घटता पानी, बढ़ती प्यास- प्रदेश के अधिकतर बांध सूखे, कुछ में ही बचा है सीमित पानी

भीषण गर्मी में भंयकर पेयजल सकंट से जूझ रहे राजस्थान के बांध सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं. जिनमें थोड़ा बहुत पानी है उनका जल स्तर भी तेजी से गिर रहा है. बांधों में बमुश्किल जून के अंत तक का कामचलाऊ पानी बचा है.

News18 Rajasthan
Updated: June 8, 2019, 4:04 PM IST
घटता पानी, बढ़ती प्यास- प्रदेश के अधिकतर बांध सूखे, कुछ में ही बचा है सीमित पानी
बीसलपुर बांध। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।
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Updated: June 8, 2019, 4:04 PM IST
भीषण गर्मी में भंयकर पेयजल सकंट से जूझ रहे राजस्थान के अधिकतर बांध सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं. जिनमें थोड़ा बहुत पानी है उनका जल स्तर भी तेजी से गिर रहा है. बांधों में बमुश्किल जून के अंत तक का कामचलाऊ पानी बचा है. प्रदेश के एक चौथाई जिलों में जलसंकट की स्थिति भयावह है. यहां तक की झीलों के लिए देश और दुनियाभर में मशहूर उदयपुर जिले में भी उदयपुर शहर के साथ साथ भीण्डर, कानौद, खेरवाड़ा और ऋषभदेव इलाकों में पानी का संकट मंडरा रहा है. हालात यह हैं कि प्रदेश के कई कस्बों में तीन से पांच दिन में एक बार पेयजल की आपूर्ति की जा रही है.

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इन नौ जिले में हालात बेहद खराब
राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर समेत बीकानेर, हनुमानगढ, नागौर, चूरू, पाली व जालोर जिलों में पानी की भयंकर किल्लत बनी हुई है. ये वो जिले हैं जिनको भूजल स्तर के हिसाब से डार्क जोन घोषित कर दिया गया है. इन सभी नौ जिलों के शहरी और ग्रामीण इलाकों में न तो जमीन के अंदर पानी है और ना ही सरकारी स्तर पर पानी सप्लाई की यहां समुचित व्यवस्था है.

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284 बांधों में से 215 बांध लगभग सूखे
बांधों की अगर बात करें प्रदेश के छोटे-बड़े 284 बांधों में से 215 बांध लगभग सूख चुके हैं. कुल बांधों में 22 बड़े और 262 बांध हैं. बड़े बांधों में से नौ सूख चुके हैं .शेष बांधों में भी सीमित मात्रा में पानी बचा है. गत वर्ष हुई सामान्य बारिश के कारण बांधों में कुल भराव क्षमता के मुकाबले केवल 60 फीसदी पानी ही आया था.
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बीसलपुर बांध की भी उखड़ने लगी है सांसें
इनमें जयपुर, अजमेर और टोंक की लाइफ लाइन कहे जाने वाले बीसलपुर बांध में महज 11 फीसदी पानी बचा है. इस बांध की सांसें मार्च माह में ही उखड़ने लग गई थी. 315.50 आर.एल भराव क्षमता वाले इस बांध में 15 मार्च के आसपास ही महज 17 फीसदी पानी बचा था. हालांकि राजधानी जयपुर में पानी सप्लाई के मांग को देखते हुए उसी समय इससे कृषि के लिए पानी की सप्लाई बंद कर दी गई थी. इसके साथ ही जयपुर व अजमेर जिले को छोड़कर अन्य जिलों में पेयजल सप्लाई भी लगभग बंद कर दी गई थी. लेकिन अब हालात जयपुर में भी गंभीर होने लग गए हैं.

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इन बांधों में बचा है इतना ही पानी
अन्य बड़े बांधों की बात करें तो केवल चंबल नदी पर बने कोटा बैराज और जवाहर सागर बांध अच्छी स्थिति में हैं. इनके अलावा राजसमंद बांध में 18 फीसदी, धौलपुर के पार्वती बांध में 16, पाली के जवाई बांध में 14 और बूंदी के गुढ़ा डेम में 11.50 फीसदी पानी ही बचा है. कभी भीलवाड़ा की लाइफ लाइन रहा मेजा बांध भी सूख चुका है. गनीमत यह कि इस क्षेत्र को पिछले कुछ समय चंबल का पानी मिलने लग गया है, जिससे यहां लोगों को राहत मिली हुई है.

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समय पर बारिश नहीं हुई तो और गहरा सकता है जलसंकट
अब अगर समय रहते बारिश नहीं हुई तो प्रदेश में जलसंकट और गहरा सकता है. जलदाय विभाग प्रदेशभर के 43,289 गांवों में से 43,039 में पानी सप्लाई कर इन गांवों की 99 फीसदी ग्रामीण आबादी को पानी आपूर्ति का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत ये है सरकार की नाक के नीचे राजधानी और जयपुर जिले की आधी से ज्यादा आबादी को ही पेयजल नहीं मिल पा रहा है.

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First published: June 8, 2019, 3:57 PM IST
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