कांग्रेस: चुनाव मॉनिटरिंग सेल ने पकड़ी राजस्थान के नेताओं की कारस्तानी, रिपोर्ट भेजने की तैयारी
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कांग्रेस: चुनाव मॉनिटरिंग सेल ने पकड़ी राजस्थान के नेताओं की कारस्तानी, रिपोर्ट भेजने की तैयारी
कई नेता और मंत्री मंडावा व खींवसर विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के प्रचार करने की बात कहकर वहां पहुंचे ही नहीं. फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

राजस्थान (Rajasthan) में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार (Congress Government) और संगठन (Organization) में तालमेल (Co-ordination) न होने की बात अब तक दबी जुबान में कही जाती रही है, लेकिन अब लड़ाई खुलकर सामने आ गई है.

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जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार (Congress Government) और संगठन (Organization) में तालमेल (Co-ordination) न होने की बात अब तक दबी जुबान में कही जाती रही है, लेकिन अब लड़ाई खुलकर सामने आ गई है. प्रदेश में खेमों में बंटी कांग्रेस (Divided in camps) के कई नेता और मंत्री (Leader and minister)  मंडावा व खींवसर (Mandawa and Khivnsar) के उपचुनाव (Bye election) प्रचार करने का कहकर दूसरे शहरों में घूमते रहे. लेकिन पार्टी की चुनाव मॉनिटरिंग सेल (Election monitoring cell) ने उनकी यह कारस्तानी (Activities) पकड़ ली और अब आलाकमान (High comman) को इस बारे में रिपोर्ट (Report) भेजने की तैयारी की जा रही है.

उपचुनाव में प्रचार करने की बात कहकर वहां पहुंचे ही नहीं
खेमों में बंटकर एक दूसरे को मात देने में लगे प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के चलते कांग्रेस की स्थिति अजीब हो गई है. आपसी खींचतान के चलते हालात इस कदर बिगड़े गए हैं कि कई नेता और मंत्री मंडावा व खींवसर विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के प्रचार करने की बात कहकर वहां पहुंचे ही नहीं. लेकिन चुनाव मैनेजमेंट का काम देख रहे प्रभारियों तक नेताओं की इस कारस्तानी कि सूचना पहुंच गई. अब उन नेताओं की रिपोर्ट आलाकमान को भेजने की तैयारी की जा रही है. राजस्थान के प्रभारी सचिव विवेक बंसल भी इस बात को स्वीकार करते हुए कहते है कि इस तरह की सूचना आई हैं. रिपोर्ट बनाकर महासचिव के जरिए आलाकमान को भेजी जाएगी.

नेता स्वीकार कर रहे हैं कि कुछ तो गड़बड़ है
प्रदेश कांग्रेस में नेताओं आपसी लड़ाई को अब तक अनदेखा कर बयान देने से बचते रहे नेता भी अब दबी जबान में ही सही यह स्वीकारने लगे हैं कि राजस्थान में सत्ता और संगठन के तालमेल में कुछ तो गड़बड़ है. वहीं दूसरी तरफ निकाय चुनाव में हाईब्रिड फार्मूला लागू करने को लेकर उपजे विवाद को भी कांग्रेस के नेता घर की बात को घर में ही सुलझा लेने के दावे कर रहे हैं.



बाजी किसके हाथ उपचुनाव के नतीजे तय करेंगे
विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए सत्ता हासिल करने की राह जितनी आसान दिख रही थी सरकार बनने के बाद शासन करने की डगर उतनी ही मुश्किल होती जा रही है. ऐसे में बाजी किस गुट के हाथ रहेगी यह तो उपचुनाव के नतीजे ही तय करेंगे.

(रिपोर्ट- अभिषेक आढ़ा)

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