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राजस्थान में सियासी उठापटक में उलझी कांग्रेस ने बिसराया 'मंहगाई' का मुद्दा, जानिये क्या है आगे की प्लानिंग

पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा को 29 जुलाई को   प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महंगाई के खिलाफ अभियान छेड़ने का ऐलान करना था.

पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा को 29 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महंगाई के खिलाफ अभियान छेड़ने का ऐलान करना था.

Rajasthan congress news: सियासी झंझावातों में फंसी कांग्रेस इस बार खुद की ओर से उठाये गये महंगाई जैसे अहम मुद्दे को ही बिसरा बैठी है. कांग्रेस ने पिछले माह ऐलान किया था कि वह महंगाई (inflatio) को लेकर केन्द्र खिलाफ बड़ा अभियान चलायेगी, लेकिन वह खुद की उलझनों से ही बाहर नहीं निकल पाई और यह मुद्दा पीछे रह गया.

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जयपुर. राजस्थान में सियासी उठापटक के चलते कांग्रेस (Congress) का महंगाई के खिलाफ अभियान (campaign against inflation) पीछे छूट गया है. पार्टी को इस अभियान का गांव-ढाणी तक विस्तार करना था. पार्टी बड़े स्तर पर इसकी तैयारियों में भी जुटी थी. लेकिन इसी बीच हुई सियासी उठापटक में पार्टी का पूरा प्लान धरा का धरा रह गया. इस अभियान को लेकर खुद पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasara) ने कहा था कि पार्टी अब महंगाई के मुद्दे को गांव-ढाणी तक लेकर जाएगी और 29 जुलाई को इसकी पूरी रूपरेखा का ऐलान किया जाएगा. उसके बाद 29 जुलाई कब की बीत चुकी है, इस मसले पर पार्टी में कोई हलचल नहीं हो रही है.

दरअसल 29 जुलाई को गोविंद सिंह डोटासरा ने पीसीसी चीफ के तौर पर कार्यभार संभालने का 1 साल पूरा किया था. उस दिन उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महंगाई के खिलाफ अभियान छेड़ने का ऐलान करना था. लेकिन इसी बीच दिल्ली से नेताओं के दौरे शुरू हो गए और पूरी पार्टी सियासी असमंजस में उलझ गई. अभी भी मंत्रिमंडल पुनर्गठन, राजनीतिक नियुक्ति और संगठनात्मक नियुक्तियों जैसे मसलों को लेकर असमंजस की स्थितियां चल रही है.

जनता का अच्छा रिस्पॉन्स भी मिला था
लिहाजा अपनी ही परेशानियों में उलझी कांग्रेस ने आम जनता से जुड़े महंगाई जैसे मुद्दे को बिसरा दिया. जबकि पिछले दिनों पार्टी ने महंगाई के मुद्दे पर अभियान चलाया था और इस पर उसे जनता का अच्छा रिस्पॉन्स भी मिला था. इसी से उत्साहित पार्टी ने अभियान का विस्तार करने की बात कही थी. लेकिन ऐसा हो नहीं सका.

यह मुद्दा फिलहाल ठंडे बस्ते में ही रहेगा
पार्टी सूत्रों के मुताबिक वर्तमान हालात में तो कांग्रेस खुद ही इस कदर उलझी है कि उसे दूसरे कार्यों के लिये फुर्सत ही नहीं मिल रही है. ताजा हालात को देखते हुये यह मुद्दा फिलहाल ठंडे बस्ते में ही रहेगा. सियासी उलझने सुलझने के बाद ही संभवतया पार्टी इस पर विचार करेगी. वैसे भी संगठनात्मक निुयक्तियों के अभाव में मुद्दे को गांव-गांव, ढाणी-ढाणी तक पहुंचाना टेढ़ी खीर है.

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