhamashah) का भरोसा जीतने में एक बार फिर कमाल कर दिखाया है. सीएम गहलोत भामाशाहों के लिए रोल मॉडल (Roll model) बनकर उभरे हैं. गहलोत के सत्ता संभालने के बाद पिछले एक साल में भामाशाहों ने दिल खोलकर सरकार को दान दिया है.

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जयपुर. सीएम अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने भामाशाहों (Bhamashah) का भरोसा जीतने में एक बार फिर कमाल कर दिखाया है. सीएम गहलोत भामाशाहों के लिए रोल मॉडल (Roll model) बनकर उभरे हैं. गहलोत के सत्ता संभालने के बाद पिछले एक साल में भामाशाहों ने दिल खोलकर सरकार को सहयोग (Government support) किया है. इसमें स्कूलों (Schools) में सबसे ज्यादा पैसा दान किया गया है. इसने अब तक के तमाम रिकॉर्ड तोड़ (Record breaking) दिए हैं.

जून तक आंकड़ा 152 करोड़ तक जा पहुंचा
इस वर्ष जून महीने तक ही सरकारी स्कूलों के लिए भामाशाहों ने अपने खजाने का मुंह इतना खोला कि सुनने वाले भी हैरत में पड़ गए. वसुंधरा सरकार के आखिरी साल में जहां भामाशाहों ने 85 करोड़ रुपए दान किए थे. वहीं इस साल के जून महीने तक ही भामाशाहों के दान की राशि का आंकड़ा 152 करोड़ तक जा पहुंचा है. अब जो आंकड़े आ रहे हैं वे करीब पौने दो सौ करोड़ रुपयों तक पहुंच रहे हैं. खुद सीएम गहलोत और शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद डोटासरा भामाशाहों का सम्मान करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं.

इटली में रहते हैं भामाशाह घीया, लेकिन उनका दिल हिंदुस्तान में ही बसता है

भामाशाह बृजेश घीया इटली में रहते हैं, लेकिन उनका दिल हिंदुस्तान में ही बसता है. उन्होंने जयपुर में अपने घर के पड़ोस में स्थित बालिका स्कूल को गोद ले रखा है. वहां उन्होंने विकास कार्य कराने में कोई कमी नहीं छोड़ी. वे खुद स्कूल जाकर एक-एक कमी की पड़ताल करते हैं. स्कूल स्टाफ जो भी मांगता है, उसे देने में जरा भी हिचक नहीं करते क्योंकि वे सीएम गहलोत की वर्किंग के मुरीद हैं, जो उन्हें बार-बार यहां आकर बच्चों के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए प्रेरित करता है.

ऑनलाइन डोनेशन देने की व्यवस्था की
सरकार ने भामाशाहों के लिए कई सहूलियतें भी दी हैं. अब डोनेशन देने के लिए सुविधाएं ऑनलाइन कर दी गई हैं. ज्ञान संकल्प पोर्टल भामाशाहों को ऑनलाइन जोड़ने में खासा मददगार साबित हुआ है. मुख्यमंत्री विद्यादान कोष में भी लोग बढ़-चढ़कर योगदान कर रहे हैं. अब तक करीब 12 करोड़ रुपए की मदद सरकार को मिल चुकी है. सपोर्ट-ए-प्रोजेक्ट और डोनेट-टू-ए स्कूल को भी भामाशाहों ने हाथों-हाथ लिया है. यही नहीं कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉसलिटी (CSR) के लिए काम कर रही नामी कंपनियां भी सरकार को खूब सहयोग कर रही है.भामाशाहों ने हाल ही में 3 विद्यालयों को लिया गोद
क्रिएट योर ऑन प्रोजेक्ट में अब तक डेढ़ सौ प्रोजेक्ट स्वीकृत किए जा चुके हैं. इसके जरिए 101 करोड़ रुपया खर्च किया जा रहा है. 3 विद्यालयों को हाल ही में भामाशाहों ने गोद लिया है. अधिकारियों के मुताबिक ये आंकड़े सिर्फ उन्हीं दानदाताओं के हैं, जो ऑनलाइन मदद कर रहे हैं. सीधे सरकारी स्कूलों की बेहतरी के लिए विकास कराने वालों की तादाद कहीं ज्यादा है.

अपनी माटी के लिए दान देने में नहीं हिचकते मारवाड़ी 
गहलोत सरकार ने प्रवासी राजस्थानियों को अपनी माटी से जोड़ने में भी कोई कमी नहीं छोड़ी है. सरकार अब तक कोलकाता और चेन्नई में प्रवासियों को उनकी जड़ों से जुड़ने और स्कूलों को गोद लेने का आह्वान कर चुकी है. अब बारी मुंबई की है. जाहिर है मारवाड़ी चाहे देश में हो या प्रदेश में अपने गांव और शहर के विकास में सहयोग देने में उनका कोई सानी नहीं है.

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First published: December 14, 2019, 3:51 PM IST
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