ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट: इंदिरा गांधी नहर जितनी बड़ी होगी परियोजना

वसुंधरा सरकार का ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट का सपना धरातल पर उतरा तो जयपुर का रामगढ़ बांध फिर से जिंदा हो जायेगा.

Babulal Dhayal | News18 Rajasthan
Updated: May 29, 2018, 2:54 PM IST
ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट: इंदिरा गांधी नहर जितनी बड़ी होगी परियोजना
प्रोजेक्ट पर अधिकारियों से चर्चा करते मंत्री डॉ. रामप्रताप। फोटो: न्यूज 18 राजस्थान
Babulal Dhayal | News18 Rajasthan
Updated: May 29, 2018, 2:54 PM IST
वसुंधरा सरकार का ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट का सपना धरातल पर उतरा तो जयपुर का रामगढ़ बांध फिर से जिंदा हो जायेगा. 37 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट की डीपीआर को जल्द मंजूरी मिलने की संभावना है. केंद्रीय जल आयोग इस सप्ताह प्रदेशवासियों को डीपीआर मंजूरी की खुशखबर दे सकता है.

37 हजार करोड़ की इस परियोजना की डीपीआर जल आयोग के पास फाइनल स्टेज पर है. लेडार के साथ हवाई सर्वे का काम पूरा हो चुका है. जैसे ही डीपीआर को मंजूरी मिली हाइड्रोलोजी रिपोर्ट पर काम शुरू हो जायेगा. वसुंधरा सरकार झालावाड़, बारां और कोटा जिले की नदियों को आपस में जोड़कर नहर के जरिये इसके पानी को धौलपुर तक लायेगी. फिर इससे बड़ी नहरें निकालकर अलवर, भरतपुर, जयपुर, अजमेर, टोंक सवाईमाधोपुर और करौली समेत 13 जिलों में पानी पहुंचाया जायेगा. इस परियोजना में जयपुर के रामगढ़ बांध को भी फिर से जिंदा करने की सरकार की योजना है.



दक्षिणी पूर्वी राजस्थान में बारिश के वक्त बाढ़ की वजह बनने वाली कालीसिंध, पार्वती, मेज और चाकन नदियों का सरप्लस वाटर कैनाल के जरिये लाया जायेगा. इस प्रोजेक्ट में चंबल नदी से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं होगी. चंबल के ऊपर एक्वाडक्ट बनाकर पानी लाने के बजाय सरकार ने चंबल के नीचे जल सुरंग बनाकर कैनाल मार्ग को आगे बढ़ाने का विकल्प चुना है. रास्ते में जिस भी नदी और बांध में पानी की कमी होगी उसमें जरूरत के मुताबिक पानी पहुंचाया जायेगा. सरकार का दावा है कि प्रोजेक्ट के पूरा होने पर इससे 2051 तक न केवल इस इलाके की जनता की प्यास बुझेगी, बल्कि खेतों में सिंचाई के लिये भी पानी उपलब्ध होगा. सीएम राजे ने प्रोजेक्ट का काम तेजी से आगे बढ़ाने पर मंत्री डॉक्टर रामप्रताप के प्रयासों की सराहना की है.

प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने से पहले वसुंधरा सरकार को मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से भी अनुमति लेनी होगी. सरकार की कोशिश इसे नेशनल प्रोजेक्ट का दर्जा दिलाने की है ताकि अधिकांश खर्च केंद्र सरकार वहन कर सके. अगर सब कुछ बेहतर रहा तो ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट के रूप में पूर्वी राजस्थान को इंदिरा गांधी नहर के बराबर पानी मिलने लगेगा और सूखे और पठारी इलाके सरसब्ज हो जायेंगे.
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