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Rajasthan: कोरोना की स्वदेशी को-वैक्सीन का 500 वॉलिंटियर्स पर हुआ ट्रायल, खुद आगे आ रहे हैं लोग

चिकित्सकों को कहना है कि एक डोज लगाने के बाद भी कोरोना से बचाव करना आवश्यक है. वैक्सीन की डोज लगाने के करीब 30 दिन बाद शरीर में एंटीबॉडीज बनती है. (सांकेतिक तस्वीर)
चिकित्सकों को कहना है कि एक डोज लगाने के बाद भी कोरोना से बचाव करना आवश्यक है. वैक्सीन की डोज लगाने के करीब 30 दिन बाद शरीर में एंटीबॉडीज बनती है. (सांकेतिक तस्वीर)

Good News: राजस्थान में कोरोना की स्वदेशी को-वैक्सीन (Co-vaccine) का 500 वॉलिंटियर्स पर ट्रायल हो किया चुका है. प्रदेश में इसके कुल एक हजार वॉलिटियर्स (Volunteers) पर टेस्ट होने हैं.

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जयपुर. कोरोना संकट (Corona crisis) के मुश्किल भरे दिनों के बाद अब लगातार अच्छी खबरें आ रही हैं. राजस्थान में अब तक कोरोना की स्वदेशी को-वैक्सीन (Co-vaccine) का 500 वॉलिंटियर्स पर ट्रायल हो चुका है. खास बात यह है कि वॉलिंटियर्स (Volunteers) में युवाओं से लेकर बुजुर्ग भी शामिल हैं. इस बीच एक ओर अच्छी खबर यह भी है कि अब रूस की स्पुतनिक वैक्सीन का भी जल्द जयपुर में ट्रायल (Trial) शुरू होने जा रहा है.

मरुधरा में कोरोना का पहला मरीज 2 मार्च को मिला था. मुश्किलों के नौ महीने बीतने के बाद अब जाकर राहत की उम्मीदें नजर आने लगी हैं. एक ओर जहां प्रदेश में धीरे-धीरे कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में कमी आने लगी है वहीं अलग अलग वैक्सीन के आने की खबरों से कोरोना के खत्म होने की उम्मीदों को और बल मिला है. राजस्थान में स्वदेशी को-वैक्सीन का अब तक 500 वॉलिटिंयर्स पर ट्रायल किया जा चुका है.

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लोग आगे बढ़कर वॉलिंटियर्स बनने के लिए सहमति दे रहे हैं


भारत बायोटेक द्वारा आईसीएमआर और पुणे वायरोलॉजी लैब के साथ मिलकर तैयार की गई इस वैक्सीन के तीसरे फेज के ट्रायल के लिए युवाओं से लेकर बुजुर्ग भी आगे आ रहे हैं. हालांकि अभी भी कई लोगों में ट्रायल के लिए हिचक देखने को मिल रही है. लेकिन जो लोग ट्रायल में शामिल हुए हैं उनका कॉफीडेंस देखते ही बनता है. प्रदेश की राजधानी जयपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहे ट्रायल में कई लोग आगे बढ़कर वॉलिंटियर्स बनने के लिए सहमति दे रहे हैं.

दो डोज लगाना आवश्यक है
डॉ. मनीष जैन के अनुसार को- वैक्सीन के तीसरे फेज के लिए ट्रायल में हर वॉलिंटियर्स को दो डोज लगाना आवश्यक है. चिकित्सकों को कहना है कि एक डोज लगाने के बाद भी कोरोना से बचाव करना आवश्यक है. वैक्सीन की डोज लगाने के करीब 30 दिन बाद शरीर में एंटीबॉडीज बनती है. ऐसे में पहली डोज लगाने के बाद भी पूरा एहतियात बरतना आवश्यक है. अच्छी बात यह है कि 500 वॉलिटिंयर्स पर ट्रायल होने के बाद अभी तक किसी में भी साइड इफेक्ट नहीं दिखे हैं.

स्पुतनिक वैक्सीन के करीब 100 डोज जयपुर पहुंचे
को-वैक्सीन की ट्रायल के बीच एक और अच्छी खबर आई है. राजधानी में रूस की स्पुतनिक वैक्सीन के करीब 100 डोज जयपुर पहुंच गए हैं. बताया जा रहा है कि इस वैक्सीन के ट्रायल के लिए अनुमति मिलते ही स्पुतनिक की भी ट्रायल जयपुर में शुरू हो जाएगी. को-वैक्सीन के राजधानी में कुल एक हजार टेस्ट होने हैं. बताया जा रहा है कि देश के अलग अलग हिस्सों में ट्रायल का दौर जारी है. शुरुआती तौर पर इस वैक्सीन के अभी तक साइड इफेक्ट की शिकायत नहीं आई है. ऐसे में उम्मीद जगी है कि जल्द ही कोरोना की वैक्सीन आने के बाद ये लंबा और कठिन वक्त खत्म होगा.
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