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राजस्थान में भारी बारिश के बावजूद कम होगी बुवाई और उत्पादन, जानिये क्या कहते हैं विशेषज्ञ

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक बुवाई और उत्पादन कम रहने के पीछे कम बारिश के साथ ही ज्यादा बारिश भी जिम्मेदार रहेगी.

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक बुवाई और उत्पादन कम रहने के पीछे कम बारिश के साथ ही ज्यादा बारिश भी जिम्मेदार रहेगी.

Rajasthan Agriculture News: राजस्थान में इन दिनों हो रही भारी बारिश के कारण बुवाई के आंकड़ों में जबर्दस्त उछाल आया है. राजस्थान में 23 जुलाई तक करीब 81 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हुई थी लेकिन 4 अगस्त तक यह आंकड़ा बढ़कर करीब 1 करोड़ 25 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है.

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जयपुर. राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से जारी झमाझम बारिश (Heavy rain) से भले ही किसानों और कृषि विभाग को बड़ी राहत मिली मिल गई हो लेकिन इसके बावजूद इस बार बुवाई और उत्पादन (Sowing and Production) कम होगा. इसके पीछे कृषि विशेषज्ञों ने कई कारण गिनाये हैं. प्रदेश में इन दिनों हो रही जोरदार बारिश के कारण खरीफ की बुवाई में पिछड़े राजस्थान ने बुवाई का लक्ष्य करीब 76 फीसदी तक हासिल कर लिया है. पिछले 11 दिनों में ही प्रदेश में बुवाई का रकबा करीब 44 लाख हेक्टेयर बढ़ गया है. कृषि विभाग ने इस बार खरीफ सीजन में 1 करोड़ 63 लाख हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया था. प्रदेश में 23 जुलाई तक करीब 81 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई थी जबकि 4 अगस्त को यह आंकड़ा बढ़कर करीब 1 करोड़ 25 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है.

लगातार हो रही बारिश के कारण केवल 11 दिनों में ही कुल बुवाई के लक्ष्य का करीब एक चौथाई से ज्यादा लक्ष्य पूरा हो गया है. 23 जुलाई तक प्रदेश में तय लक्ष्य के मुकाबले करीब 49 फीसदी बुवाई ही हुई थी. लेकिन 4 अगस्त को बुवाई का आंकड़ा तय लक्ष्य के करीब 76 फीसदी तक पहुंच गया है. हालांकि पिछले दिनों में हुई अच्छी बारिश के बावजूद प्रदेश में कृषि विभाग की ओर से निर्धारित किया गया बुवाई का टारगेट पूरा होने की संभावना कम ही नजर आ रही है. ऐसा माना जा रहा है कि प्रदेश में तय लक्ष्य की करीब 10 फीसदी बुवाई कम होगी. वहीं फसल का उत्पादन भी 5 से 20 फीसदी तक कम रहेगा.

ज्यादा बारिश भी जिम्मेदार
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बुवाई और उत्पादन कम रहने के पीछे कम बारिश के साथ ही ज्यादा बारिश भी जिम्मेदार रहेगी. दरअसल प्रदेश में पहले बारिश में लंबा अंतराल रहा. देरी से बारिश होने के चलते किसानों ने बुवाई भी देरी से की. वहीं जिन किसानों ने समय से अपने खेतों में बुवाई की थी उनमें से कई किसानों को फसल जलने के चलते दोबारा बुवाई करने की नौबत आ गई. इसके साथ ही जिन किसानों ने देरी से बुवाई की है उनकी फसल का दाना कमजोर रहने की आशंका है.

पानी भरा होने के चलते देरी से भी बुवाई संभव नहीं हो पा रही
प्रदेश के कई इलाकों में अतिवृष्टि भी देखने को मिल रही है. कोटा संभाग के जिलों में ज्यादा बारिश से लगातार पानी भरा होने के चलते देरी से भी बुवाई संभव नहीं हो पा रही है. ऐसे में बुवाई का लक्ष्य पूरा हासिल करना मुमकिन नहीं होगा तो और फसल का उत्पादन भी कम रहेगा. कृषि विशेषज्ञ डॉ. हरेन्द्र चीमा का कहना है कि अब अच्छी बारिश से बुवाई का रकबा भले ही बढ़ जाये लेकिन उत्पादन कम रहेगा.

10 अगस्त तक उम्मीदें कायम
जून और जुलाई का महीना खरीफ की बुवाई के लिए सबसे मुफीद माना जाता है. लेकिन इस बार बारिश ने देरी की है. लिहाजा बुवाई का सिलसिला भी अब तक जारी है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि 10 अगस्त के बाद प्रदेश में बुवाई का सिलसिला थम जाएगा. इसके बाद होने वाली बुवाई किसानों के हित में नहीं है. माना जा रहा है कि 10 अगस्त तक यह आंकड़ा 85 या 90 फीसदी तक पहुंच सकता है.

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