कोरोना का कहर: 80 फीसदी घटा गहलोत सरकार का राजस्व, जरुरतें पूरी करने के लिये अब कर्ज ही विकल्प

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि प्रदेश में विकास की गति को थमने नहीं दिया जाएगा. बेहतर आर्थिक प्रबंधन के जरिए स्थितियां संभाली जाएंगी.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि प्रदेश में विकास की गति को थमने नहीं दिया जाएगा. बेहतर आर्थिक प्रबंधन के जरिए स्थितियां संभाली जाएंगी.

Corona's havoc: कोरोना ने आम आदमी की सेहत के साथ-साथ प्रदेश की गहलोत सरकार (Gehlot Government) की आर्थिक सेहत को बिगाड़कर रख दिया है. प्रदेश के विकास कार्यों में खर्च की जाने वाली राशि कोरोना को काबू करने में खर्च हो रही है.

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जयपुर. कोरोना काल (Corona Era) में बार-बार लगाये जा रहे लॉकडाउन (Lockdown) का प्रदेश की इकोनॉमी पर बेहद विपरीत असर पड़ा है. लॉकडाउन के चलते प्रदेश में राजस्व 80 फीसदी तक घट (Revenue reduced) गया है. इसका असर विकास कार्यों पर देखने को मिल रहा है. बिगड़ती आर्थिक हालत के बीच प्रदेश की जरुरत वाले अहम कार्यों के लिये राज्य सरकार को अब कर्ज (Loan ) लेना पड़ सकता है.

कोरोना ने आम लोगों की सेहत के साथ ही प्रदेश की आर्थिक सेहत पर भी जबर्दस्त कहर ढाया है. कोरोना के चलते बार-बार लगाए जा रहे प्रतिबंधों और लॉकडाउन के कारण राज्य की इकोनॉमी पर जबर्दस्त विपरीत प्रभाव पड़ा है. अलग-अलग रूपों में लागू किए गए प्रतिबंधों के चलते राज्य सरकार का राजस्व 80 फीसदी घट गया है.

80 फीसदी तक घट गया है राजस्व

कोरोनो पर काबू पाने के लिये प्रदेश में कभी जन अनुशासन पखवाड़ा, कभी रेड अलर्ट जनअनुशासन पखवाड़ा तो कभी त्रिस्तरीय जन अनुशासन पखवाड़े के रूप में लॉकडाउन लागू करना पड़ा है. इसके कारण सरकारी आय का जरिया बंद हो गया. सरकार के पास पर्याप्त पूंजी नहीं होगी तो जाहिर तौर पर इससे विकास कार्य प्रभावित होंगे. हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि प्रदेश में विकास की गति को थमने नहीं दिया जाएगा. भले ही राजस्व 80 फीसदी तक घट गया हो लेकिन बेहतर आर्थिक प्रबंधन के जरिए स्थितियां संभाली जाएंगी.
मानसिक रूप से तैयार दिख रही है सरकार

राज्य सरकार ने कोरोना काल में प्रदेश की आर्थिक सेहत की बजाय लोगों की जान को ज्यादा तवज्जो देकर लोक कल्याणकारी सरकार होने का धर्म निभाया है. लेकिन राजस्व घटने से बड़ी परियोजनाओं और सरकारी योजनाओं पर संकट आना तय है. महत्वपूर्ण परियोजनाओं को जारी रखने के लिए सरकार को अब कर्ज लेना पड़ सकता है. हालात के मद्देनजर सरकार भी इसके लिये मानसिक रूप से तैयार दिख रही है.

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