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पंचायत चुनाव के बाद अब शुरू हुई सहकारी समितियों में चुनाव की प्रक्रिया
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Dinesh Sharma | News18 Rajasthan
Updated: January 29, 2020, 4:40 PM IST
पंचायत चुनाव के बाद अब शुरू हुई सहकारी समितियों में चुनाव की प्रक्रिया
सहकारी समितियों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है.

राजस्थान की करीब 900 सहकारी समितियों (Cooperative Societies) के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है. राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण (State Cooperative Election Authority) के मुताबिक फरवरी माह में चुनाव सम्पन्न करवा लिए जाएंगे.

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जयपुर. प्रदेश की सहकारी समितियों  (Cooperative Societies) में लोकतंत्र फिर से स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सालों से अटके समितियों के चुनावों की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है. राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण (State Cooperative Election Authority) के मुताबिक फरवरी माह में करीब 900 समितियों के चुनाव सम्पन्न करवा लिए जाएंगे. इनमें से करीब 400 समितियों में चुनाव प्रक्रिया सम्बन्धी आदेश भी जारी किए जा चुके हैं. हालांकि अभी उन्हीं समितियों के चुनाव करवाए जा रहे हैं जिनमें ज्यादा राजनीतिक दखल नहीं है और जिससे लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ने की आशंकाएं भी नहीं है. इनमें बुनकर, आवासन, गृह निर्माण, फल सब्जी क्रय-विक्रय और प्राथमिक उपभोक्ता भंडार आदि शामिल हैं.

बहुप्रतीक्षित ग्राम सेवा सहकारी समितियों के चुनाव अभी पंचायत चुनाव के चलते टाल दिए गये हैं क्योंकि इसमें लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ने का खतरा होता है. प्रदेश में 6489 कार्यरत ग्राम सेवा सहकारी समितियां हैं जिनमें से 5907 के निर्वाचन बाकी हैं. प्रदेश में त्रिस्तरीय सहकारी सिस्टम है और प्राथमिक समितियों के चुनाव करवाने के बाद ही जिला स्तर और राज्य स्तर की समितियों में चुनाव सम्पन्न करवाए जा सकते हैं. सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना का कहना है कि ग्राम सेवा सहकारी समितियों के चुनाव भी जल्द करवाने की राज्य सरकार की मंशा है लेकिन पंचायत चुनाव के चलते इनमें थोड़ा विलम्ब हो रहा है.

आधी से ज्यादा समितियों में चुनाव हैं बाकी
प्रदेश में अलग-अलग कारणों से आधी से ज्यादा सहकारी समितियों में चुनाव बाकी चल रहे हैं. राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण के मुताबिक 17 हजार 697 सहकारी संस्थाएं निर्वाचन योग्य हैं जिनमें से 9480 में चुनाव लम्बित हैं. इनमें से कई समितियां ऐसी हैं जिनमें सालों पहले ही चुनाव ड्यू हो चुके हैं लेकिन पांच साल का कार्यकाल खत्म होने के बावजूद चुनाव सम्पन्न नहीं करवाए गए हैं. राज्य और जिला स्तर की अधिकांश समितियों में प्रशासक जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.



पुराने बोर्ड की संभाल रहे कामकाज
प्राथमिक स्तर की हजारों समितियों में चुनाव ड्यू हो चुके हैं लेकिन उनमें प्रशासक भी नहीं लगाए गए हैं. दरअसल प्रशासक किसी लोक सेवक को ही लगाया जा सकता है और इतने बड़े स्तर पर प्रशासकों की नियुक्ति बेहद मुश्किल है. ऐसे में कार्यकाल खत्म होने के बावजूद पुराने बोर्ड ही इन समितियों का जिम्मा संभाल रहे हैं लेकिन पूरे मन से काम नहीं कर पा रहे हैं. ग्राम सेवा समितियों के चुनाव नहीं होने से किसानों को परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि सहकारी समिति का कामकाज ठप होने से उन्हें समय पर और सस्ती दर पर खाद-बीज आदि नहीं मिल पा रहे हैं.

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First published: January 29, 2020, 4:40 PM IST
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