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Rajasthan: कोरोना बेकाबू हुआ तो बढ़ने लगी रार, नेता चुनावों को देने लगे दोष

खाचरियावास ने कहा ऐसे वक्त में इस तरह के मामले में खुलकर विचार होना चाहिए. कहीं कोई प्रेस्टीज इश्यु नहीं होना चाहिए.
खाचरियावास ने कहा ऐसे वक्त में इस तरह के मामले में खुलकर विचार होना चाहिए. कहीं कोई प्रेस्टीज इश्यु नहीं होना चाहिए.

राजस्थान में तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस (COVID-19) संक्रमण को लेकर सीएम अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) के बाद अब परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास (Pratap Singh Khachariwas) ने भी चुनावों को दोषी ठहराया है.

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जयपुर. प्रदेश में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण (COVID-19) पर रार बढ़ने लगी है. कोरोना संक्रमण के इस फैलाव के लिए पिछले दिनों हुए पंचायत और निकाय चुनाव (Panchayat and local body Election) को दोषी ठहराया जा रहा है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) के बाद अब उनकी सरकार के परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास (Pratap Singh Khachariwas) ने भी कहा है कि राजस्थान में चुनावों के कारण कोरोना संक्रमण ज्यादा फैला है. उन्होंने कहा कि हम कोराना संक्रमण को देखते हुए निकाय और पंचायत चुनाव टालना चाहते थे. लेकिन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से हमें राहत नहीं मिली.

बकौल खाचरियावास, सरकार जब चुनाव रुकवाने हाईकोर्ट गई तो हमारा मजाक उड़ाया गया. हम चुनाव करवाने से नहीं, कोरोना से डर रहे थे. इससे पहले सीएम अशोक गहलोत भी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि चुनावों में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो पाया, जिसके कारण संक्रमण ज्यादा फैला.

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कोराना के मामले में सबसे चूक हुई


खाचरियावास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट गुजरात सहित कई राज्यों को अब फटकार लगा रहा है. हम तो चुनाव रुकवाने सुप्रीम कोर्ट गए थे. हमारे प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट ने नहीं माना. हमें मजबूरी में राजस्थान में चुनाव करवाने पड़े. खाचरियावास ने कहा कि ऐसे वक्त में इस तरह के मामले में खुलकर विचार होना चाहिए. कहीं कोई प्रेस्टीज इश्यु नहीं होना चाहिए. कोर्ट में आप वीसी से सुनवाई कर रहे हैं. यह डबल पॉलिसी नहीं हो सकती. सरकार हो या न्यायपालिका कोरोना के मामले में सबसे चूक हुई है. चुनाव के कारण भीड़ हो रही है, जिससे संक्रमण बढ़ रहा है. कोरोना को रोकना बहुत जरूरी है. चुनाव के बाद कोरोना बढ़ा है. शादियों में हम भीड़ हम कंट्रोल कर सकते हैं. धारा 144 लगा सकते हैं, लेकिन चुनाव की भीड़ को कैसे नियंत्रित करें ?

पंचायती राज चुनावों में भी फिर वही कहानी
उल्लेखनीय है कि निकाय चुनाव टलवाने के लिए सरकार ने पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. लेकिन वहां से सरकार को राहत नहीं मिली थी. कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच निकाय चुनावों और पंचायतीराज चुनावों में न सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन किया गया और न हेल्थ प्रोटोकॉल का पालन हुआ. अब हो रहे पंचायती राज चुनावों में भी फिर वही कहानी दोहरायी जा रही है.
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