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दीपावली पर अमिता को मिले कलेक्टर 'पापा', 10 माह से कर रही थी बेसब्री से इंतजार

कलेक्टर पापा अमिता से मिले और अमिता के साथ बहुत प्यार बांटा.

कलेक्टर पापा अमिता से मिले और अमिता के साथ बहुत प्यार बांटा.

अमिता टांक की जिंदगी को नई रोशनी मिल गई. अमिता को 10 महीने बाद नये कलेक्टर पापा मिले हैं. जगरूप यादव (Jagroop Yadav) अमिता से मिले और उसके साथ बहुत प्यार बांटा.

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जयपुर. अमिता टांक की जिंदगी को नई रोशनी मिल गई. अमिता को 10 महीने बाद नये कलेक्टर पापा मिले हैं. जयपुर के कलेक्टर जगरूप यादव (Jagroop Yadav) अमिता से मिले और उसके साथ बहुत प्यार बांटा. नए कलेक्टर पापा उसे खाने के लिए चॉकलेट दिए. जगरूप यादव अमिता के लिए नए कपड़े लेकर आए थे, जिसे वह दीवाली पर पहनेगी.

आठ साल की उम्र में अनाथ हो गई थी अमिता

अमिता आठ साल की उम्र में अनाथ हो गई थी. वर्ष 2011 में उसके सिर से पापा का साया उठ गया. मां भी वर्ष 2013 में दुनिया को अलविदा कह गई. लगभग तीन साल बाद यानि वर्ष 2016 में उसे फिर से नए पापा मिले. अमिता को जयपुर के तत्कालीन कलेक्टर सिद्धार्थ महाजन ने गोद लिया था. इस समय अमिता की उम्र 12 साल की थी.

जिला कलेक्टर की गोद ली हुई बेटी है अमिता

बकौल अमिता नए पापा ने ना केवल उसे गोद लिया था बल्कि उसकी पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाई थी. उन्होंने अमिता का स्कूल में एडमिशन भी कराया था. पापा ने उसे अच्छे कपड़े भी दिलाए. जयपुर के कलेक्टर बदलते ही अमिता को नए पापा मिल जाते हैं. इस बार अमिता को नए पापा के लिए करीब 10 माह का इंतजार करना पड़ा.

जयपुर के गांधी नगर स्थित हॉस्टल में रहती है बिटिया

अमिता ने बताया कि वह गांधी नगर स्थित हॉस्टल में रहती है. जयपुर के कलेक्टर अमिता के बैंक खाते में पढ़ाई के खर्च के नाम पर 500-600 रुपए जमा करा देते हैं. अमिता बताती है कि उसके साथी उससे कहते हैं कि तुम्हारे पापा कलेक्टर हैं. लेकिन अमिता को इस बात का मलाल है कि उसने कलेक्टर पापा को देखा तक नहीं है.

नए पापा से मिलकर उसकी उम्मीदों को फिर से लगे पंख

अमिता बताती है कि स्कूल में प्रिंसिपल से लेकर सभी मैडम मेरा खयाल रखती हैं. हर त्योहार पर मैडम मुझे नए कपड़े दिलवाती हैं. वह स्कूल में सबकी लाड़ली है. वह नम आंखों से कहती है कि रविवार को दीपावली है. उसकी इच्छा है कि वह कलेक्टर पापा के साथ दीए जलाए और पटाखे चलाए. उसकी यह उम्मीद नए कलेक्टर पापा जगरूप यादव ने मिलकर पूरी कर दी है. अमिता की आंखों की नमी आज दूर हो गई और अब उसकी आंखें नए दीप की लौ सी चमक उठी है.

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