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Rajasthan: बदमाशों की अंगुलियां और पंजा बनेगा उनका काल, पुलिस तैयार कर रही है डिजिटल कुंडली

अपराधियों के फिंगर प्रिंट, उनकी फोटो और अन्य आपराधिक जानकारियों को स्कैनर के जरिए डिजिटल रूप से सेव कर डेटा बेस तैयार किया जा रहा है.

अपराधियों के फिंगर प्रिंट, उनकी फोटो और अन्य आपराधिक जानकारियों को स्कैनर के जरिए डिजिटल रूप से सेव कर डेटा बेस तैयार किया जा रहा है.

Rajasthan Police Updates: राजस्थान पुलिस पहली बार अपराधियों की डिजिटल कुंडली (Digital horoscope) बनाने जा रही है. इसकी ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

केन्द्र सरकार की नफीस योजना बनेगी पुलिस की जांच का हथियार
जयपुर डीसीपी नार्थ और डीसीपी वेस्ट शुरू हुआ डेटा बेस तैयार करने का काम
डिजिटल डाटा तैयार होने के बाद महज मिनटों में किसी भी अपराधी का रिकॉर्ड मिल जाएगा

विष्णु शर्मा.

जयपुर. राजस्थान में पुलिस पहली बार बदमाशों की डिजिटल कुंडली (Digital horoscope) तैयार कराने जा रही है. बदमाशों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल होने के बाद पुलिस महज डेढ़ मिनट के भीतर किसी भी बदमाश की कुंडली को एक क्लिक पर देख सकेगी. केन्द्र सरकार की नफीस योजना (Nafees Scheme) के तहत फिलहाल राजस्थान पुलिस ने प्रदेश के चुनिंदा जिलों में इसका काम शुरू किया है. इस पायलट प्रोजेक्ट में जयपुर डीसीपी नार्थ और डीसीपी वेस्ट को डिजीटल मशीनें उपलब्ध करा दी गई हैं. सबकुछ ठीक रहा तो वह दिन दूर नहीं जब पुलिस अपराधियों के गिरेबान तक आसानी से पहुंच सकेगी.

राजस्थान में अब गिरफ्त में आने वाले अपराधियों का डिजिटल डेटा बेस तैयार किया जा रहा है. केंद्र सरकार की नफीस योजना के तहत यह काम सितंबर महीने से राजस्थान में शुरु हुआ है. इसमें अपराधियों की अंगुली और उनका पंजा ही उनका काल बनेगा. जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में डीसीपी नार्थ और डीसीपी वेस्ट के ऑफिस में अपराधियों के डिजीटल डेटा इकट्‌ठा करने की शुरुआत कर दी गई है. उसके बाद महज डेढ़ मिनट में किसी भी बदमाश का आपराधिक रिकॉर्ड का आसानी से पता लगाया जा सकेगा.

पहले डीसीपी ऑफिस और फिर थानों को दिए जा रहे हैं उपकरण
राजस्थान में स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की तरफ से सबसे पहले चुनिंदा डीसीपी ऑफिस और फिर थानों को डिजिटल स्कैनर मशीनें और तकनीकी उपकरण उपलब्ध करवाए जा रहे हैं. इसमें पुलिस थानों में गिरफ्तार बदमाशों के फिंगर प्रिंट, उनकी फोटो और अन्य आपराधिक जानकारियों को स्कैनर के जरिए डिजिटल रूप से सेव कर डेटा बेस तैयार किया जा रहा है.

इस तरह इकट्‌ठा होगा अपराधियों का डिजिटल रिकॉर्ड
स्कैनर मशीन में अपराधी की प्रत्येक अंगुली को स्कैन किया जाता है. फिर हथेली को स्कैन किया जाता है. महज 5 से 10 मिनट में यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है. इससे अब किसी भी आपराधिक वारदात के बाद घटनास्थल पर मिलने वाले फिंगर प्रिंट से यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि वारदात में किस गैंग या बदमाश का हाथ है.

पहले फिंगर प्रिंट रिकॉर्ड करने में लगता था लंबा वक्त
नफीस योजना की घोषणा गृहमंत्री अमित शाह ने की थी. इससे पहले राजस्थान में गिरफ्तार होने वाले बदमाशों के फिंगर प्रिंट कागज पर लिए जाते थे. लेकिन यह लंबे नहीं चलते थे. दस्तावेज खराब होने का डर रहता था. इसके साथ ही वक्त भी काफी लगता था. राजस्थान में अपराधियों का डिजिटल डेटा बेस तैयार हो जाने से पुलिस को वारदातों का खुलासा करने में समय कम लगेगा. इससे अपराधियों की पहचान कर उनको गिरफ्तार करने में पहले से ज्यादा आसानी होगी. इससे संगठित गिरोह की धरपकड़ में भी पुलिस को सहायता मिलेगी.

Tags: Crime News, Jaipur news, Rajasthan news, Rajasthan police

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