Rajasthan: बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन से किसानों को फसली ऋण वितरण, विरोध के उठे स्वर

हिमाचल को केंद्र  से मिले 1899 करोड़ रुपये.
हिमाचल को केंद्र से मिले 1899 करोड़ रुपये.

प्रदेश में कोरोना (COVID-19) के संक्रमण को रोकने के लिए तमाम तरह के एहतियात बरते जा रहे हैं, लेकिन किसानों को फसली ऋण वितरण (Crop loan distribution ) में अपनाई जा रही व्यवस्था रोकथाम के इन उपायों पर भारी पड़ सकती है.

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जयपुर. प्रदेश में कोरोना (COVID-19) के संक्रमण को रोकने के लिए तमाम तरह के एहतियात बरते जा रहे हैं, लेकिन किसानों को फसली ऋण वितरण (Crop loan distribution ) में अपनाई जा रही व्यवस्था रोकथाम के इन उपायों पर भारी पड़ सकती है. किसानों को ऑनलाइन खरीफ फसली ऋण वितरण में बायोमीट्रिक अंगूठा सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जा रही है. बायोमेट्रिक मशीन (Biometric machine) पर हाथों के स्पर्श से संक्रमण फैलने का खतरा रहता है. यही वजह है कि सरकारी और प्राइवेट कार्यालयों में बायोमेट्रिक मशीन से उपस्थिति की व्यवस्था बंद की गई है.

एसोसिएशन ने सरकार को किया आगाह 
ऑल राजस्थान को-ऑपरेटिव बैंक एम्प्लाईज यूनियन व ऑफिसर्स एसोसिएशन ने इस खतरे को लेकर सरकार को आगाह किया है. यूनियन के प्रांतीय महासचिव सूरजभान सिंह आमेरा के मुताबिक ऑनलाइन बायोमेट्रिक अंगूठा सत्यापन प्रणाली से फसली ऋण वितरण व्यवस्था में एक व्यवहार को सम्पन्न करने के लिए पैक्स व्यवस्थापक को कम से कम 2 बार और किसान को 3 बार बायोमेट्रिक मशीन पर अपना अपना अगूंठा लगाना पड़ता है. इतना ही नहीं ज्यादातर मामलों में ऐसा होता है कि बायोमेट्रिक मशीन द्वारा अपेक्षित अटेम्प्ट में अंगूठा इम्प्रेशन नहीं लिया जाता और किसान को कई कई बार अंगूठा लगाना पड़ता है. इससे जाने अनजाने में किसान कई बार थूक भी लगा लेते हैं. किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस व्यवस्था का विरोध जताया है और ओटीपी के माध्यम से ऋण वितरण का सुझाव दिया है.

17-18 लाख किसानों को यह ऋण वितरित किया जाएगा
बायोमेट्रिक व्यवस्था के जरिए ऋण वितरण से खरीफ सीजन में ही 10 हजार करोड़ का ऋण वितरित किया जाना है. करीब 17-18 लाख किसानों को यह ऋण वितरित किया जाएगा. इस दौरान इन किसानों और पैक्स कर्मियों के बार-बार मशीन पर अंगूठे लगेंगे. अगर इससे कहीं संकमण फैलता है तो यह पता लगा पाना भी मुश्किल होगा कि आखिर संक्रमण कहां से आया. सूरजभान सिंह आमेरा के मुताबिक सीसीबी की शाखाओं और पैक्स स्तर पर वर्तमान में सेनेटाइजर, मास्क, गार्ड और साफ-सफाई के भी समुचित इंतज़ाम नहीं हैं.



यूनियन की ओर से राज्य सरकार को ये दिए गए हैं सुझाव
- मोबाइल पर OTP के माध्यम से ऋण वितरण सुरक्षित और बेहतर व्यवहारिक विकल्प हो सकता है.
- बैंक स्तर से बल्क पोस्टिंग के द्वारा सभी किसानों के खाते में ऋण क्रेडिट कर दिया जाए.
- कमर्शियल और ग्रामीण बैंकों की तरह BC के पासवर्ड से लेनदेन व्यवहार किया जा सकता है.
- 2019 में बायोमेट्रिक अंगूठा सत्यापन से जिन किसानों को ऋण वितरण हो चुका है लिहाजा उन्हीं किसानों के बार-बार सत्यापन की जरूरत नहीं है.
- पिछले 2 वर्षों की तरह जून- जुलाई से ही वितरण किया जाए तक तक कोरोना संक्रमण भी कम हो चुका होगा.
- सहकारी बैंक व पैक्स कार्मिकों को 50 लाख का बीमा कवर दिया जाए.
- कार्मिकों के लिए पीपीई किट, N 95 मास्क, सेनेटाइजर और थर्मामीटर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.

सरकार के स्तर पर यदि कोई निर्णय होता है तो व्यवस्था में बदलाव पर विचार किया जाएगा
इस मसले पर राजस्थान राज्य सहकारी बैंक के एमडी इंद्र सिंह का कहना है कि ओटीपी से ऋण वितरण की प्रक्रिया ज्यादा सफल नहीं हो सकती है. ऋण वितरण में पुरानी व्यवस्था की तरह धांधलियां हो सकती है. लिहाजा अभी बायोमेट्रिक व्यवस्था ही जारी रखने का निर्णय लिया गया है. अभी ऋण वितरण ज्यादा बड़े पैमाने पर नहीं है. सोशल डिस्टेंसिंग और सेनिटाइजर आदि का इंतजाम भी किया गया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के स्तर पर यदि कोई निर्णय लिया जाता है तो व्यवस्था में बदलाव पर विचार किया जाएगा.

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