Jaipur: प्रतियोगी परीक्षाओं के कैलेंडर जारी, फिर भी असमंजस में हैं 1.5 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी, जानिए वजह

अभ्यर्थियों की मानें तो ऑनलाइन स्टडी से क्वेरीज और डाउट क्लियर नहीं हो पाते हैं. ऐसे में एक तरफा पढ़ाई का ही एहसास है.

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने 09 प्रतियोगी परीक्षाओं और 6 परीक्षाओं के साक्षात्कार की तिथि जारी कर दी है. कर्मचारी चयन बोर्ड (Staff selection board) भी पटवार भर्ती समेत 14 भर्तियों का कैलेंडर जारी कर दिया है.

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जयपुर. राजस्‍थान में बेरोजगारों को नई भर्तियों की सौगात मिल चुकी है. हाल ही में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने 9 प्रतियोगी परीक्षाओं और 6 परीक्षाओं के साक्षात्कार की तिथि जारी कर दी है. कर्मचारी चयन बोर्ड (Staff selection board) भी पटवारी भर्ती समेत 14 भर्तियों का कैलेंडर जारी कर दिया है. लेकिन, अब अभ्यर्थियों के सामने दूसरा संकट आ खड़ा हुआ है और वह है तैयारी का. कोरोना अनलॉक 2.0 में अभी भी कोचिंग संस्थान नहीं खोले जा सके हैं. वहीं, ऑनलाइन कोचिंग के विकल्प स्टूडेंट्स को रास नहीं आ रहे हैं. ऐसे हालात में प्रतियोगी परीक्षाओं की तिथि घोषित होने के बाद भी अभ्यर्थी असमंजस में हैं.

राजधानी जयपुर में कोरोना संकट के चलते मार्च महीने में बंद हुए कोचिंग संस्थान और लाइब्रेरी तीन महीने बाद भी नहीं खोले जा सके हैं. अनलॉक-2.0 में शिक्षण संस्थाओं को क्लास रूम टीचिंग की राहत नहीं मिल सकी है. स्कूल कॉलेजों के साथ में 31 जुलाई तक कोचिंग संस्थानों को भी बंद रखने के निर्देश जारी किए गए हैं. शहर के रिद्धि सिद्धि, त्रिवेणी नगर, दुर्गापुरा, मानसरोवर और प्रताप नगर में स्थित कोचिंग संस्थान फिलहाल पूरी तरह सूने पड़े हुए हैं. अभ्यर्थियों की मानें तो ऑनलाइन स्टडी से क्वेरीज और डाउट क्लियर नहीं हो पाते हैं. ऐसे में एक तरफा पढ़ाई का ही एहसास है. कुछ स्टूडेंट्स इस उम्मीद में राजधानी पहुंचने लगे हैं कि आने वाले दिनों में उनकी कोचिंग क्लासेज दोबारा शुरू हो सकेगी.

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जयपुर में हैंछोटे बड़े करीब 500 कोचिंग संस्थान
राजधानी जयपुर में छोटे बड़े करीब 500 कोचिंग संस्थान हैं. इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए 1.5 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स पढ़ाई करते हैं, लेकिन लॉकडाउन के बाद ज्यादातर कोचिंग संस्थान ऑनलाइन कोचिंग पर ही निर्भर हैं. हालांकि, ऑनलाइन कोचिंग से संचालकों कि रोजी-रोटी पर बुरी मार पड़ी है. इसके जरिए उनके खर्चे भी नहीं निकल पा रहे हैं. बड़े और महंगे इंस्टीट्यूट से लेकर मध्यम दर्जे के कोचिंग संस्थानों को भी संस्थानों का किराया चुकाना भारी पड़ रहा है.

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सबको राहत मिली कोचिंग संस्थानों को क्यों नहीं?
कोचिंग संस्थानों के संचालकों का कहना है कि जब अनलॉक की प्रक्रिया में हर वर्ग को राहत दी जा चुकी है तो फिर उन्हें क्यों नहीं दी गई ? उनके लिए भी गाइडलाइन बनाकर कोचिंग संस्थानों की क्लास रूम स्टडीज को शुरू किया जा सकता है. इसमें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा सकता है. प्रतियोगी परीक्षाओं के समय स्टूडेंट के लिए यह बेहद जरूरी भी है.

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