COVID-19: राजस्‍थान में जानवरों के बाड़े में Quarantine हुए प्रवासी मजदूर, देखें Video
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COVID-19: राजस्‍थान में जानवरों के बाड़े में Quarantine हुए प्रवासी मजदूर, देखें Video
कोई पैदल तो कोई टैंकर में छिपकर अपने गांव आया है.

उदयपुर में COVID-19 के संक्रमण का खतरा देख दूसरे राज्यों से आए प्रवासी मजदूर घरों में जगह न मिलने पर खेतों या जानवरों के बाड़ों में हो रहे क्वारंटाइऩ.

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उदयपुर. राजस्थान में कोरोना (COVID-19) के हॉटस्पॉट बने उदयपुर जिले में दूसरे राज्यों से आने वाले यहां के प्रवासी लोग क्वारंटाइन (COVID-19) के समय को लेकर बेहद सतर्क हैं. यहां तक कि कई इलाकों में लोगों को अगर घरों में जगह नहीं मिल पा रही है तो वे खुद को खेतों और जानवरों के बाड़ों में क्वारंटाइन कर रहे हैं. ये लोग इन्हीं खेतों या बाड़ों में खाना बना रहे हैं और खा रहे हैं. उनका कहना है कि वे गांव लौट आए, यही बड़ी बात है. अब उनकी वजह से किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए और ना ही महामारी फैलनी चाहिए.

काफी लोग गुजरात और महाराष्ट्र में रहते हैं

दरअसल उदयपुर के काफी लोग गुजरात और महाराष्ट्र में रहते हैं. कुछ लोग वहां मजदूरी के लिए गए हुए हैं तो कुछ अपने व्यापार के सिलसिले में वहां रहते हैं. लेकिन लॉकडाउन के दौरान सभी प्रवासी अपने गांव लौटना चाहते हैं. यहां आने के बाद ये प्रवासी पूरी सजगता बरते रहे हैं और स्वंय को क्वॉरेंटाइन करने के लिए सभी नियमों का शिद्दत से पालन कर रहे हैं. उदयपुर के वल्लभनगर इलाके के कई ऐसे गांव ऐसे हैं जहां महाराष्ट्र और गुजरात से प्रवासी पहुंचे हैं. वे अब जगह के अभाव में परिवार और गांव वालों से दुरी बनाए रखने के लिये स्वयं को खेतों में क्वॉरेंटाइन कर रहे हैं.




खेत में गाड़ दिया तम्बू

हॉटस्पॉट वाले इलाकों से प्रवासियों के गांव में आने से ग्रामीणों में भी भय व्याप्त था. ग्रामीण भी ऐसे लोगों को पंचायत के मार्फत अपने घरों तक नहीं आने देना चाहते थे. मेनार गांव में 7 मई को 6 लोग मुंबई के कांदीवली से पहुंचे थे. गांव में जाकर ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने के बजाय इन लोगों ने गांव से दुर एक खेत में ही अपना डेरा बना लिया. इन लोगों ने खेत में टेंट लगा दिया. अब 14 दिनों के लिये यहीं इनका निवास रहेगा. इन्होंने अपने खाने के लिये भी खेत पर ही व्यवस्था कर ली हैं और ये सभी से दुरी बनाये रखते हुए अपने लिये भोजन की भी व्यवस्था खुद ही कर रहे हैं.

कोई पैदल तो कोई टैंकर में छिपकर अपने गांव आया है
ऐसे कई उदाहरण हैं जिसमें लोग मुंबई और गुजरात से अपने गांव आये हैं और स्वयं को पशुओं के बाड़े में क्वॉरेंटाइन कर रहे हैं. कोई खुद के कुएं पर रहकर क्वॉरेंटाइन पीरियड गुजार रहा है. कोई पैदल तो कोई टैंकर में छिपकर अपने गांव आया है लेकिन इन सब परेशानियों के बावजुद ये लोग अपने परिवार से तभी मिलता चाहते हैं जब इनसे कोरोना संक्रमण की सभी संभावनाएं खत्म हो जाये. बाहर से आने के बाद खुले आसमान के नीचे डेरा जमाये इन लोगों का मानना हैं कि इनकी वजह से दूसरे लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिये.

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