Covid-19: राजस्थान में रोजाना 16250 लोगों की हो रही है जांच, कोरोना से जंग जीतने का ये है लक्ष्‍य

सोलन में डॉक्टर का हंगामा.
सोलन में डॉक्टर का हंगामा.

राजस्थान स्वास्थ्य मंत्री (Health Minister) ने कहा कि प्रदेश में कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए बाहर से आए करीब 7.25 लाख प्रवासी राजस्थानी और कामगारों को होम क्‍वारंटाइन में रखा जा रहा है.

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जयपुर. राजस्थान में जांच क्षमता बढ़कर 16 हजार 250 हो गई हैं. जबकि इस महीने के अंत तक राज्य 25 हजार जांचें प्रतिदिन करने की क्षमता विकसित कर लेगा. राज्य में अब तक 3.27 लाख से ज्यादा लोगों के सैंपल लेकर जांच की जा चुकी है. स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि प्रदेश में कोरोना मरीजों का रिकवरी रेशो अन्य राज्यों की तुलना में काफी बेहतर है. राज्य में रिकवरी रेशो लगभग 57 प्रतिशत है और यह 60 प्रतिशत तक रहा है. प्रदेश में 7173 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए, इनमें से 3860 लोग पॉजिटिव से निगेटिव हो चुके हैं और 3424 लोग तो अस्पतालों से डिस्चार्ज भी किए जा चुके हैं. वर्तमान में कोरोना के 3150 एक्टिव केस हैं.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा दिए गए स्लोगन 'राजस्थान सतर्क है' पर राज्य सरकार संवेदनशील तरीके से काम कर रही है. राज्य में हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं. प्रदेश सरकार द्वारा ज्यादा सैंपलिंग, क्‍वारंटाइन, आइसोलशन, तुरंत उपचार जैसी सुविधाओं के कारण ही संक्रमण पर काबू पाया जा रहा है.

बाहर से आने वाले व्यक्ति का पीसीआर टेस्ट जरूरी
डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि प्रदेश के बाहर से आने वाले हर व्यक्ति के लिए 14 दिनों के होम या इंस्टिट्यूशनल क्‍वारंटाइन अनिवार्य किया हुआ है, ताकि बाहरी से आने वाले व्यक्ति संक्रमण ना फैल सके. उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति बिजनेस के सिलसिले में या छोटे-मोटे काम के लिए राज्य में आ रहे हैं वे भी आरटी-पीसीआर टेस्ट कराकर आएं या फिर यहां टेस्ट के निगेटिव आने के बाद ही लोगों के बीच में जाएं.
35 हजार से ज्यादा लोग हैं संस्थागत क्वारेंटाइन में


स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए बाहर से आए करीब 7.25 लाख प्रवासी राजस्थानी और कामगारों को होम क्वारेंटाइन में रखा जा रहा है. ग्राम स्तर पर बनी कमेटियों के सदस्य उन पर निगरानी रखते हैं. यही नहीं 10 हजार से ज्यादा संस्थागत क्वारेंटाइन सेंटर्स में उन लोगों को रखा जा रहा है जिनके घरों में अलग रहने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है या फिर वे खांसी-जुकाम-बुखार से पीड़ित हैं. ऐसे करीब 35 हजार से ज्यादा लोग हैं. उनके बेहतर खान-पान व अन्य व्यवस्था सरकार अपने खर्चे पर कर रही है.

प्रदेश में कोरोना की मृत्युदर 2.36 फीसदी
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि जब प्रदेश में 2 मार्च को पहला पॉजिटिव केस आया था, तब हमें सैंपल जांचने के लिए पुणे लैब भेजना पड़ा था. वहीं आज प्रदेश भर में 16250 जांचें प्रतिदिन की जा रही हैं. उन्होंने कहा कि इस माह के अंत तक यह संख्या भी 25000 के पार पहुंच जाएगी. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि हर जिले में जांच की सुविधाएं विकसित की जाएं. विभाग द्वारा इस पर भी काम चल रहा है. प्रदेश में मृत्युदर भी राष्ट्रीय दर के मुकाबले काफी कम है. प्रदेश में महज 2.36 प्रतिशत मृत्युदर है.

सरकार ने किया हर पहलू पर काम
राजस्थान सरकार ने कोरोना की रोकथाम और बचाव के लिए हर पहलू पर बेहतरीन काम किया है. प्रदेश में जोधपुर व जयपुर में प्लाज्मा थैरेपी से गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा है. कोविड-19 के अलावा अन्य बीमारियों के लिए टेलीमेडिसन की सुविधाएं दी जा रही हैं. कर्फ्यूग्रस्त या लॉकडाउन प्रभावित क्षेत्रों में आम बीमारियों से लोगों को राहत देन के लिए 550 मेडिकल मोबाइन ओपीडी वैन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. प्रवासियों राजस्थानियों के सैंपल कलेक्शन में भी वैनों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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