सात समंदर पार पहुंची राजस्थान के जल स्वावलंबन अभियान की गूंज

इस साल के अंत में प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. जाहिर है बीजेपी इस अभियान को मिली अपार सफलता को जनता के बीच भुनाएगी.

Babulal Dhayal | News18 Rajasthan
Updated: May 21, 2018, 5:37 PM IST
सात समंदर पार पहुंची राजस्थान के जल स्वावलंबन अभियान की गूंज
फोटो: न्यूज 18 राजस्थान
Babulal Dhayal | News18 Rajasthan
Updated: May 21, 2018, 5:37 PM IST
सीएम वसुंधरा राजे के 'जल स्वावलंबन' अभियान की गूंज सात समंदर पार तक सुनाई देने लगी है. ब्रिक्स कंट्रीज से लेकर साउथ ऑस्ट्रेलिया तक से जल स्वावलंबन अभियान की खूबियां जानने के लिए एक्सपर्ट‌्स की टीमें लगातार राजस्थान का दौरा कर रही हैं. वहीं केंद्र सरकार कई स्कीमों के साथ अभियान को जोड़ने की तैयारी कर रही है. कई राज्य अभियान को अपनाने की ओर अग्रसर हैं.

तीन साल के अरसे में ही वसुंधरा राजे के 'जल स्वावलंबन' अभियान ने देश दुनिया में धूम मचा दी है. साउथ ऑस्ट्रेलिया के मरे डार्लिंग से लेकर ब्रिक्स कंट्रीज तक अभियान को अपने यहां लागू कर जल संकट से निजात पाने की ओर बढ़ रहे हैं. केंद्र सरकार के कई महकमों के अधिकारी राजस्थान का दौरा कर अभियान की बारीकियां समझ रहे हैं और इसे मनरेगा से लेकर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना तक में शामिल करा रहे हैं.



करीब चार लाख स्ट्रक्चर बनाए
सत्ता संभालते ही वसुंधरा सरकार ने अभियान का आगाज कर मरूधरा को जल संकट से मुक्ति दिलाने का सपना देखा था. अभियान में सरकार के दर्जनभर विभागों के हजारों अधिकारी कर्मचारियों ने कंधे से कंधा मिलाकर आम जनता के सहयेाग से अब तक जल संग्रहण और वाटर रिचार्ज के करीब चार लाख स्ट्रक्चर बनाने का करिश्मा कर दिखाया. इस साल के अंत तक प्रदेश के 16 हजार गांवों की कायापलट हो जायेगी. इससे जलस्तर न केवल तेजी से उपर आया, बल्कि रेतीले धोरे और सूखी बंजर पहाड़ियों के इलाकों में हरियाली की चादर दिखने लगी है. साथ ही सिंचाई का रकबा भी बढ़ाने में सरकार ने कामयाबी हासिल की है.

तकनीक का जमकर लिया सहारा
वसुंधरा सरकार ने अभियान को कामयाब बनाने के लिए तकनीक का भी खूब सहारा लिया. जियो टैगिंग, ड्रोन से लेकर आज की लेटेस्ट टैक्नोलोजी की मदद से सरकार को जमीनी हकीकत समझने में खूब मदद मिली. साथ ही क्वालिटी के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया. जहां से भी सरकार के पास शिकायतें आई वहां तत्काल कार्रवाई की गई. यही वजह रही कि गांव से लेकर शहरों तक आज अभियान अपनी छाप छोड़ रहा है. शहरों में बावड़ियां फिर से जिंदा हो गई हैं तो रेन वाटर हार्वेस्टिंग के स्ट्रक्चर भी लोग अपनाकर पेयजल के मामले में आत्मनिर्भर बन रहे हैं.

इस साल के अंत में प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. जाहिर है बीजेपी इस अभियान को मिली अपार सफलता को जनता के बीच भुनाएगी और चुनाव में इसके चर्चे आम जनता की जुबां पर लाकर चुनावी फायदा उठाने में भी कोई चूक नहीं करेगी.
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