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प्रदेश में लड़खड़ा रही है कांग्रेस की देन महात्मा गांधी नरेगा योजना, रोजगार का आंकड़ा गिरा

फाइल फोटो।
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प्रदेश में अधिकारियों की लापरवाही ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है. मनरेगा में साल दर साल पात्र परिवारों को 100 दिन रोजगार मिलने का आंकड़ा लगातार गिरता जा रहा है.

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प्रदेश में अधिकारियों की लापरवाही ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है. महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत पात्र परिवारों को हर साल 100 दिन का रोजगार दिए जाए का प्रावधान है, लेकिन योजना की प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव में ग्रामीणों को पूरा रोजगार नहीं मिल पा रहा है. इतना ही नहीं साल दर साल पात्र परिवारों को 100 दिन रोजगार मिलने का आंकड़ा लगातार गिरता जा रहा है.

पात्र परिवारों को सौ दिन का रोजगार देने में इस साल अब तक उदयपुर जिला सबसे अव्वल है, लेकिन वहां भी केवल 2.8 प्रतिशत पात्र परिवारों को यह लाभ मिला है. बारां 2.8 प्रतिशत के साथ दूसरे, जैसलमेर 2.3 प्रतिशत के साथ तीसरे, बाड़मेर 2.1 प्रतिशत के साथ चौथे और चूरू 1.5 प्रतिशत उपलब्धि के साथ पांचवें स्थान पर है. सबसे फिसड्डी जिलों की बात करें तो जयपुर और टोंक 0.1 प्रतिशत उपलब्धि के साथ सबसे निचले पायदान पर हैं. वहीं सवाईमाधोपुर, दौसा और बूंदी भी सबसे फिसड्डी पांच जिलों में शुमार हैं. प्रदेश केवल सौ दिन का रोजगार देने में ही नहीं, बल्कि मानव दिवस सृजन में भी पिछड़ रहा है. मनरेगा में रोजगार हालांकि मांग पर आधारित है, लेकिन योजना के डिमाण्ड केप्चर सिस्टम में भी खामियां सामने आई हैं.

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पिछले बरसों में प्रदेश में मनरेगा में दिए गए रोजगार की स्थिति
- 2008-09 में 25.94 लाख परिवारों को 100 दिन का रोजगार मिला था.
- 2009-10 में 17.63 लाख परिवारों को 100 दिन का रोजगार मिला.
- 2010-11 में 4.7 परिवारों को 100 दिन का रोजगार मिला.
- 2017-18 में महज 2.28 लाख परिवारों को 100 दिन का रोजगार मिला.
- 2018-19 में अब तक केवल 44 हजार को 100 दिन का रोजगार मिला.

अब डिप्टी सीएम पायलट ने दिए सख्त निर्देश
श्रमिक को 90 दिन कार्य पूर्ण करने पर श्रम विभाग की योजनाओं का भी लाभ मिलता है, जिससे वो वंचित हो रहे हैं. विभिन्न स्तरों पर मॉनिटरिंग का अभाव इसकी प्रमुख वजह है. अब सूबे में नई सरकार बनने के साथ ही इस पर सक्रियता नजर आ रही है. ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग का प्रभार देख रहे उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट हालात को सुधारने के सख्त निर्देश दिए हैं.
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