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मानवाधिकार आयोग ने कहा, शव रखकर प्रदर्शन करना अनुचित, सरकार अपराध घोषित करे

आयोग अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि शव का एकमात्र उद्देश्य होता है उसका दाह संस्कार. शव किसी को भी उत्तराधिकार में प्राप्त नहीं होता है. फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

आयोग अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि शव का एकमात्र उद्देश्य होता है उसका दाह संस्कार. शव किसी को भी उत्तराधिकार में प्राप्त नहीं होता है. फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

राज्य मानवाधिकार आयोग (State human rights commission) ने आए दिन विभिन्न मामलों में शव रखकर प्रदर्शन (Demonstration with dead body) करने को प्रवृत्ति को अनुचित (Inappropriate tendency) माना है. आयोग ने इस मामले में संज्ञान (Cognizance) लेते हुए इसे रोकने के लिए राज्य सरकार (State government) को कई अनुशंषाएं (Many recommendations) की हैं.

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जयपुर. राज्य मानवाधिकार आयोग (State human rights commission) ने आए दिन विभिन्न मामलों में शव रखकर प्रदर्शन (Demonstration with dead body) करने को प्रवृत्ति को अनुचित (Inappropriate tendency) माना है. आयोग ने इस मामले में संज्ञान (Cognizance) लेते हुए इसे रोकने के लिए राज्य सरकार (State government) को कई अनुशंषाएं (Many recommendations) की हैं. आयोग ने इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की अनुशंषा करते हुए कहा कि इसे अपराध (Crime) घोषित करने के लिए राज्य सरकार (State government) उचित प्रावधान (Proper provision) बनाए.

शव को मांगें मनवाने के लिए उपयोग में नहीं लिया जा सकता
आयोग अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि शव का एकमात्र उद्देश्य होता है उसका दाह संस्कार. शव किसी को भी उत्तराधिकार में प्राप्त नहीं होता है. शव को मांगें मनवाने के लिए उपयोग में नहीं लिया जा सकता है. जबकि इस तरह के घटनाक्रम आए दिन देखने को मिलते हैं. यह प्रवृत्ति अनुचित है कि लोग मांगें मनवाने के लिए शव रखकर प्रदर्शन करते हैं.

राजस्थान पुलिस अधिनियम-2007 के तहत प्रावधान बनाएं
आयोग अध्यक्ष ने राज्य सरकार से कहा कि इसे अपराध घोषित करने के लिए उचित प्रावधान बनाए जाएं ताकि ऐसी प्रवृत्ति पर रोक लग सके. ऐसे मामलों में राजस्थान पुलिस अधिनियम-2007 के तहत शव का पुलिस द्वारा प्रशासन की सहायता से दाह संस्कार किए जाने का प्रावधान किया जाए. आयोग अध्यक्ष ने इसकी पालना के लिए ACS गृह को भी प्रति भेजी है.

मानवाधिकार आयोग ने अपनी अनुशंषाओं में ये कहा
- मृत व्यक्ति के सीमित मानवाधिकार होते हैं.
- देहदान के अलावा मृत व्यक्ति के शरीर का उपयोग केवल दाह संस्कार के लिए किया जा सकता है.
- मृत व्यक्ति के परिजन दाह संस्कार करने का पहला अधिकार रखते हैं.
- परिजन द्वारा दाह संस्कार नहीं किए जाने पर राज्य सरकार का दायित्व है कि दाह संस्कार कराए.
- दाह संस्कार में लगने वाले आवश्यक समय से ज्यादा नहीं समय तक शव को नहीं रखा सकता.
- ऐसे प्रकरणों में शव के दाह संस्कार के कार्य को पूर्ण करने के लिए राजस्थान पुलिस अधिनियम-2007 की धारा 29 के तहत विशेष अधिकार प्रदान किए जाएं

पपला फरारी कांड के आरोपियों के जुलूस मामले में भी लिया था संज्ञान
उल्लेखनीय है कि राज्य मानवाधिकार आयोग समय-समय पर विभिन्न मसलों पर संज्ञान लेता रहा है. हाल ही में अलवर पुलिस ने विक्रम उर्फ पपला फरारी कांड में पकड़े गए 13 आरोपियों को बहरोड़ में अर्द्धनग्न कर उनका सार्वजनिक रूप से जुलूस निकाला था. मानवाधिकार आयोग ने उस मामले में भी पुलिस के इस कृत्य को बंदियों के मानवाधिकारों का उल्लंघन मानते हुए संज्ञान लेकर राज्य सरकार और पुलिस से जवाब मांगा था.

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