राहुल गांधी के जयपुर दौरे से संवरी नज़र आ रही है बिखरी-बिखरी सी कांग्रेस

प्रदेश में चुनाव अभियान का शंखनाद करने जयपुर आए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दौरे से प्रदेश कांग्रेस को 'बूस्टअप' मिलने की उम्मीद है.

Sandeep Rathore | News18 Rajasthan
Updated: August 11, 2018, 2:23 PM IST
राहुल गांधी के जयपुर दौरे से संवरी नज़र आ रही है बिखरी-बिखरी सी कांग्रेस
प्रदेश में चुनाव अभियान का शंखनाद करने जयपुर आए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दौरे से प्रदेश कांग्रेस को 'बूस्टअप' मिलने की उम्मीद है.
Sandeep Rathore | News18 Rajasthan
Updated: August 11, 2018, 2:23 PM IST
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की राजस्थान गौरव यात्रा के बाद राजनीतिक सक्रियता और प्रचार में पिछड़ने का दबाव महसूस कर रही कांग्रेस में अब जबर्दस्त उत्साह दिख रहा है. प्रदेश में चुनाव अभियान का शंखनाद करने आ रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दौरे से प्रदेश कांग्रेस को 'बूस्टअप' मिलने की उम्मीद है. यह उम्मीद इसलिए भी बढ़ी है, क्योंकि पिछले काफी समय से प्रदेश कांग्रेस में हताशा, 'मेरा बूथ मेरा गौरव' अभियान में शक्ति प्रदर्शन और फिर सीएम फेस को लेकर उठे मतभेदों के बाद राहुल के दौरे के बहाने राज्य के सभी दिग्गज एक साथ एक सुर में हैं.

हालांकि बीजेपी के नेता और पंचायती राज मंत्री राजेंद्र राठौड़ का कहना है कि राहुल गांधी के रोड शो से कांग्रेस को कोई फायदा नहीं होने वाला है. कांग्रेस को जनता ने पूरी तरह से नकार दिया है, लेकिन फिर भी कांग्रेस को गलतफहमी है तो इस रैली को रामलीला मैदान में क्यों कर रहे हैं. उधर, राहुल गांधी के दौरे से उत्साहित प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट कहते हैं कि राहुल गांधी का जयपुर दौरा ऐतिहासिक होगा.

उल्लेखनीय है कि गत विधानसभा चुनावों में हासिए पर चली गई कांग्रेस लगातार साढ़े चार साल तक वापस उठने का प्रयास तो करती रही, लेकिन उसे जितनी सफलता की उम्मीद थी, उतनी मिल नहीं पाई. इसकी बड़ी वजह पार्टी में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ सचिन पायलट कैंप्स में सही तालमेल नहीं होना रहा. इस बीच पार्टी को हल्का सा बूस्टअप उपचुनावों में मिला, जब उसने अलवर व अजमेर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर हाथ की पकड़ मजबूत करते हुए तीन सीटें अपने पाले में कर ली. यह वह समय था जब पार्टी में उत्साह का संचार हुआ, लेकिन इसमें दबे स्वर में पार्टी में यह सुगबुगाहट जोर पकड़ गई कि इस जीत में पार्टी से ज्यादा सत्ता विरोधी लहर का योगदान रहा है.

बार-बार मायूस होता रहा कार्यकर्ता

हालांकि यह जोश कुछ समय ही बना रहा. उसके बाद पीसीसी की ओर से शुरू किए 'मेरा बूथ, मेरा गौरव' अभियान में पार्टी की कलह फिर खुलकर सामने आ गई. ये सम्मेलन टिकट की आंस लगाए पार्टी नेताओं के लिए शक्ति प्रदर्शन के अखाड़े बन गए. इससे कार्यकर्ता एक बार फिर मायूस हुआ. यह अभियान अभी निपटा भी नहीं था कि उससे पहले ही प्रदेश कांग्रेस में सीएम फेस को लेकर विवाद गहरा गया. मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर गहलोत और पायलट खेमों से रह-रहकर विवादास्पद बयान सामने आने लगे. स्थिति यहां तक पहुंच गई कि खुद गहलोत और पायलट के शब्दों में एक दूसरे के प्रति तल्खियां जाहिर होने लगीं.

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खलने लगी थी भाजपा की आक्रामकता
इस बीच भाजपा लगातार आक्रामक होती गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सफल लाभार्थी जनसंवाद कार्यक्रम और उसके बाद लगातार दो बार भाजपा आलाकमान अमित शाह के राजस्थान दौरे से कांग्रेस कार्यकर्ता व पदाधिकारी छटपटा उठे. इस दरम्यिान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राजस्थान गौरव यात्रा में पूरे उदयपुर संभाग को नाप डाला. हालांकि यह छटपटाहट सीधे तौर पर जाहिर नहीं हुई, लेकिन कांग्रेस में अंदरखाने इस बात की जबर्दस्त चर्चा रही कि '...बस अब ज्यादा देरी ठीक नहीं है'.

ऐसे हालात में राहुल गांधी का संक्षिप्त दौरा भी पार्टी के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है. राहुल के दौरे से पहले बिखरी-बिखरी नजर आने वाली कांग्रेस सजी संवरी सी नजर आ रही है. राहुल गांधी के दौरे से अब कार्यकर्ता को भी लग रहा है कि वह एक सही दिशा में मैदान में उतरकर प्रतिद्वंद्वी का मुकाबला कर पाएगा.

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