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Sambhar Lake: 14 दिन से सिर्फ शव हटा रहे हैं, न मर्ज का पता न इलाज?

News18 Rajasthan
Updated: November 21, 2019, 2:03 PM IST
Sambhar Lake: 14 दिन से सिर्फ शव हटा रहे हैं, न मर्ज का पता न इलाज?
झील सांभर (Sambhar Lake) में पक्षियों की मौत का आंकड़ा 20 हजार से पार पहुंच चुका है.

करीब 5700 वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैली यह खारे पानी की झील सांभर (Sambhar Lake) में पक्षियों की मौत का आंकड़ा 20 हजार से पार पहुंच चुका है. यहां हालात यह हैं कि कई टीम मिलकर के पिछले 14 दिन से काम कर रहीं हैं, जो सिर्फ शव हटा रहे हैं. असल में उन्हें नहीं पता कि मर्ज (Cause Not Ascertained) क्या हैं और इसका इलाज क्या है?

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जयपुर. सांभर झील (Sambhar Lake) पर पक्षियों की मौत का मामला अब एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है. सांभर झील एक रामसर साइट (वन्य जीवों के लिए आरक्षित किए गए आर्द्र भूमि क्षेत्र यानी रामसर जोन Ramsar Site) है. करीब 5700 वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैली यह खारे पानी की झील, हिंदुस्तान के एक बड़े हिस्से को नमक मुहैया कराती हैं. लेकिन आजकल इस झील के किनारों पर चारों तरफ सिर्फ परिंदों के पंख ही पंख बिखरे पड़े हैं. हर तरफ मौत का सन्नाटा है, जहां कभी कलरव गुंजा करता था, वो किनारे खामोश से नजर आ रहे हैं. सांभर झील पर प्रवास पर आने वाले पक्षियों (Migratory Birds) की तादाद पिछले कुछ सालों के मुकाबले इस बार दोगुनी होने की उम्मीद थी. क्योंकि बारिश अच्छी हुई थी अभी भी झील में करीब 2 लाख पक्षी ज़िंदा मौजूद हैं, जिन्हें इस गुमनाम बीमारी से बचाना जरूरी है. हालात यह हैं कई विभागों की कई टीम मिलकर के पिछले 14 दिन से काम कर रहीं हैं, वे सिर्फ शव हटा रहे हैं. असल में उन्हें नहीं पता कि मर्ज (Cause Not Ascertained) क्या हैं और इसका इलाज क्या है?

दरअसल, देश की 8 सबसे बड़े वन्यजीव, पक्षी और वायरस खोज से जुड़े संस्थान कुछ नहीं बता सके, आज तक नतीजा शून्य है. सांभर झील में मारे गए पक्षियों की तादाद आधिकारिक तौर पर 20 हजार को पार कर चुकी है, जब 10 नवंबर को इस खबर की पड़ताल की तो करीब 10000 पक्षियों की मौत का अंदाजा लगाया था. 27 अलग अलग तरह की प्रजातियों की गिनती की. ये भी बताया कि किनारे पर रहने वाली प्रजातियों पर ज़्यादा असर है. उस वक्त तमाम विभागों के जिम्मेदार आला अधिकारी एकदम से खिल्ली सी उड़ाने लगे थे और कहने लगे कि सौ ज्यादा परिंदे नहीं मरे.

किसी भी मामले को लेकर के 2 तरह की सोच होती है. एक तो उसमें सुधार किया जाए या फिर उसे नकार कर दबा दिया जाए. यही गलती सरकारी लोगों से भी हुई. उन्होंने इसे नकार करके दबाने की कोशिश की. और ये इतनी खतरनाक साबित हुई कि आज मारे गए परिंदों की तादाद 20 हज़ार को पार कर चुकी है. और यह सिलसिला अब तक जारी है.

मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के प्रसंज्ञान लेने के बाद में, कार्रवाई में तेजी आई. उसी के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी लगातार बैठक की. तीन बैठक सिर्फ सांभर झील के मामले को लेकर ली हैं. अधिकारी रिपोर्ट पेश कर चुके हैं, ग्राउंड जीरो के हालात बता चुके हैं,

तमाम जिम्मेदार विभागों को और संस्थानों को मिला जुला कर के मौके पर काम करने के लिए आगे भेजा जा रहा है.

वनमंत्री बुधवार शाम फिर CM को इस बारे में ब्रीफ कर चुके हैं. अभी जो स्थिति है उसके मुताबिक तमाम टीमों ने मिलकर फैसला लिया है कि जितने भी शव सांभर झील में आसपास मिल रहे हैं उन्हें तुरंत दफनाया जाए ताकि बैक्टीरिया वायरस और भी जो कोई कारण है इस बीमारी का, उसे खत्म किया जा सके.


दूसरी तरफ, वन विभाग की लापरवाही भी सामने आई. बुधवार को ऐसे पक्षियों जो इलाज के बाद कुछ सेहतमंद नजर आने लगे थे, उन्हें खुले आसमान में छोड़ दिया गया. अभी तक पक्षियों की मौत का कारण सामने नहीं आया है, हो सकता है कोई वायरस हो, या हो सकता है यह कोई बैक्टीरिया हो. ऐसी स्थिति में पक्षियों को बिना जांच किए खुले आसमान में छोड़ना मतलब ऐसा लगता है कर्मचारी बस काम से अपना पीछा छुड़ाना चाह रहे हैं. कोई उन पक्षियों की निगरानी नहीं करना चाहता. काम करते हुए बिज़ी सब दिखना चाहते हैं पर नतीजा किसी के हाथ मे नही है. इस तरह संक्रमित पक्षी आज़ाद छोड़ने से. संक्रमण का खतरा बढ़ गया है.
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हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त न्याय मित्र नितिन जैन जब बुधवार को मौके पर पहुंचे तो उन्होंने दूर-दूर तक झील में दूरबीन से शव देख कर विभाग को बताया. दूरबीन में पक्षियों के कई शव नजर आए, न्याय मित्र ने अधिकारियों के रवैए और उनकी खानापूर्ति करने की कोशिशों पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा कि यह संतोषजनक स्थिति नहीं है. मामले में खानापूर्ति नहीं काम किया जाना चाहिए. अगर आपको देश की टॉप मोस्ट एजेंसी सही नतीजे 14 दिन बीत जाने के बावजूद नहीं दे रही हैं तो अब विदेशों की लैब की तरफ रुख करना चाहिए ताकि कुछ नतीजा हाथ में हो और सही दिशा में सुधार का काम किया जा सके, इलाज किया जा सके.


मामले को लेकर के शाम को मुख्यमंत्री गहलोत ने एक बार फिर रिव्यू मीटिंग की, वन मंत्री ने भी अपनी रिपोर्ट पेश की. आज अरण्य भवन में वाइल्डलाइफ विंग की रिव्यु मीटिंग में भी यही मुद्दा उठाया जा रहा है. फिलहाल, सांभर झील का यह मामला वक्त से साथ साथ पेचीदा होता जा रहा है. क्योंकि सांभर झील एक रामसर साइट है. पूरी दुनिया के प्रवासी पक्षी यहां पर काफी तादाद में आते हैं, यहां से दूसरे देश जाते हैं. उन पक्षियों की मौत के बाद दुनिया भर में सवाल उठ रहे हैं. और राजस्थान के लिए भी कई सवाल हैं. क्योंकि राजस्थान में सांभर झील के लिए अलग से कोई एजेंसी नहीं है. कोई विभाग सीधे इसकी जिम्मेदारी नहीं लेता है. तमाम विभाग अपनी जिम्मेदारियां एक दूसरे पर डालते हैं. ऐसे में जरूरी है कि इस घटना से सबक लेने के बाद में राजस्थान की अपनी अलग से एक अथॉरिटी बनाई जाए, जो प्रदेश भर के तमाम झीलों का संरक्षण करें.

पक्षियों की मौत के सही कारण को पता करने के बाद में वन विभाग की 10 सुरक्षा चौकी सांभर झील क्षेत्र में बनाई जाएं. समस्या को गंभीरता खत्म करने के लिए काम किया जाए. उम्मीद है सांभर के किनारों पर कलरव जल्दी लौटेगा. वहां छाये मातम के बादल साफ होंगे और सांभर झील फिर से मुस्कुराएगी.

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First published: November 21, 2019, 2:03 PM IST
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