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Rajasthan: नए साल में कांग्रेस के सामने होगी 2 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव की जीतने की बड़ी चुनौती

दोनों सीटों पर कांग्रेस सहानुभूति फैक्टर को ध्यान में रखकर दिवंगत नेताओं के परिवारों को ही टिकट दे सकती है.
दोनों सीटों पर कांग्रेस सहानुभूति फैक्टर को ध्यान में रखकर दिवंगत नेताओं के परिवारों को ही टिकट दे सकती है.

नये साल में कांग्रेस (Congress) के सामने 2 विधानसभा सीटाें के उपचुनाव जीतने की बड़ी चुनौती है. ये सीटें कैबिनेट मंत्री भंवरलाल मेघवाल और विधायक कैलाश त्रिवेदी के निधन (Death) से खाली हुई हैं.

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जयपुर. मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल (Bhanwarlal Meghwal) के निधन के बाद अब कांग्रेस (Congress) के 2 विधायक कम हो गए है. इससे पहले सहाड़ा विधायक कैलाश त्रिवेदी का कोरोना के कारण निधन हो चुका है. इन दोनों नेताओं के निधन के बाद विधानसभा की 2 सीटें खाली हो गई हैं. इन 2 सीटों पर नए साल में उपचुनाव (By-elections) होंगे. मास्टर भंवरलाल के निधन के बाद कैबिनेट में भी 1 जगह और खाली हो गई है. अब मंत्रिमंडल में सीएम अशोक गहलोत समेत 21 मंत्री रह गए हैं. 9 मंत्रियों की जगह खाली है.

मास्टर भंवरलाल के निधन से सुजानगढ़ और कैलाश त्रिवेदी के निधन से खाली हुई सहाड़ा सीट पर अब उपचुनाव होंगे. कानूनन विधानसभा सीट खाली होने पर 6 माह के भीतर उस पर उपचुनाव करवाने का प्रावधान है. ऐसे में इन दोनों सीटों पर अब मार्च -अप्रैल में उपचुनाव होने की संभावना है. इन दोनों सीटों पर उपचुनाव कांग्रेस के लिए चुनौती होंगे. पहली चुनौती इन दोनों ही सीटों पर जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश करना होगा. दोनों सीटों पर कांग्रेस सहानुभूति फैक्टर को ध्यान में रखकर दोनों दिवंगत नेताओं के परिवारों से ही टिकट दे सकती है. सुजानगढ़ से मास्टर भंवरलाल की पत्नी केसर देवी को टिकट दिया जा सकता है. केसर देवी पंचायत समिति सदस्य के पद पर निर्विरोध चुनी जा चुकी हैं.

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दोनों सीटों पर जीतना कांग्रेस के लिये बहुत जरूरी होगा
कांग्रेस के लिये दोनों सीटों पर जीतना बहुत जरूरी होगा. क्योंकि इन दोनों उपचुनाव के नतीजे प्रदेश सरकार के सवा 2 साल के काम पर जनता की मुहर के तौर देखे जाएंगे. अगर कांग्रेस जीतने में कामयाब रही तो इसे सरकार और संगठन की बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जाएगा. लेकिन अगर उपचुनाव में कांग्रेस हारती है तो विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ जनता के जनादेश के रूप में प्रचारित करेगा. पीसीसी चीफ का पद संभालने के बाद गोविंदसिंह डोटासरा का यह पहला विधानसभा उपचुनाव होगा.

गत वर्ष अक्टूबर में मंडावा और खींवसर में उपचुनाव हुए थे
पिछले साल अक्टूबर में मंडावा और खींवसर में उपचुनाव हुए थे. उस वक्त मंडावा कांग्रेस और खींवसर आरएलपी ने जीती थी. यह संयोग ही है कि मंडावा के उपचुनाव में मौजूदा पीसीसी चीफ गोविंदसिंह डोटासरा और दिवंगत मंत्री मास्टर भंवरलाल ने ही पूरे समय चुनाव प्रचार और प्रबंधन का जिम्मा सम्भाला था. दोनों सीटों के उपचुनाव के नतीजे आगे का पोलिटिकल नरेटिव और परशेप्शन तय करेंगे.
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