Rajasthan: पहले भी शॉर्ट नोटिस पर बुलाये जाते रहे हैं विधानसभा सत्र, पढ़ें कब-कब हुआ ऐसा
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Rajasthan: पहले भी शॉर्ट नोटिस पर बुलाये जाते रहे हैं विधानसभा सत्र, पढ़ें कब-कब हुआ ऐसा
12वीं से लेकर 15वीं विधानसभा की बैठकों में कई मर्तबा अल्प अवधि की सूचना पर सत्र बुलाया गया है.

सरकार और राजभवन में शॉर्ट नोटिस पर विधानसभा का सत्र बुलाए जाने को लेकर आपस में ठनी हुई है. ऐसा नहीं है कि प्रदेश में शॉर्ट नोटिस पर पहले कभी सत्र आहूत नहीं हुए हैं. पहले भी ऐसा होता रहा है, लेकिन इस बार प्रदेश की सियासत कुछ अलग बयां कर रही है.

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जयपुर. प्रदेश की सियासत में पिछले एक पखवाड़े से हर रोज नया राजनीतिक घटनाक्रम (Political events) देखने को मिल रहा है. सत्तारूढ़ दल के विधायक दो खेमों में बंटकर अपने आप को होटलों में बंद किये हुये हैं. सरकार और राजभवन में शॉर्ट नोटिस पर विधानसभा का सत्र (Assembly session) बुलाए जाने को लेकर आपस में ठनी हुई है. ऐसा नहीं है कि प्रदेश में शॉर्ट नोटिस पर पहले कभी सत्र आहूत नहीं हुए हैं. पहले भी ऐसा होता रहा है, लेकिन इस बार प्रदेश की सियासत कुछ अलग बयां कर रही है. इसमें सत्र बुलाए जाने के मामले में कोरोना संक्रमण भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवा रहा है.

13वीं विधानसभा के दौरान सात बार ऐसा हो चुका है
प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत विधानसभा के सत्र को आहूत करने का फैसला कैबिनेट के जरिये राज्यपाल सम्मन जारी करके करते हैं. लेकिन इस बार राज्य सरकार और राजभवन में शॉर्ट नोटिस पर सदन बुलाने को लेकर ठनी हुई है. विधानसभा के इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि 12वीं से लेकर 15वीं विधानसभा की बैठकों में कई मर्तबा अल्प अवधि की सूचना पर सत्र बुलाया गया है. इनमें 12वीं विधानसभा के दौरान दो बार ऐसा हुआ है. 13वीं विधानसभा के दौरान सात बार ऐसा हो चुका है. उसके बाद 14वीं विधानसभा के दौरान एक बार और मौजूदा 15वीं विधानसभा के दौरान चारों सत्र शार्ट नोटिस पर ही बुलाए गए हैं.
यह रहा है इतिहास
12वीं विधानसभा के दौरान 2 बार शार्ट नोटिस पर सत्र आहूत किया गया.
12वीं विधानसभा का आठवां सत्र 20 दिन की अवधि में बुलाया गया था. उसे भी शार्ट नोटिस माना गया था.


12वीं विधानसभा का दसवां सत्र 13 दिन की अल्प अवधि पर आहूत हुआ था.

13वीं विधानसभा में सात बार अल्प अवधि पर सत्र बुलाया गया.
13वीं विधानसभा में इन सात बार में 10 दिन से लेकर 19 दिन की अवधि में ये सत्र आहूत किये गये थे.

14वीं विधानसभा में एक बार 8 दिन के अंतराल में आहूत हुआ था सदन.

15वीं विधानसभा में चारों बार शार्ट नोटिस पर सदन आहूत हुए हैं. इनमें पहला सत्र में 4 दिन की अवधि में, दूसरा सत्र 17 दिन की अवधि में, तीसरा और चौथा सत्र 5 दिन की अवधि में हुए थे आहूत.

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पूर्व विधानसभाध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने उठाया था मुद्दा
15वीं विधानसभा का पहला सत्र शॉर्ट टर्म नोटिस पर बुलाये जाने पर 14वीं विधानसभा के अध्यक्ष रहे कैलाश मेघवाल ने इसका मु्द्दा उठाया था, लेकिन तत्कालीन राज्य़पाल कल्याण सिंह ने उसे नहीं माना और 4 दिन की अवधि में सदन आहूत किया. इसी तरह दूसरा सत्र 17 दिन की अवधि में आहूत किया गया. वहीं तीसरा सत्र संविधान दिवस पर सदन में चर्चा करवाने के लिए पांच दिन के शॉट टर्म नोटिस पर बुलाया गया था. उसके बाद इसी साल 24 जनवरी का सत्र जो कि बजट सत्र कहलाया उसे भी पांच दिन की अल्प अवधि में बुलाया गया था. इसे 126वें संविधान संशोधन (नागरिकता संशोधन का अनुसमर्थन) करने के लिए आहूत किया गया था.

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इस बार ये खामियां आईं आड़े
जानकारी के मुताबिक विधानसभा-सत्र आहूत करने के मामले में पहली मर्तबा कैबिनेट की ओर से सत्र बुलाने की 'तिथि' का उल्लेख नहीं किया गया था. दूसरी बार में 'विश्वास मत' का जिक्र नहीं किया गया. वहीं सरकार की ओर से सत्र आहूत करने की 'विशेष परिस्थितियां' नहीं बताई गई. इधर राजभवन के सूत्रों से पता चला कि सत्र आहूत करने के बारे में विशेष परिस्थिति नहीं बताई गई जबकि कोरोनो महामारी फैल रही है. इसके अलावा कांग्रेस विधायक दल दो खेमों में बंटकर होटल में बन्द है और सरकार भी होटल से ही चल रही है. संभवत इन सवालों के जवाब से सरकार राजभवन को विश्वास में ले पाई तो सत्र आहूत हो सकेगा.
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