Alert: कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच पैरवी कर रहे जयपुर के 14,000 वकील, पढ़ें कितने भयावह हैं हालात
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Alert: कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच पैरवी कर रहे जयपुर के 14,000 वकील, पढ़ें कितने भयावह हैं हालात
भयावह तस्वीर- सेशन कोर्ट की लिफ्ट में लगी वकीलों की भीड़.

हाई कोर्ट को छोड़कर प्रदेश की अन्य अधीनस्थ अदालतों में सोशल डिस्टेंसिंग से लेकर साफ-सफाई, थर्मल स्केनिंग औऱ सेनेटाइजेशन की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. जयपुर के जिला एवं सत्र न्यायालय में करीब 14 हजार वकील संक्रमण के खतरे (Infection risk) के बीच पैरवी करने को मजबूर हैं.

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जयपुर. कोरोना काल (COVID-19) के बीच प्रदेश में 29 जून से सभी अदालतें नियमित रूप से खोल दी गई हैं. हाई कोर्ट से लेकर अधीनस्थ अदालतों (Subordinate courts) में नियमित सुनवाई हो रही है. लेकिन हाई कोर्ट को छोड़कर प्रदेश की अन्य अधीनस्थ अदालतों में सोशल डिस्टेंसिंग से लेकर साफ-सफाई, थर्मल स्केनिंग औऱ सेनेटाइजेशन की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. बात अगर जयपुर के जिला एवं सत्र न्यायालय की कि जाए तो यहां करीब 14 हजार वकील संक्रमण के खतरे (Infection risk) के बीच पैरवी करने को मजबूर हैं.

स्थिति आउट ऑफ कंट्रोल हो सकती है
राजधानी जयपुर के सेशन कोर्ट में एंट्री के चार मुख्य दरवाजे हैं. लॉकडाउन के समय केवल एक गेट ही खोलकर रखा गया था. लेकिन 29 जून से यहां दो गेट खोल दिए गए हैं. इसके बाद अगर आप कोर्ट्स रूम की तरफ बढ़ते हैं तो वहां जाने के लिए आपके पास आधा दर्जन से ज्यादा रास्ते हैं. लेकिन केवल गेट नम्बर-1 के पास वाले चैनल गेट पर ही थर्मल स्केनिंग और सेनेटाइजेशन की पूरी व्यवस्था है. शेष अन्य गेट्स पर कोई भी बेरोकटोक आ जा सकता है. कोर्ट रूम्स और वकीलों के चैम्बर की ओर जाने वाले रास्तों के गेट्स पर किसी भी तरह के सेनेटाइजेशन औऱ थर्मल स्केनिंग की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में अगर कोई कोरोना संक्रमित यहां आ जाए तो स्थिति आउट ऑफ कंट्रोल हो सकती है.

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उड़ रही सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां


दरअसल पिछले माह ही जयपुर शहर के जिला एवं सत्र न्यायालय को दो भागों में बांट गया है. ऐसे में अब जयपुर शहर में दो सेशन कोर्ट्स संचालित हैं. जयपुर मेट्रो-1 औऱ जयपुर मेट्रो-2. इस समय यहां शिफ्टिंग का काम चल रहा है. वहीं शिफ्टिंग के बीच ही रेगुलर कोर्ट्स खोल दिए गए. सेशन कोर्ट की नई बिल्डिंग की अधिकतर लिफ्ट्स खराब पड़ी है. ऐसे में इस आठ मंजिला इमारत में संचालित कोर्ट्स में जाने के लिए वकील जमकर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा रहे हैं. लिफ्ट में ठसाठस भरकर जाते हुए वकीलों को देखना इस समय सेशन कोर्ट में आम बात है. इसके अलावा कोर्ट रूम्स के बाहर बिखरे सामान के बीच से निकलने में भी सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान नहीं रखा जा रहा है. कोरोना काल में सेशन कोर्ट का यह नजारा किसी बड़े विस्फोट की ओर इशारा कर रहा है.

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कोरोना के चलते चौमू न्यायालय हुआ बंद
जयपुर जिला एवं सत्र न्यायालय के ही अधीन आने वाला चौमूं न्यायालय कोरोना के चलते शनिवार तक बंद किया जा चुका है. यहां काम करने वाले एक टाइपिस्ट की कोरोना के चलते बुधवार को मौत हो गई थी. उसके बाद पूरे न्यायालय परिसर को संक्रमण मुक्त करने के लिए शनिवार तक बंद कर दिया गया है. वहीं टाइपिस्ट के संपर्क में आने वाले लोगों की लिस्ट बनाकर उनकी कोरोना जांच की जा रही है ताकि संक्रमण ना फैले. चौमूं न्यायालय के कई वकील जयपुर सेशन कोर्ट में भी पैरवी करने आते हैं. लेकिन जयपुर सेशन कोर्ट में स्क्रीनिंग की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है.

बीसीआर चैयरमेन लिख चुके है लैटर
जयपुर सेशन कोर्ट के जैसे हालात ही प्रदेश की अन्य अधीनस्थ न्यायालयों में भी हैं. इसे लेकर अदालतें खुलने के साथ ही बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के चैयरमेन शाहिद हसन ने मुख्य न्यायाधीश को लैटर लिख दिया था. इसमें उन्होंने अधीनस्थ अदालतों में व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़ा किया था. लैटर में चैयरमेन ने कहा था कि एक तरफ हाई कोर्ट में जहां थर्मल स्केनिंग और सेनेटाइजेशन की प्रॉपर व्यवस्था है. उसी तरह की व्यवस्था प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों में भी होनी चाहिए. जयपुर सेशन कोर्ट में व्यवस्थाएं सुधारने के लिए दी बार एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष अनिल चौधरी ने भी बुधवार को सीजे से मुलाकात की थी.
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