राजस्थान: बाड़मेर रिफाइनरी को दोहरा 'कोरोना', तेल की धार और काम की रफ्तार दोनों हुई सुस्त

बाड़मेर में तेल का उत्पादन 2009 में शुरू हुआ था. लेकिन रिफाइनरी प्रोजेक्ट अक्टूबर 2018 में शुरू हुआ. (फाइल फोटो)

बाड़मेर में तेल का उत्पादन 2009 में शुरू हुआ था. लेकिन रिफाइनरी प्रोजेक्ट अक्टूबर 2018 में शुरू हुआ. (फाइल फोटो)

Barmer refinery project delayed due to Corona: कोरोना के कारण गहलोत सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बाड़मेर रिफाइनरी भी हिचकोले खाने लगा है. इसके कारण जहां रिफाइनरी के तेल की धार कम हुई है, वहीं इसके बनने की रफ्तार भी बहुत सुस्त हो गई है.

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जयपुर. राज्य के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बाड़मेर रिफाइनरी (Barmer Refinery) को कोरोना ने दोहरा झटका दिया है. एक ओर जहां बाड़मेर में उत्पादित हो रहे तेल की धार कम हुई है, वहीं दूसरी ओर कोरोना (Corona) के कारण रिफाइनरी बनने की रफ्तार बहुत सुस्त हो गई है. इसलिए यह प्रोजेक्ट एक साल आगे खिसक सकता है. इन दो झटकों से राज्य को राजस्व में करोड़ों की हानि होगी.

कोरोना के पहले साल में ही तेल उत्पादन में कमी आ गई थी. दो-तीन माह अच्छे गुजरने के बाद फिर से कोरोना की दूसरी लहर ने रिफाइनरी को दोहरा झटका दे डाला है. यहां उत्पादित हो रहे तेल में प्रतिदिन 1.75 लाख बैरल की बजाए इस साल डेढ़ लाख बैरल के करीब का औसत आया है. वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दामों के चलते इस तेल से होने वाली आय का गणित और गड़बड़ा गया है. इससे करोड़ों का राजस्व कम मिलेगा. पिछले नौ सालों में इस बार तेल से आय न्यूनतम होगी.

तय समय में नहीं पूरा होगा रिफाइनरी प्रोजेक्ट

दूसरी ओर बाड़मेर के पचपदरा में रिफाइनरी के कार्य को चार साल में पूरा करना था. लेकिन कोरोना की दो लहरों से रिफाइनरी प्रोजेक्ट के काम को काफी झटका लगा है. हालांकि, बाड़मेर में तेल का उत्पादन 2009 में शुरू हुआ था, लेकिन रिफाइनरी प्रोजेक्ट अक्टूबर 2018 में शुरू हुआ. इसे चार साल में पूरा होना था, लेकिन कोरोना की लहरों के चलते यह समय पर पूरा होता नहीं दिख रहा है. अब तय अवधि में 16 माह शेष हैं, लेकिन प्रोजेक्ट में अभी मात्र 15 फीसदी धनराशि 6600 करोड़ रुपए के ही काम हो पाए हैं. ऐसे में यह प्रोजेक्ट सालभर आगे खिसक सकता है.
कोरोना काल में उत्पादन क्षमता नहीं बढ़ पाएगी

पहले बाड़मेर में 1.75 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन हो रहा था. रिफाइनरी निर्माण तक इसे 5.50 लाख बैरल प्रतिदिन करना है. लेकिन कमजोर दाम के चलते तेल के उत्पादन का नहीं बढ़ाया गया. इसके विपरीत कोरोना काल में 25 से 30 लाख बैरल उत्पादन प्रतिदिन घटाना पड़ा. अधिकारियों के मुताबिक प्रोजेक्ट का काम पूरे होने के बाद भी पूरी क्षमता से उत्पादन शुरू करने में छह माह लगेंगे. पहले उत्पादन का लक्ष्य मार्च 2023 तय किया गया था, जो अब एक साल आगे जा सकता है.

अभी 6600 करोड़ रुपये के काम ही पूरे हुए



लगभग 9 मिलियन टन वार्षिक क्षमता की बन रही रिफाइनरी पर 43 हजार 129 करोड़ रुपये खर्च होंगे. अब तक करीब 38 हजार करोड़ तक के काम स्वीकृत हो चुके हैं, लेकिन काम 6600 करोड़ रुपये के ही पूरे हो सके हैं. प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारी कई माह की देरी स्वीकार करते हैं. हालांकि इसका आधिकारिक आंकलन अभी नहीं हो सका है. यह आगामी टास्क फोर्स की बैठक में हो सकता है.

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