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COVID-19: गहलोत सरकार का बड़ा फैसला, पैरोल पर रिहा किये जायेंगे कैदी, आज हो सकती है अहम बैठक

पुलिस कार जलाने पर 80 साल की जेल हो सकती है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोरोना वायरस (COVID-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पंजाब समेत अन्य राज्यों की तर्ज पर प्रदेश की अशाेक गहलोत सरकार (Ashek Gehlot Government) ने भी राज्य की जेलों में बंद सामान्य श्रेणी के अपराधी कैदियों को पैरोल पर छोड़ने का अहम निर्णय लिया है.

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जयपुर. कोरोना वायरस (COVID-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पंजाब समेत अन्य राज्यों की तर्ज पर प्रदेश की अशाेक गहलोत सरकार (Ashek Gehlot Government) ने भी राज्य की जेलों में बंद सामान्य श्रेणी के अपराधी कैदियों को पैरोल पर छोड़ने का अहम निर्णय लिया है. इसके लिए राज्य के गृह विभाग ने नियमों में बदलाव कर दिया है. गृह विभाग ने राजस्थान प्रिजनर्स रिलीव ऑन पैरोल (अमेंडमेंट) रूल्स में संशोधन किया है.

आज हो सकती है अहम बैठक
राज्य की जेलों में बंद बीमार और पैरोल योग्य बंदियों की स्क्रीनिंग के बाद सूची भी तैयार कर ली गई है. सूत्रों के अनुसार सोमवार को गृह विभाग और जेल अधिकारियों की अहम बैठक हो सकती है. बैठक में यह निर्णय लिया जाएगा कि प्रदेशभर की जेलों में से कितने कैदी रिहा किए जाएं. सभी जिलों के जेल अधिकारियों ने पैरोल योग्य रिहा करने वाले बंदियों की रिपोर्ट भी भेज दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे पैरोल पर छोड़ने के निर्देश
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस के तेजी से फैलते संक्रमण को देखते हुए गत 23 मार्च को राज्यों को कुछ कैदियों को पैरोल पर छोड़ने के लिए विचार करने को कहा था. एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा था कि इसके लिए कमेटी गठित करें. देश की शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि राज्य 7 वर्ष से कम सजा पाए कैदी और अंडर ट्रायल कैदियों को पैरोल पर रिहा कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना के तहत राज्य सरकार ने डीजी जेल एनआरके रेड्डी की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था. कमेटी ने अपना कार्य पूरा कर लिया है.

सरकार के निर्णय से जेलों में कम होगी भीड़भाड़
जेलों में कोरोना वायरस का संक्रमण न फैले इसके लिए कैदियों को रिहा किया जाएगा. इसमें वे कैदी भी शामिल हैं जो पहली बार जेल में आए हैं और उनका व्यवहार ठीक रहा है. गहलोत सरकार जेलों में भीड़भाड़ कम करने के मकसद से यह कदम उठा रही है ताकि जानलेवा कोरोना वायरस जेलों में न फैल सके.

हार्डकोर अपराधी नहीं छोड़े जाएंगे
गृह विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सामान्य श्रेणी के कैदी रिहा किये जायेंगे. पोक्सो एक्ट, मनी लॉन्ड्रिंग, आर्थिक अपराध, एसिड अटैक, दुष्कर्म, डकैती, हत्या, यौन अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, राष्ट्र विरोधी और अवांछित गतिविधियों में सजा काट रहे कैदियों को रिहा नहीं किया जाएगा.

हरियाणा और महाराष्ट्र सरकार ने भी रिहा किये हैं कैदी
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना के तहत उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र सरकार ने भी सामान्य श्रेणी के अपराध के कैदियों को पैरोल पर रिहा कर दिया है. उत्तर प्रदेश में 11,000 कैदी पैरोल पर रिहा किए गए हैं. जबकि पंजाब सरकार ने 5800 कैदी रिहा किए हैं. तिहाड़ जेल प्रशासन ने भी सामान्य श्रेणी के अपराधी कैदियों को रिहा कर दिया है.

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