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Jaipur: 40 साल बाद पूरा हुआ सपना, गुलाबीनगरी से पहली बार दौड़ी इलेक्ट्रिक ट्रेन

जयपुर-दिल्ली रूट भी अब पूरी तरह से इलेक्ट्रफाइड हो चुका है.
जयपुर-दिल्ली रूट भी अब पूरी तरह से इलेक्ट्रफाइड हो चुका है.

जयपुर के इतिहास (History) में 14 दिसंबर का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज किया जायेगा. देश और दुनिया में पिंकसिटी (Pink city) के नाम से प्रसिद्ध ऐतिहासिक जयपुर शहर से आज पहली बार इलेक्ट्रिक ट्रेन (Electric train) की शुरुआत हुई है.

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जयपुर. उत्तर पश्चिम रेलवे (North Western Railway) के इतिहास में आखिरकार वो दिन आ ही गया जब पहली बार जयपुर (Jaipur) रेलवे स्टेशन से इलेक्ट्रिक ट्रेन ने सिटी बजाई है. सोमवार को दोपहर 3 बजकर 20 मीनट पर पहली बार जयपुर से इलेक्ट्रिक ट्रेन (Electric train) यहां से शुरू हुई. पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन जयपुर से प्रयागराज के लिये रवाना की गई. भले ही पूरे देश में इलेक्ट्रिक ट्रेनें बहुत पहले से चलने शुरू हो चुकी हैं, लेकिन जयपुर में अभी तक ट्रेनें डीजल इंजिन से ही चलाई जा रही थीं, लेकिन अब जयपुर भी देश के विकसित रेलवे स्टेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहा है. डीआरएम मंजूषा जैन ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.

पिछले काफी समय से उत्तर पश्चिम रेलवे में बिजली की ट्रेनें चलाने की कवायद चल रही है. बिजली के तार और पोल बिछाने का काम चल रहा था. NWR का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन जयपुर ट्रेनों के संचालन के हिसाब से तो आगे के पायदान पर खड़ा था, लेकिन इलेक्ट्रिक ट्रेनों के मामले में अब तक यह पिछले पायदान पर ही नजर आ रहा था. लेकिन आज पहली बार जयपुर से पैसैंजर ट्रेन यात्रियों को लेकर दोपहर 3 बजकर 20 मिनिट पर प्रयागराज के लिए रवाना हुई. जयपुर रेलवे स्टेशन पर पिछले दिनों इलेक्ट्रिक इंजिन का ट्रायल किया गया था. जयपुर-दिल्ली रूट भी अब पूरी तरह से इलेक्ट्रफाइड हो चुका है.

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कोटा मंडल में ये काम 40 साल पहले ही शुरू हो चुका है


जयपुर से पहली इलेक्ट्रीक ट्रेन संख्या 02404 प्रयागराज के लिए जयपुर से दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर रवाना हुई है. यह 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। इलेक्ट्रिक ट्रेन डीजल ट्रेन के मुकाबले मालगाड़ियों के लिए लगभग 1/4 गुणा और यात्री गाड़ियों के लिए लगभग 1/ 2.5 गुणा किफायती साबित होगी. मजेदार तथ्य ये भी है कि राजस्थान में ही पड़ने वाले कोटा मंडल में ये काम 40 साल पहले ही शुरू हो चुका है. लेकिन कोटा मंडल NWR के तहत नहीं आता. अब कोटा से बड़े जंक्शन जयपुर में 40 साल बाद जाकर ये सपना पूरा हुआ है.
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