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Rajasthan: स्पीकर जोशी-धारीवाल के बीच फिर तकरार, मंत्री बोले- 'आपका क्या आदेश है, बता दीजिए'

राजस्थान विधानसभा में स्पीकर सीपी जोशी और मंत्री शांति धारीवाल के बीच फिर से तकरार हुई.

राजस्थान विधानसभा में स्पीकर सीपी जोशी और मंत्री शांति धारीवाल के बीच फिर से तकरार हुई.

CP Joshi Vs Shanti Dhariwal: सदन में किसान की परिभाषा को स्पीकर सीपी जोशी (CP Joshi) और मंत्री शांति धारीवाल (Shanti Dhariwal) के बीच काफी देर तक तर्क-वितर्क और तकरार हुई. बार-बार स्पीकर के टोकने पर धारीवाल ने कहा, तो क्या मैं बैठ जाऊं? इस पर स्पीकर ने भी नाराज होते हुए कहा कि आप बैठना चाहो तो बैठ जाओ. मैं आपको बैठने से थोड़े ही रोक सकता हूं.

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जयपुर. किसान की परिभाषा को लेकर शनिवार को सदन में खूब तकरार देखने को मिली. स्पीकर डॉ. सीपी जोशी और मंत्री शांति धारीवाल के बीच सदन में शब्दों की तकरार हुई. विधायक बलवान पूनिया ने ध्यान आकर्षण प्रस्ताव के जरिये कृषि विभाग द्वारा 2 सितम्बर 2021 को जारी की गई अधिसूचना पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था. इस अधिसूचना के जरिए कृषि विभाग ने कई श्रेणियों के पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधियों को कृषक परिवार में सम्मिलित नहीं माना है. मंत्री धारीवाल ने अपने जवाब में कहा किराजस्थान एग्रो प्रोसेसिंग, एग्रो बिजनेस एंड एग्रो एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी में किसान की परिभाषा दी गई है. इसमें जिसकी आजीविका किसानी के कार्य से ही संबंधित हो, उसे किसान माना गया है. अब भारत सरकार की किसान सम्मान निधि के आधार पर नया प्रावधान जोड़ा गया है जिसमें वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों के साथ ही विभिन्न श्रेणियों के लोगों को किसान नहीं माना गया है. इसी वजह से इन श्रेणियों के लोगों को 50 प्रतिशत की जगह 25 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान राजस्थान में किया गया है.

सरकार हमें किसान क्यों नहीं मान रही: बलवान पूनिया

विधायक बलवान पूनिया ने इसे हवाई आदेश बताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि को किसान होने के हक से वंचित नहीं किया जाना चाहिए. सरकार हमें किसान क्यों नहीं मान रही है जबकि विधायक खेतों में टिड्डियां उड़ा रहे हैं. भारत सरकार ने हमें किसान नहीं माना तो क्या राज्य सरकार भी मना कर देगी. आसन से स्पीकर ने डॉ. सीपी जोशी ने भी कहा कि भारत सरकार की कृषक सम्मान योजना सब्सिडी की योजना है जबकि राजस्थान की योजना निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए है. ऐसे में दोनों के बीच कोई सम्बन्ध नहीं है और इसके आधार पर किसानों से भेदभाव नहीं होना चाहिए. सरकार इस पर गंभीरता से विचार करे और सभी लोगों को 50 प्रतिशत सब्सिडी मिले ऐसा मेरा सुझाव है. धारीवाल ने कहा कि भारत सरकार की गाइडलाइन के आधार पर यह किया गया. इस पर जोशी ने कहा कि भारत सरकार ने परिभाषा केवल कृषक सम्मान योजना के लिए दी है ना कि सभी कृषकों को इसमें परिभाषित किया गया है.

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नोंक-झोंक के बाद स्पीकर ने दिए निर्देश

इसे लेकर जोशी और धारीवाल के बीच काफी देर तक तर्क-वितर्क और तकरार हुई. बार-बार स्पीकर के टोकने पर धारीवाल ने कहा, तो क्या मैं बैठ जाऊं? इस पर स्पीकर ने भी नाराज होते हुए कहा कि आप बैठना चाहो तो बैठ जाओ. मैं आपको बैठने से थोड़े ही रोक सकता हूं. धारीवाल ने एक ओर पासा फेंकते हुए विपक्ष की ओर इशारा कर कहा कि ये सब कह दें कि भारत सरकार की बात मत मानो. इस पर उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने विपक्ष की ओर से सहमति जताई कि इस मामले में भारत सरकार की गाइडलाइन फॉलो नहीं की जानी चाहिए. इस पर धारीवाल ने कहा कि यदि सदन चाहता है तो इस पर पुनर्विचार कर लेंगे.

स्पीकर द्वारा फिर टोके जाने पर धारीवाल ने झल्लाते हुए कहा कि आपका क्या आदेश है, आप तो यह बता दो. आखिरकार स्पीकर ने कहा कि अध्यक्ष की हैसियत से उनकी जिम्मेदारी विधायकों को प्रोटेक्ट करना और सरकार को डायरेक्शन देना है. उन्होंने सरकार को आदेश दिए कि वह भारत सरकार की कृषक सम्मान योजना वाली परिभाषा को डिलीट करे और सभी किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी देने की व्यवस्था करे. धारीवाल ने फिर कहा कि आपने आदेशित किया है तो आदेश मान लेंगे. इस पर स्पीकर ने कहा कि मैं सीनियरिटी का सम्मान कर रहा था नहीं तो मैं पहले ही आदेश दे सकता था.

शुरुआत भी हुई तकरार से

ध्यानाकर्षण प्रस्ताव की चर्चा ही स्पीकर और धारीवाल के बीच तकरार से शुरु हुई. दरअसल प्रस्ताव पर विधायक बलवान पूनिया ने कृषि मंत्री का ध्यानाकर्षण किया था और उन्हें जवाब देना था. लेकिन मंत्री शांति धारीवाल ने जब जवाब देना शुरु किया तो स्पीकर ने ऐतराज जताया और कहा कि मेरे यहां पर कटारिया का नाम लिखा हुआ है. इस पर धारीवाल ने कहा कि आप कहें तो मैं बोलूं. स्पीकर ने कहा कि इसके लिए आपको मुझसे अनुमति तो लेनी पड़ेगी. आखिर स्पीकर की इजाजत लेकर धारीवाल ने मामले पर जवाब दिया.

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