अपना शहर चुनें

States

COVID-19:अफवाहों के चलते राजगढ़ में पीट-पीट कर मार डाले चमगादड़, वन विभाग ने की एडवाइजरी जारी

अफवाहों के चलते राजगढ़ में पीट-पीट कर मार डाले चमगादड़ (फाइल फोटो)
अफवाहों के चलते राजगढ़ में पीट-पीट कर मार डाले चमगादड़ (फाइल फोटो)

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार चमगादड़ों (Bats) की कई प्रजातियां किसानों के लिये अत्यंत लाभदायक हैं तथा फसलों की हानिकारक कीटों से सुरक्षा करती हैं.

  • Share this:
चूरू. कोरोना वायरस (Coronavirus) के साथ ही अफवाहों के फैलने के बाद चमगादड़ (Bats) खौफ का पर्याय बन गये हैं. इस चक्कर में कई जगह चमगादड़ को मार दिए जाने की बात भी सामने आई है. चूरू जिले के राजगढ़ में एलआईसी दफ्तर में तो चमगदाड़ों से लोग इतना डर गये कि तकरीबन एक दर्जन से ज्यादा चमगादडों को डंडों से पीटकर घायल कर दिया. प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो इस दौरान कुछ चमगादड़ मर भी गये. सूचना के बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने घायल चमगादडों को लीलकी बीड में छोड़ा. इस घटना के बाद हरकत में आये चूरू के वन विभाग ने चमगादड़ को लेकर आमजन में उत्पन्न हुई भ्रांतियों को लेकर एक एडवाजयरी जारी की है.

वन विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी के मुताबिक चमगादड हमारे मित्र प्राणी हैं तथा इनका अस्तित्व मानव जाति के लिए आवश्यक है इसलिए इन्हे कोरोना के लिये दोषी नहीं मानते हुए इनकी सुरक्षा की जाए. वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भारत में लगभग 128 प्रकार की चमगादड़ प्रजातियां पाई जाती हैं जिनमें से लगभग 25 प्रजातियां राजस्थान में निवास करती हैं. हाल ही में चूरू जिले में ऐसी ही एक प्रजातिः ग्रेटर माऊस टेल्ड बेट को घायल किये जाने की सूचना मिली थी. इस प्रजाति के किसी भी प्रकार से मनुष्य के लिये हानिकारक होने अथवा इसके द्वारा कोरोना वायरस फैलने के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.

चमगादड़ से कोई खतरा नहीं
वन विभाग के अधिकरियों ने बताया कि हाल ही में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में दक्षिण एशियाई चमगादड़ों की दो प्रजातियों (1. कॉमन इण्डियन फ्लाईंग फॉक्स व 2. फुल्वस फ्रुट बेट) के बारे में खुलासा किया गया है जिसमें बताया गया है कि इनका मानव स्वास्थ्य पर कोई खतरा नहीं है. चमगादड़ों की कई प्रजातियां किसानों के लिये अत्यंत लाभदायक हैं तथा फसलों की हानिकारक कीटों से सुरक्षा करती हैं. अतः मानव प्रजाति के लिये इन चमगादड़ प्रजातियों का पारिस्थितिकीय सह-अस्तित्व अतिआवश्यक है तथा इनको बचाया जाना हमारे जीवन के लिये जरूरी है. अभी तक ऐसी कोई भी सत्यापित वैज्ञानिक शोध सामने नहीं आया है जो इस बात की पुष्टि करता हो कि चमगादड़ों से कोविड-19 जैसी महामारी फैल रही है अथवा मानव स्वास्थ्य को इनसे कोई खतरा है. इसलिये मात्र भयवश अथवा अंधविश्वास के चलते कोई भी इन बेजुबान निर्दोष प्राणियों को ना मारें.
ये भी पढ़ें: लॉकडाउन में बेरोजगार मजदूरों को जल्द मिल सकता है रोजगार, CM गहलोत ने दिये ये निर्देश...


अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज