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Tokyo Olympic: दिव्यांश पंवार कभी अपूर्वी के हाथों हुये थे सम्मानित, अब उन्हीं के साथ शूटिंग में दिखायेंगे दम

Tokyo Olympic: दिव्यांश पंवार कभी अपूर्वी के हाथों हुये थे सम्मानित, अब उन्हीं के साथ शूटिंग में दिखायेंगे दम

प्रदेश के सबसे युवा ओलंपियन हैं दिव्यांश पंवार

प्रदेश के सबसे युवा ओलंपियन हैं दिव्यांश पंवार

Journey of Dreams : अभिनव बिंद्रा को अपना हीरो मानने वाले शूटर दिव्यांश अब तक कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं. दिव्यांश ने वर्ल्ड कप में पहले पायदान को कब्जे में कर आईएसएसएफ रैंकिग में भी पहला स्थान प्राप्त किया था. बीजिंग प्रतियोगिता से दिव्यांश ने ओलंपिक में कोटा हासिल किया है.

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जयपुर. जापान के टोक्यो में खेलों का महाकुंभ यानि ओलंपिक (Tokyo Olympic) आज शुरू हो रहे हैं. इसमें राज्य के दो निशानेबाज निशानेबाजी (shooting) में हिस्सा लेंगे. ओलंपिक में शूटिंग की दो प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे दिव्यांश पंवार (Divyansh panwar) जयपुर के हैं. एक कार्यक्रम में ओलंपियन अपूर्वी चंदेला  (Apurvi Chandela) के हाथों सम्मानित हो चुके दिव्यांश आज उनके साथ ही टोक्यो ओलंपिक की यात्रा पर हैं जो कि दुनिया के हर खिलाड़ी का एक ख्वाब होता है. अठारह साल की उम्र में ओलंपिक तक पहुंचने वाले दिव्यांश से पदक की उम्मीदें हर किसी को है. इसके लिए दिव्यांश ने कड़ी मेहनत की है.

दिव्यांश के सफर को बताते हुए उनके पिता बचपन के दिनों को भी याद करते हैं. जगतपुरा शूटिंग रेंज में स्टेट मेडल मिलने के बाद दिव्यांश के सुनहरे सफर की शुरूआत हो गई. तब से लेकर वह छह इंटरनेशनल गोल्ड मेडल जीत चुके हैं. इनमें चार आईएसएसएफ वर्ल्ड कप गोल्ड मेडल हैं और दो जूनियर वर्ग में हैं.

शूटर अभिनव बिंद्रा को मानते हैं रोल मॉडल
अभिनव बिंद्रा को अपना हीरो मानने वाले दिव्यांश अब तक कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं. दिव्यांश ने वर्ल्ड कप में पहले पायदान को कब्जे में कर आईएसएसएफ रैंकिग में भी पहला स्थान कर चुके हैं. बीजिंग प्रतियोगिता से दिव्यांश ने ओलंपिक में कोटा हासिल किया था. अपनी ट्रेनिंग के दौरान दिव्यांश प्रतिदिन पांच से छह घंटे शूटिंग का अभ्यास करते हैं.

कोविड पॉजिटिव होने के बाद भी की तैयारी
उनके कोच दीपक दुबे ने उनको कोविड के दौरान लगे लॉकडाउन में तैयारी जारी रखते हुए शूटिंग के गुर सिखाए. उनके पिता अशोक पंवार बताते हैं कि कोविड पॉजिटिव होने के बाद भी उसके मनोबल में कोच ने कोई कमी नहीं आने दी. एक दौर में दिव्यांश को जब शूटिंग पंसद नहीं आ रही थी तब उनके पिता ने ही इस खेल को जारी रखने की प्ररेणा दी थी.

दिव्यांश में सीखने की लगन और एकाग्रता
दिव्यांश के पिता की मानें तो राजधानी के निजी स्कूल में स्थित शूटिंग रेंज में अभ्यास करना भी दिव्यांश के करियर को बूस्ट करने जैसा था. इस रेंज में आज दिव्यांश के बाकी साथी भी पूरी तन्यमता से अपने अभ्यास में जुटे हैं. वे ओलंपिक में दिव्यांश से सुनहरी सफलता की उम्मीद कर रहे हैं. जबकि उनके खेल और शिक्षा से जुड़ाव रखने वाले शिक्षकों की मानें तो दिव्यांश में सीखने की लगन और एकाग्रता बेहतरीन हैं. वे बाकी विद्यार्थियों के लिए भी प्ररेणा हैं.

शूटिंग के साथ-साथ पढ़ाई में भी बेहतरीन
इसी वजह से वे आज देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. स्कूल प्राचार्य अशोक वैद का कहना है कि दिव्यांश जितने अपने खेल में बेहतर है उतना ही पढाई में भी. साइंस बैक्रग्राउंड से होने के बाद भी बेहतरीन अंक हासिल किए हैं. इसी तरह राजस्थान राइफल संघ भी उम्मीदें कर रहा है कि दिव्यांश पंवार ओलंपिक में जरूर मैडल लेकर आंएगे.

आत्मविश्वास से करेंगे प्रेशर को हैंडल
वे आत्मविश्वासी हैं और पहला ओलंपिक होने के बाद भी के प्रेशर को हैंडल करना उन्हें आता हैं. दिव्यांश के सधे हुए निशाने की उम्मीदें आज ना सिर्फ जयपुर को बल्कि पूरे प्रदेश को हैं. हालांकि इसके लिए उनकी मेहनत और तमाम दुआएं उनके साथ हैं. जिससे की उन्हें सफलता मिल सके और देश का परचम टोक्यो में लहराया जा सके.

Tags: Abhinav bindra, Shooting, Shooting Coach, Tokyo, Tokyo olympic, Tokyo Olympics Games

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