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लोकसभा चुनाव: राष्ट्रवाद और गौ भक्ति के एजेंडे को हथिया रही है कांग्रेस?

फाइल फोटो.
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मंदिर, राष्ट्रवाद और गौरक्षा जैसे मसले अब तक हिन्दूत्व का चोला ओढे़ बैठी बीजेपी के मुद्दे माने जाते रहे हैं लेकिन अब कांग्रेस में भी इन मुद्दों को हथियाने की होड़ साफ दिखाई दे रही है.

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क्या कांग्रेस अब सॉफ्ट हिन्दूत्व की राह पर है? इस सवाल को लेकर पक्ष-विपक्ष के अलग-अलग जवाब और तर्क हो सकते हैं लेकिन मुद्दों को हथियाने की होड़ देश-प्रदेश की राजनीति में साफ तौर पर नजर आ रही है. अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए राजनीतिक दल अब एक-दूसरे के मुद्दे हथियाने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं. मंदिर, राष्ट्रवाद और गौरक्षा जैसे मसले अब तक हिन्दूत्व का चोला ओढे़ बैठी बीजेपी के मुद्दे माने जाते रहे हैं लेकिन अब लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में भी इन मुद्दों को हथियाने की होड़ साफ दिखाई दे रही है.

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने टेम्पल रन के जरिए सबको चौंकाते हुए इसकी पहल की थी और उसके बाद किए जा रहे एक के बाद एक फैंसले इस बात की ताकीद कर रहे हैं कि कांग्रेस अब बीजेपी से इन मुद्दों को हथियाने की फिराक में है. राजस्थान में कांग्रेस के सरकार में आते ही गौपालन निदेशालय द्वारा एक पत्र जिला कलेक्टर्स को जारी किया गया कि अब निराश्रित गाय गोद लेने वालों को गणतंत्र दिवस और स्वाधीनता दिवस पर सम्मानित किया जाएगा. प्रदेश में गायों की दयनीय हालत को देखते हुए जिले के अफसरों, भामाशाहों और समाजसेवियों को गौवंश को गोद लेने के लिए प्रेरित करने को भी कहा गया है.

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इस मामले में गौपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया का कहना है कि वे खुशनसीब हैं कि उन्हें गौपालन विभाग का जिम्मा दिया गया है. उन्होंने कहा कि वे बचपन से गौसेवा से जुड़े हैं. हमें शास्त्रों में बताया गया है कि गाय में सभी देवी-देवताओं का वास है लेकिन आज जितनी परेशानी में गौवंश है उतनी परेशानी में कोई नहीं है. गौपालन मंत्री का कहना है कि उनकी प्राथमिकता संत-महात्मा और अन्य सम्बन्धित लोगों से चर्चा कर गौवंश के लिए माकूल व्यवस्थायें करने की रहेगी. राज्य सरकार जल्द ही आवारा गौवंश के संरक्षण के लिये नीति भी तैयार करने जा रही है.
कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि कांग्रेस सब कुछ लुटा देने के बाद होश में आई है और अब गाय के मुद्दे को हाईजैक करना चाहती है लेकिन कांग्रेस का यह दिखावटीपन और बनावटीपन नहीं चलेगा.
ज्ञानदेव आहूजा, प्रदेश उपाध्यक्ष, बीजेपी


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मंदिर, राष्ट्रवाद और गौरक्षा जैसे मसलों को लेकर भारतीय जनता पार्टी की स्पष्ट और आक्रामक नीति रही है जिसका उसे चुनावी राजनीति में भरपूर फायदा भी मिला है. अब कांग्रेस इन मुद्दों में सेंध लगाकर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत बनाने का प्रयास कर रही है. इसी तरह की कुछ बानगियां इन दिनों शहादत के मामले में दिखाई दे रही हैं. कांग्रेसी नेता शहीदों की अन्त्येष्टि में अब प्राथमिकता से शामिल होने लगे हैं. श्रीनगर में शहीद हुए सीकर के लाड़ले महेश कुमार मीणा के मामले में भी ऐसी ही कुछ कवायद दिखाई दी.

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मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें शहीद के सम्मान में पहुंचने के निर्देश दिए गए. स्कूल के नाम परिवर्तन के लिए कलेक्टर से बात हो चुकी है और जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर शहीद के नाम पर इसका नामकरण कर दिया जायेगा.
गोविंद सिंह डोटासरा, शिक्षा मंत्री


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वोटर्स के बीच अपनी मजबूत पैठ बनाने के लिए हर वर्ग को साधना राजनीतिक दलों की मजबूरी है. कमोबेश सभी दलों ने इस बात को भलीपूर्वक समझ भी लिया है और बीजेपी के कोर इश्यूज में कांग्रेस का दखल इसी बात का परिचायक है. ऐसा ही दखल बीजेपी का भी कांग्रेस के मुद्दों में दिखाई दिया था जब उसने महात्मा गांधी के नाम को भुनाने की कोशिश की थी. बहरहाल अब सभी राजनीतिक दल एक-दूसरे के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिशें कर रहे हैं और कांग्रेस भी इसके कहीं पीछे नजर नहीं आ रही.

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