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राजस्थान रोडवेज में भ्रष्टाचार का बोलबाला, सिर्फ 1.33 प्रतिशत परिचालक ही ईमानदार!

सांकेतिक फोटो.
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राजस्थान रोडवेज में प्रतिदिन की आय का औसत करीब 5 करोड़ रुपए है. यह आय रोडवेज को बस में यात्रा करने वाले यात्रियों से होती है.

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जयपुर. राजस्थान रोडवेज (Rajasthan Roadways) में भ्रष्टाचार (Corruption) का कितना बोलबाला है, इसका सबूत राजस्थान रोडवेज ने खुद ही दे दिया है. गणतंत्र दिवस समारोह (Republic day Celebration) में रोडवेज प्रबंधन करीब 53 ऐसे परिचालकों को सम्मानित कर रहा है, जिन्होंने अपनी नियुक्ति से लेकर आज तक एक बार भी रोडवेज के राजस्व की चोरी नहीं की. इन पर किसी भी तरह की लापरवाही का कोई आरोप नहीं है, लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इस समय रोडवेज में करीब 4 हज़ार परिचालक ऐसे हैं, जो रूट पर चल रहे हैं. यानि शेष 98.67 प्रतिशत ने अपनी ड्यूटी ईमानदारी और निष्ठा से नहीं निभाई.



राजस्थान रोडवेज में प्रतिदिन की आय का औसत करीब 5 करोड़ रुपए है. यह आय रोडवेज को बस में यात्रा करने वाले यात्रियों से होती है. ऑनलाइन व काउंटर टिकट के हिस्से को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश आय का हिस्सा बस में परिचालक द्वारा काटी गई टिकटिंग के जरिए आता है. इससे आप समझ सकते है कि रोडवेज में कैश का फ्लो कितना अधिक है. यहीं से शुरू होता है रोडवेज में भ्रष्टाचार का सिलसिला, वहीं इसकी पहली कड़ी होती है परिचालक. परिचालक यात्रियों को उनकी यात्रा की राशि के बदले टिकट नहीं देता है तो यह सारा पैसा उसकी जेब में चला जाता है. इसे रोडवेज की भाषा में कहा जाता है रेवेन्यू लीकेज, लेकिन ऐसा नहीं है कि यह पूरा पैसा परिचालक अपने घर ले जाता है.



सबका हिस्सा होता है फिक्स
जानकारों का कहना है कि इस चोरी में सबका हिस्सा फिक्स होता है. रूट पर ड्यूटी लगाने वाले हैड टाइम कीपर, प्रबंधक यातायात, चीफ मैनेजर और आंशका तो यह भी है कि मुख्यालय में बैठे अधिकारियों तक भी हर माह बंधी पहुंचती है और शायद यहीं है रोडवेज के घाटे का सबसे बड़ा कारण. वर्तमान में रोडवेज में करीब 6 हज़ार है. इनकी संख्या करीब 1200 परिचालक रूट पर नहीं चल रहे. करीब 800 परिचालक अभी स्थायी नहीं हुए. शेष बचे 4 हज़ार परिचालकों में से केवल 53 परिचालक चयनित हुए है. यानि शेष परिचालकों ने या तो अपने काम में ईमानदारी नहीं बरती या फिर लापरवाही की है. रोडवेज सीएमडी राजेश्वर सिंह का कहना है कि उनकी कोशिश है कि ईमानदारी व निष्ठा से अपने फर्ज को अंजाम देने वाला कर्मचारी गौरवान्वित महसूस करें. वहीं अन्य कर्मचारी व अधिकारियों को भी इससे प्रेरणा मिले.
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