महिला IAS अधिकारी से एकतरफा प्यार करता था CISF कमांडेंट, अपनी ही साजिश से पहुंच गया जेल

आरोपी सीआईएसएफ कमांडेंट रंजन प्रताप सिंह मूल रूप से यूपी के अलीगढ़ का रहने वाला है.
आरोपी सीआईएसएफ कमांडेंट रंजन प्रताप सिंह मूल रूप से यूपी के अलीगढ़ का रहने वाला है.

मामला राजस्थान का है. कभी ट्रेनिंग के वक्त एक लेडी IAS के साथ रंजन प्रताप की मुलाकात हुई थी. उसके बाद अंदर ही अंदर वह उस महिला अधिकारी से एकतरफा प्यार करने लगा. पढ़ें पूरा मामला.

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दिल्ली. विदेश मंत्रालय (Foreign Ministry) में कार्यरत सीआईएसएफ (CISF) के एक कमांडेंट को एकतरफा प्यार ने उसे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. आरोपी ने एकतरफा प्यार में एक IAS महिला अधिकारी के पति को ड्रग्स की तस्करी में फंसाने की साजिश रची, लेकिन वो सफल नहीं हो पाया. मामला खुलने के बाद दिल्ली पुलिस ने आरोपी कमांडेंट समेत उसके सहयोगी मित्र को भी गिरफ्तार कर लिया है. दिल्ली पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ में जुटी हुई है.

कमांडेट रंजन प्रताप विदेश मंत्रालय में डेपुटेशन पर कार्यरत है
जानकारी के अनुसार आरोपी सीआईएसएफ कमांडेंट रंजन प्रताप सिंह मूल रूप से यूपी के अलीगढ़ का रहने वाला है. वह फिलहाल विदेश मंत्रालय में डेपुटेशन पर कार्यरत है. वह दिल्ली के साकेत इलाके में रहता है. करीब 42 वर्षीय रंजन प्रताप सिंह पर आरोप है कि वह मिनिस्ट्री ऑफ सूचना और प्रसारण मंत्रालय के इलेक्ट्रॉनिक निकेतन वाले दफ़्तर में सीनियर कंसल्टेंट अमित सावंत को ड्रग्स की तस्करी के आरोप में फंसाने की कोशिश में जुटा हुआ था.

ट्रेनिंग के वक्त राजस्थान में कार्यरत लेडी IAS से मुलाकात हुई थी
विशेष सूत्रों के मुताबिक रंजन प्रताप की कभी ट्रेनिंग के वक्त राजस्थान में कार्यरत लेडी IAS से मुलाकात हुई थी. उसके बाद वह मन ही मन में उस महिला अधिकारी से एकतरफा प्यार करने लगा. लेकिन वो महिला आईएएस अधिकारी इससे बेखबर थी. लेकिन इस बीच पता नहीं ऐसा क्या मामला हुआ कि उसके चलते रंजन प्रताप उस महिला आईएएस और उसके पति से बदला लेने पर उतारू हो गया. इसके लिए उसने महिला अधिकारी के पति को ड्रग्स तस्करी के मामले में फंसाने का जाल बुना.



ऐसे बुना जाल
एक दिन पहले 09 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस और CISF को एक अनजाने मोबाइल नंबर के कॉल से इस बात की जानकारी मिली थी कि इलेक्ट्रॉनिक निकेतन में खड़ी एक कार में कुछ संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम दिया गया है. इलेक्ट्रॉनिक निकेतन में सीआईएसएफ की टीम ने जब उस कार की जांच की तो उसमें करीब 500 ग्राम चरस के कई पैकेट मिले. उसके बाद इस मामले की जानकारी दिल्ली पुलिस को दी गई. दिल्ली पुलिस की टीम ने जब इस मामले की तफ़्तीश की तो पता चला जिसके मोबाइल से कॉल किया गया था वो मेहरोली का रहने वाला है, लेकिन वो काफी लो प्रोफाइल वाला शख्स है.

सीसीटीवी कैमरे से आया मामला पकड़ में
दिल्ली पुलिस ने उस शख्स से पूछताछ की. इस पर उसने पुलिस को बताया की दो आदमी आए थे. उन्होंने उससे मोबाइल मांगकर कॉल किया था. दिल्ली पुलिस ने अपनी पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए सीसीटीवी कैमरा चेक किया तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई. सीसीटीवी कैमरे को जब गौर से देखा गया उसमें पर्दे लगी एक कार नजर आई. उसके ग्लास पर विदेश मंत्रालय का स्टीकर भी लगा हुआ था.

कमांडेंट का सहयोगी मित्र भी गिरफ्तार
उसके बाद दिल्ली पुलिस कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए कमांडेंट रंजन प्रताप सिंह तक पहुंची. रंजन प्रताप को इस मामले में उसका मित्र नीरज चौहान मदद कर रहा था. इस पर दिल्ली पुलिस ने रंजन प्रताप के साथ उसके मददगार मित्र नीरज चौहान को भी गिरफ्तार कर लिया. नीरज चौहान पेशे से वकील है. दिल्ली पुलिस की टीम ने दोनों गिरफ्तार आरोपियों को साकेत कोर्ट में पेश रिमांड पर लिया है. पुलिस उनसे पूछताछ में जुटी हुई है. जल्द ही इस मामले में और भी कई राज का खुलने की संभावना है.

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