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Explained: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से राजस्थान को आखिर कितना होगा फायदा, आसान भाषा में जानें

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे राजस्थान के सात जिलों से होकर गुजरेगा.

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे राजस्थान के सात जिलों से होकर गुजरेगा.

Delhi-Mumbai Express-way in Rajasthan: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे राजस्थान के लिए हर लिहाज से बूस्टर डोज का काम करेगा. इससे दूरियां को कम समय में तय होंगी ही, इसके साथ ही यह प्रदेश के तीनों अभ्यारण्यों को जोड़कर पर्यटन को पंख लगाएगा. प्रदेश के छह शहरों में इकोनॉमिक हब के लिए भी शानदार कनेक्टिविटी मुहैया कराएगा.

  • News18Hindi
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जयपुर. देश का पहला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे राजस्थान के लिए भी बहुत फायदेमंद होने वाला है. प्रदेश के सात जिलों में 374 किलोमीटर की लंबाई वाला दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पेट्रोल और बिजली की बचत तो करेगा ही, इसके साथ ही प्रदूषण को कम करने में भी सहायक होगा. वॉटर हार्वेस्टिंग टैंकों की मदद से यह बारिश का पानी बचाएगा तो इकोनॉमिक हब को जोड़कर आर्थिक मजबूत भी प्रदान करेगा. दिल्ली से दौसा तक का एक्सप्रेस-वे इसी साल के अंत तक शुरू होने की संभावना जताई जा रही है.

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर प्रदूषण कम करने के लिए करीब 10 लाख पौधे लगाए जाएंगे. हाइवे पर लगने वाले खास 5 किस्म के पौधों की खासियत यह है कि यह प्रदूषण कम करेंगे. इसीलिए 1350 किलोमीटर लंबे इस हाइवे को ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे भी कहा जा रहा है.

राजस्थान में 374 किलोटर होगी लंबाई
राजस्थान की बात करें तो अलवर, भरतपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, टोंक, बूंदी और कोटा जिलों से गुजरने वाले इस एक्सप्रेस-वे की लंबाई 374 किलोमीटर है. इस एक्सप्रेस-वे का 2023 तक काम पूरा करने का टारगेट रखा गया है. अभी तक 350 किलोमीटर का एक्सप्रेस-वे बनकर तैयार हो चुका है. यहां एक्सप्रेस वे 16 हजार 600 करोड़ रुपए खर्च होंगे. यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली और मुंबई के बीच की दूरी कम करने के लिए बनाया जा रहा है.

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पर्यटन को पंख : प्रदेश के तीनों अभ्यारण्यों से जुड़ेगा

राजस्थान में अलवर के सरिस्का, सवाई माधोपुर के रणथम्भौर और कोटा के मुकुन्दरा अभ्यारण्य को जोड़ेगा. इससे दिल्ली ने आने वाले पर्यटकों को कम समय में तीनों अभ्यारण्यों को घूमने का मौका मिलेगा. रणभम्बौर और सरिस्का में टाइगर देखने के लिए देश—विदेश से पर्यटक आते हैं. एक्सप्रेस वे के शुरू से पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा.

छह शहरों में इकोनॉमी को बूस्टर डोज

यह एक्सप्रेस-वे प्रदेश के जयपुर, किशनगढ़, अजमेर, कोटा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर जैसे इकोनॉमिक हब के लिए भी शानदार कनेक्टिविटी मुहैया कराएगा. इससे इन शहरों की एकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा. ये एक्सप्रेस-वे 5 साल में बनाने का लक्ष्य है. जबकि 1167 किलोमीटर की इंडोनेशिया की ट्रांस जावा रोड 2019 में दो दशकों के बाद बनकर तैयार हुई थी. इस एक्सप्रेस-वे की खासियत यह है कि यह पांच राज्यों के अधिकतर पिछड़े इलाकों से होकर गुजरेगा.

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस से कम होगा प्रदूषण

अधिकारियों का कहना है कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे से प्रदूषण कम होगा. देश के सबसे लंबे हाईवे पर परदेशी नीम, स्नेक, एरिका, गरबेरा व जाइलीन यह पांच किस्म के पौधे लगाए जाएंगे. ये प्लांट पॉल्यूशन को कम करने के साथ ही पर्यावरण को शुद्ध रखेंगे. इनमें एरिका पॉम कार्बनडाइऑक्साइड ग्रहण करता है और फिर ऑक्सीजन छोड़ता है. वहीं स्नेक प्लांट जहरीली गैसों को ऑब्जर्व कर लेता है. यह प्लांट हाईवे के किनारे और बीच में लगाए जाएंगे.

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बचेगा बरसाती पानी :  पानी बचाने के लिए बनेंगे टैंक

राजस्थान में भूजल की बात करें तो लगातार यह रसातल में जा रहा है. एक्सप्रेस वे जिन रास्तों से गुजरेगा, वहां की खासियत यह होगी कि बारिश के पानी को बचाने के लिए वॉटर हार्वेस्टिंग टैंक बनेंगे. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि पूरे हाईवे पर 500 मीटर की दूरी पर करीब 2 हजार टैंक बनेंगे. इस हिसाब से अकेले दौसा जिले में ही करीब 130 टैंक बनाए जाएंगे. प्रत्येक टैंक की क्षमता 700 लीटर की होगी. यानी हर साल बारिश का करीब 14 लाख लीटर पानी बचाया जाएगा. यही पानी इन प्लांट के लिए उपयोग किया जाएगा.

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एक्सप्रेस-वे से आठ घंटे में कोटा से मुंबई तक का सफर

वर्तमान में कोटा से मुंबई की दूरी सड़क मार्ग से लगभग 1033 किलोमीटर है. एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यह दूरी कम हो जाएगी. इसके अलावा एक्सप्रेस वे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटा की गति होगी. ऐसे में एक्सप्रेस-वे बनने के बाद कार से केवल आठ घंटे में कोटा से मुंबई का सफर तय कर सकेंगे. औद्योगिक नगरी अलवर से दस घंटे में मुंबई की दूरी तय हो जाएगी.

दिल्ली-दौसा के बीच 70 फीसदी काम पूरा

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर लगभग 90 हजार करोड़ रुपए की लागत आएगी. वहीं दिल्ली से दौसा तक एक्सप्रेस-वे का 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है. यहां जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे 21 से एक्सप्रेस-वे को लिंक करते हुए भाण्डारेज बंध पर सर्किल व टोल प्लाजा बनाने का कार्य चल रहा है. इससे लोगों को जयपुर, आगरा व करौली की ओर जाने में सुविधा होगी.

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