COVID-19: राजस्थान में कोरोना से अब तक 61 मौतें, डायबिटीज और हाइपरटेंशन है बड़ा कारण
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COVID-19: राजस्थान में कोरोना से अब तक 61 मौतें, डायबिटीज और हाइपरटेंशन है बड़ा कारण
इनमें 25 रोगी ऐसे थे जिन्हें डायबिटीज और हाइपरटेंशन दोनों साथ में थे.

राजस्थान में कोरोना (COVID-19) पीड़ितों का आंकड़ा 2642 तक जा पहुंचा है. कोरोना संक्रमण से अब तक 61 लोगों की मौत (Death) हो चुकी है. कोरोना से दम तोड़ने वाले मरीजों में से आधे से ज्यादा लोग 60 वर्ष से अधिक उम्र के थे.

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जयपुर. राजस्थान में कोरोना (COVID-19) पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा 2642 तक जा पहुंचा है. कोरोना संक्रमण से अब तक राज्य में 61 लोगों की मौत (Death) हो चुकी है. कोरोना से दम तोड़ने वाले मरीजों में से आधे से ज्यादा लोग 60 वर्ष से अधिक उम्र के थे. इनमें भी वो डाइबिटिज (Diabetes) और हार्ट की बीमारियों से ग्रसित रहे हैं. हाल ही में राज्य सरकार ने 'मिशन लाइफ सेविंग' शुरू किया है. इसके तहत प्रदेश में अब हाई रिस्क ग्रुप की अलग से पहचान की जा रही है. इस हाई रिस्क ग्रुप में 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति, डायबिटीज, हार्ट, टीबी, कैंसर, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी, अस्थमा, COPD के मरीज, गर्भवती महिलाएं और 10 वर्ष से कम आयु के बच्चे शामिल किए गए हैं.

मौत का शिकार हुए 38 लोग ऐसे हैं जिनकी उम्र 60 से ज्यादा थी
प्रदेश में कोरोना वायरस से हुई मौतों में से 38 लोग ऐसे हैं जिनकी उम्र 60 से ज्यादा थी. यानी कुल हुई मौतों में से करीब-करीब दो तिहाई मरीज उम्रदराज थे. इनमें से तीन लोग ऐसे हैं जिनकी उम्र 80 से 89 वर्ष के बीच थी. 10 लोगों की उम्र 70 से 79 वर्ष के बीच की थी. कोरोना ने 60 से 69 वर्ष की आयु के 25 लोगों की जिंदगी छीन ली. वहीं 50 से 59 वर्ष की आयु के आठ लोग कोरोना के चलते मौत के मुंह में चले गए. 40 से 49 वर्ष की आयु के चार लोगों की जिंदगी यह घातक वायरस छीन चुका है. 30 से 39 वर्ष की आयु के तीन लोग इस महामारी के कारण मौत के मुंह में समा गए. 20 से 29 वर्ष की आयु के छह लोग कोरोना काल के ग्रास बने हैं. वहीं 10 वर्ष से 19 वर्ष की आयु तक के दो लोगों को भी कोरोना ने नहीं छोड़ा. कोरोना के शिकार हुए लोगों में से 32 की मौत राजधानी जयपुर में हुई है.

हाइपर टेंशन, डायबिटीज और हार्ट डिजीज के थे अधिकांश मृतक
कोरोना के मृतकों में दो-तिहाई संख्या पुरुषों की है जबकि एक-तिहाई महिलाएं हैं. कोरोना से मरने वालों में 40 पुरुष और 21 महिलाएं हैं. यानी देखा जाए तो कोरोना ने महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों को अधिक शिकार बनाया है. कोरोना से मरने वालों में 28 लोग ऐसे हैं जिन्हें हाइपरटेंशन की शिकायत थी. 16 लोग डायबिटीज के गंभीर रोगी थे. 12 लोग ऐसे थे जिन्हें गंभीर हार्ट डिजीज थी. वहीं दो को कैंसर और शेष को लंग्स से सम्बंधित COPD और अस्थमा की शिकायत थी. इसमें 25 रोगी ऐसे थे जिन्हें डायबिटीज और हाइपरटेंशन दोनों बीमारियां साथ थीं. वहीं अन्य को भी क्रोनिक किडनी फेलियर, ब्रोन्कियल अस्थमा, न्यूमोनिया और अन्य रोग साथ में थे.



हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर है विभाग का विशेष फोकस
राजस्थान में कोरोना के लगातार फैलाव को देखते हुए सरकार तेजी से जांच की क्षमता में इजाफा कर रही है. वर्तमान में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने 8800 जांच प्रतिदिन करने की क्षमता विकसित कर ली है. प्रदेश में अभी तक एक लाख से ज्यादा सैंपल लेकर राजस्थान देश के सर्वाधिक सैंपल लेने वाले राज्यों में शुमार हो गया है. स्वास्थ्य विभाग ने जांच की क्षमता में इजाफा कर लिया है लेकिन आरएनए एक्सट्रेक्शन किट और पीसीआर किट बराबर संख्या में मिलती रही तो सैंपल्स की पेडेंसी नहीं रहेगी और इससे कोरोना संक्रमितों की वास्तविक संख्या का पता चल सकेगा. जितनी ज्यादा संख्या में जांच होंगी उतनी ही जल्दी इस महामारी पर काबू पाया जा सकेगा.

प्रदेश में 12 स्थानों पर हो रही है जांचें
राजस्थान में कोरोना की जांच वर्तमान में एक दर्जन स्थानों पर हो रही है. इनमें राजधानी जयपुर समेत सभी सातों संभाग मुख्यालयों पर स्थित मेडिकल कॉलेजों में इसकी जांच सुविधा उपलब्ध करा दी गई है. जयपुर में सवाई मानसिंह अस्पताल के अलावा आरयूएचएएस और महात्मा गांधी मेडिकल यूनिवर्सिटी और जोधपुर में एम्स, चूरू में मेडिकल कॉलेज और भीलवाड़ा में भी यह सुविधा उपलब्ध करा दी गई है. सरकार की मंशा है कि जहां-जहां मेडिकल कॉलेज हैं वहां-वहां इसकी सुविधा उपलब्ध कराई जाए. स्थानीय स्तर पर जांच सुविधा होने के कारण अब 12 से 15 घंटे में व्यक्ति की जांच रिपोर्ट मिल जाती है.

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