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Rajasthan: प्रदेश में बुरे हालात से गुजर रहे हैं आयोग, 10 में से 8 में खाली पड़े हैं अध्यक्षों के पद

मानवाधिकार आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर आग्रह भी किया था कि आयोग कार्यालय को सचिवालय से बाहर निकाला जाये. क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग सचिवालय में आने से ही कतराते हैं.

मानवाधिकार आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर आग्रह भी किया था कि आयोग कार्यालय को सचिवालय से बाहर निकाला जाये. क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग सचिवालय में आने से ही कतराते हैं.

प्रदेश में स्थापित विभिन्न आयोग (Commissions) बुरे हालात से गुजर रहे हैं. हालात ये हैं कि आमजन के अधिकारों की रक्षा करने वाले आयोग खुद अपने अधिकारों की रक्षा (Rights) के लिये जूझ रहे हैं.

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जयपुर. राज्य सरकार प्रदेश में स्थापित विभिन्न आयोगों (Commissions) के प्रति की उपेक्षा का भाव बरत रही है. कई आयोगों के पास जहां अपने स्वतंत्र भवन तक नहीं हैं वहीं ज्यादातर आयोगों में अध्यक्षों और सदस्यों के पद खाली (Post vacant) पड़े हैं. आम आदमी के अधिकारों की रक्षा और उन्हें आसानी से न्याय उपलब्ध करवाने के लिए राज्य में करीब 10 आयोग स्थापित हैं. लेकिन ये आयोग खुद ही अपने अधिकारों (Rights) के लिए तरसते हुए नजर आ रहे हैं.

राज्य सरकार द्वारा आयोगों के प्रति लगातार उपेक्षा बरती जा रही है. हालात ये हैं कि 10 में से 7 आयोगों के पास तो अपने स्वतंत्र भवन तक नहीं हैं. केवल राज्य महिला आयोग, राज्य सूचना आयोग और राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग ही अपने स्वतंत्र भवन में संचालित हो रहे हैं.

अन्य सरकारी कार्यालयों में संचालित हो रहे हैं आयोगों के ऑफिस
बाल संरक्षण आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, राज्य अल्पसंख्यक आयोग, राज्य अनुसूचित जाति आयोग, निशक्तजन आयोग, राज्य सफाई कर्मचारी आयोग और किसान आयोग के पास अपने भवन तक नहीं हैं. ये सभी आयोग दूसरे सरकारी विभागों के दफ्तरों से संचालित हो रहे हैं. राज्य मानवाधिकार आयोग का कार्यालय शासन सचिवालय से संचालित हो रहा है. मानवाधिकार आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर आग्रह भी किया था कि आयोग कार्यालय को सचिवालय से बाहर निकाला जाये. क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग सचिवालय में आने से ही कतराते हैं.

7 आयोग ऐसे हैं जिनमें अभी व्यवस्थायें प्रशासकों के भरोसे चल रही हैं
सामाजिक कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव का कहना है कि ऐसा नहीं है कि आयोगों के पास केवल स्वतंत्र भवनों का ही अभाव हो, बल्कि आयोग पदाधिकारियों के बिना भी संचालित रहे हैं. 10 में से 8 आयोग तो अभी बिना अध्यक्षों से संचालित हो रहे हैं. इन आयोगों में सदस्यों की नियुक्तियां भी नहीं हैं. 10 में से 7 आयोग ऐसे हैं जिनमें अभी व्यवस्थायें प्रशासकों के भरोसे चल रही हैं.

ये हैं आयोगों के हालात
- राज्य महिला आयोग में अध्यक्ष और सभी सदस्यों के पद खाली हैं.
- राज्य मानवाधिकार आयोग में कार्यवाहक अध्यक्ष हैं. 2 सदस्यों के पद खाली हैं.
- राज्य अल्पसंख्यक आयोग में अध्यक्ष का पद खाली है. 4 सदस्यों के पद भी रिक्त हैं.
- राज्य अनुसूचित जाति आयोग में अध्यक्ष का पद रिक्त है. एक सदस्य का पद भी रिक्त है.
- राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग में अध्यक्ष और एक सदस्य का पद रिक्त है.
- निशक्तजन आयोग में भी अध्यक्ष और एक सदस्य का पद रिक्त है.
- राज्य सफाई कर्मचारी आयोग में अध्यक्ष का पद रिक्त है. इसके साथ ही 6 सदस्यों के पद भी खाली हैं.
- राज्य किसान आयोग में अध्यक्ष पद के साथ ही 8 सदस्यों के पद भी रिक्त चल रहे हैं.

हाईकोर्ट भी कई बार राज्य सरकार से जवाब तलब कर चुका है
आयोगों में नियुक्तियों को लेकर हाईकोर्ट भी कई बार राज्य सरकार से जवाब तलब कर चुका है. आयोगों को सशक्त बनाना राज्य सरकार का दायित्व भी है ताकि लोगों को सहज और सुलभ न्याय उपलब्ध हो सके. लेकिन प्रदेश में आयोगों की लगातार बरती जा रही उपेक्षा से लोगों को न्याय मिलने में देरी हो रही है.

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