Corona Effect: निजी अस्पताल अब इलाज में मरीज से पीपीई किट का खर्च भी कर रहे हैं वसूल

फिलहाल दिल्ली सरकार कोरोना के मामले में काफी बदतर स्थिति का सामना कर रही है.
फिलहाल दिल्ली सरकार कोरोना के मामले में काफी बदतर स्थिति का सामना कर रही है.

कोरोना संक्रमण और पर्याप्त देखभाल न होने की आशंकाओं के चलते रोगी सरकारी अस्पतालों में जाने से कतरा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ निजी अस्पतालों (Private hospitals) में उन्हें इलाज आम दिनों की अपेक्षा ज्यादा महंगा पड़ रहा है.

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जयपुर. कोरोना (COVID-19) की मार आपातकालीन परिस्थितियों में अस्पताल पहुंच रहे रोगियों पर भी भारी पड़ रही है. कोरोना संक्रमण और पर्याप्त देखभाल न होने की आशंकाओं के चलते रोगी सरकारी अस्पतालों में जाने से कतरा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ निजी अस्पतालों (Private hospitals) में उन्हें इलाज आम दिनों की अपेक्षा ज्यादा महंगा पड़ रहा है.

15 से 20 हजार रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं
दरअसल कोरोना संक्रमण का हवाला देते हुए निजी अस्पतालों ने पीपीई किट का खर्चा भी इलाज में जोड़ना शुरू कर दिया है. 3 दिन अस्पताल में भर्ती रहने वाले मरीज को पीपीई किट के नाम पर 15 से 20 हजार रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं. ऐसे में आपातका

लीन परिस्थितियों में इलाज करवा रहे गरीब तबके के मरीजों पर दोहरी मार पड़ रही है. एक तो उन्हें ना चाहते हुए भी मजबूरी में प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाना पड़ रहा है वहीं दूसरी ओर इलाज का खर्च भी ज्यादा उठाना पड़ रहा है.



सभी मरीजों से पीपीई का अलग-अलग पैसा वसूला जा रहा है
हाल ही में जयपुर के एक बड़े प्राइवेट अस्पताल में स्टेंट डलवाने वाले गंगापुरसिटी निवासी गोविन्द प्रसाद शर्मा का कहना है कि 2 दिन अस्पताल में भर्ती रहने पर उनके बिल में पीपीई किट का 15 हजार रुपये का अतिरिक्त खर्चा जोड़ा गया है. वार्ड में भर्ती सभी मरीजों से पीपीई का अलग-अलग पैसा वसूला जा रहा है जबकि स्टाफ द्वारा सभी के लिए उपयोग तो एक ही किट की जा रही है. अस्पतालों ने इसे भी अपनी कमाई का जरिया बना लिया है.

मरीज से लिखित में ले रहे हैं अस्पताल
मरीज के साथ आये तीमारदार संदीप शर्मा का कहना है कि अस्पताल द्वारा पीपीई किट के उपयोग की बात पहले उनसे सादा कागज पर लिखवाकर हस्ताक्षर करवाये गए हैं. कागज में लिखवाया गया कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए हम मरीज के उपचार हेतु पीपीई किट के उपयोग की सहमति देते हैं और इसका खर्च हमें बता दिया गया है. साथ ही यह भी लिखवाया गया कि मरीज के ज्यादा दिन भर्ती रहने पर इसका अतिरिक्त खर्च लगेगा. राज्य सरकार से पीपीई किट के खर्च की राशि का पुनर्भरण नहीं लिया जा सकेगा.

राशि का पुनर्भरण नहीं हो पाएगा
संदीप का कहना है कि इलाज करवाने वाले उसके पिता पेंशनर हैं और राज्य सरकार से खर्च का पुनर्भरण होता है. लेकिन राज्य सरकार से अनुमति नहीं होने के चलते पीपीई किट की 15 हजार की राशि का पुनर्भरण नहीं हो पाएगा. अस्पताल में भर्ती दूसरे मरीजों के परिजनों का भी कहना है कि पीपीई किट का खर्चा सरकार को उठाना चाहिए या फिर कम से कम प्राइवेट अस्पतालों द्वारा इस एवज में की जा रही मनमानी वसूली पर तो लगाम लगानी चाहिए.

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