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COVID-19: महिला स्वयं सहायता समूहों ने दिखायी सामूहिक शक्ति, 1 करोड़ 90 लाख मास्क बना डाले

COVID-19: महिला स्वयं सहायता समूहों ने दिखायी सामूहिक शक्ति, 1 करोड़ 90 लाख मास्क बना डाले

क़रीब 15 वर्ष पहले शुरू हुआ महिला सशक्तिकरण का यह अभियान इस कठिन दौर में देश के लिए अमूल्य संसाधन साबित हुआ है.

क़रीब 15 वर्ष पहले शुरू हुआ महिला सशक्तिकरण का यह अभियान इस कठिन दौर में देश के लिए अमूल्य संसाधन साबित हुआ है.

वैश्विक महामारी कोरोना (COVID-19) वायरस को मात देने के लिए जहां 130 करोड़ भारतवासी 40 दिन से लॉकडाउन (Lockdown) का पालन कर रहे हैं, वहीं इस दौरान महिला स्वयं सहायता समूहों की सामूहिक शक्ति भी उजागर हुई है.

जयपुर. वैश्विक महामारी कोरोना (COVID-19) वायरस को मात देने के लिए जहां 130 करोड़ भारतवासी 40 दिन से लॉकडाउन (Lockdown) का पालन कर रहे हैं, वहीं इस दौरान महिला स्वयं सहायता समूहों की सामूहिक शक्ति भी उजागर हुई है. देश के क़रीब 90 प्रतिशत ज़िलों में कार्यरत महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं फ़ेस मास्क बनाने, सामुदायिक रसोई संचालित करने, आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई और लोगों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने में जुटी हुई हैं. समूहों से जुड़ी महिलाएं पिछले कुछ सप्ताह में एक करोड़ 90 लाख मास्क बना चुकी हैं.

समूहों ने सरकार को किया पूरा सहयोग
इन समूहों ने कोरोना वायरस जैसी महामारी से निपटने में सरकार का पूरा सहयोग किया है. देशभर में फैले स्वयं सहायता समूह न सिर्फ फ़ेस मास्क की कमी को पूरा करने में सहायक सिद्ध हुए हैं, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पीपीई किट बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है. जो महिलाएं स्कूल की यूनिफॉर्म तैयार करती थी अब उन्होंने फ़ेस मास्क बनाना शुरू किया है.

एक लाख लीटर सेनेटाइजर और 50 हज़ार लीटर हैंडवॉश तैयार किया
27 राज्यों में फैले स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी इन महिलाओं ने पिछले कुछ सप्ताह में एक करोड़ 90 लाख मास्क बनाए हैं. इसके अलावा एक लाख लीटर सेनेटाइजर और 50 हज़ार लीटर हैंडवॉश का निर्माण किया है. इन तीनों चीजों का उत्पादन विकेंद्रीकृत तरीक़े से हुआ है. इसलिए इन्हें देशभर में पहुंचाने के लिए परिवहन के साधनों और अन्य सुविधाओं की आवश्यकता भी कम से कम रही.

सामुदायिक रसोई का संचालन कर भूखे नहीं सोने दिया
स्वयं सहायता समूहों ने लॉकडाउन के कारण अपना काम गंवा चुके श्रमिकों और देश के अलग-अलग स्थानों पर फंसे मजदूरों के लिए सामुदायिक रसोई का संचालन भी किया .देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे मज़दूरों के लिए इन समूहों ने क़रीब 10 हज़ार सामुदायिक किचन की शुरुआत की.

कम समय में दिए सार्थक परिणाम
क़रीब 15 वर्ष पहले शुरू हुआ महिला सशक्तिकरण का यह अभियान इस कठिन दौर में देश के लिए अमूल्य संसाधन साबित हुआ है. भारत में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में विश्व बैंक की सहायता का नेतृत्व करने वाली गायत्री आचार्य का कहना है कि भारत सरकार द्वारा गांव की महिलाओं को सामाजिक-आर्थिक रूप से मज़बूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई इस मुहिम के बहुत अच्छे परिणाम इस कठिन दौर में देखने को मिले हैं. देश में इस समय क़रीब सात लाख स्वयं सहायता समूह हैं. इसमें छह करोड़ 70 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं. इन समूहों से जुड़ने से पहले ज़्यादातर महिलाएं बेसहारा और गरीब थी. स्वयं सहायता समूह की सफलता ने उन्हें न सिर्फ़ आर्थिक रूप से सक्षम बनाया है बल्कि उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ी है.

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Tags: Corona epidemic, Jaipur news, Rajasthan news

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