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बेटियों ने तोड़ा मिथक: NWR में 39 लड़कियां बनीं असिस्टेंट लोको पायलट, सरपट दौड़ा रही है ट्रेनें

जयपुर की ममता मीणा ने बतौर प्रोफेशन लोको पायलट को चुना है. वह चाहती है कि दूसरी लड़कियां भी इस प्रोफेशन में आएं

जयपुर की ममता मीणा ने बतौर प्रोफेशन लोको पायलट को चुना है. वह चाहती है कि दूसरी लड़कियां भी इस प्रोफेशन में आएं

Daughters Commanded Trains: भारत की बेटियां अब रेलवे (Railway) में भी अपना दबदबा बढ़ाने में जुटी हैं. कभी केवल पुरुषों ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

रेलवे की पॉलिसी के मुताबिक सीधे लोको पायलट के पद पर भर्ती नहीं हो सकती है
बतौर अस्टिटेंट अनुभव लेने के बाद फिर उसे लोको पायलट के पद पर पदोन्नति दी जाती है

जयपुर. भारतीय रेलवे (Indian Railways) अपने 177 साल पूरे कर चुका है. इन 177 बरसों में ट्रेन की कमान पुरुषों के हाथों में ही रही है. ट्रेन के लोको पायलट में शुरू से पुरुषों का दबदबा रहा है. लेकिन अब ये मिथक टूटने लगा है. लड़कियों ने अब ट्रेन का स्टेयरिंग को अपने हाथों में ले लिया है. केवल उत्तर पश्चिम रेलवे में ही 39 लड़कियां असिस्टेंट लोको पायलट बन (Girls become assistant loco pilots) गई हैं और हजोरों लोगों को ट्रेन के जरिये उनकी मंजिल तक पहुंचा रही हैं. वे आत्मविश्वास के साथ ट्रेनों को पूरी रफ्तार दौड़ा रही है और पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ते हुए नए आयाम गढ़ रही हैं.

आमतौर पर लड़कियां अपने लिए डॉक्टर, इंजीनियर या फिर टीचर और प्रोफेसर जैसा जॉब चुनती है. लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है जब भारत की बेटियां रेलवे में लोको पायलट के तौर पर भी नजर आने लगी हैं. रेलवे की पॉलिसी के मुताबिक सीधे लोको पायलट के पद पर भर्ती नहीं हो सकती है. इसके लिए कर्मचारी को बतौर असिस्टेंट लोको पायलट कुछ समय तक काम करना पड़ता है. अनुभव लेने के बाद फिर उसे लोको पायलट के पद पर पदोन्नति दी जाती है.

रेलवे चाहता है कि इस फील्ड में ज्यादा से ज्यादा लड़कियां आएं
उत्तर पश्चिम रेलवे के सीपीआरओ कैप्टन शशि किरण के अनुसार एनडब्ल्यूआर के चारों मंडल में से जयपुर मंडल में तीन असिस्टेंट लोको पायलट बन चुकी हैं. वे अलग अलग रूट्स पर ट्रेनों को लेकर चल रही हैं. भारत में अब शायद ही ऐसा कोई फील्ड बचा हो जहां महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज ना करवाई हो. इस प्रक्रिया से उत्तर पश्चिम रेलवे (जयपुर, जोधपुर, अजमेर और बीकानेर मंडल) में ही 39 लड़कियां अब तक असिस्टेंट लोको पायलट बन चुकी हैं. रेलवे इस बात से बेहद खुश है. रेलवे चाहता है कि इस फील्ड में ज्यादा से ज्यादा लड़कियां आएं.

ममता बखूबी चला रही है घर और ट्रेन
जयपुर की ममता मीणा ने बतौर प्रोफेशन लोको पायलट को चुना है. वह चाहती है कि दूसरी लड़कियां भी इस प्रोफेशन में आएं और तमाम मिथकों को तोड़ दें. ममता शादीशुदा हैं. वो अपना घर भी बखूबी संभाल रही है और ट्रेन को भी. लड़कियों के सामने इस प्रोफेशन में कई तरह की चुनौतियां है लेकिन वे उन सभी का डटकर मुकाबला कर रही हैं. ममता का कहना है ठान लो तो कुछ भी असंभव नहीं है.

Tags: Indian Railway news, Jaipur news, Rajasthan news, Womens Success Story

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