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जल्द होंगे सहकारी समितियों के चुनाव, सीएम गहलोत ने दिए निर्देश, तैयारियां शुरू

अब सीएम अशोक गहलोत से निर्देश मिलने के बाद प्राधिकरण हरकत में आ गया है. सहकारी समितियों के कई बरसों से लंबित चल रहे चुनाव जल्द संपन्न करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

अब सीएम अशोक गहलोत से निर्देश मिलने के बाद प्राधिकरण हरकत में आ गया है. सहकारी समितियों के कई बरसों से लंबित चल रहे चुनाव जल्द संपन्न करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

राज्य में जितनी सहकारी समितियां चुनाव के योग्य हैं उनमें से आधी से ज्यादा के चुनाव ड्यू (Election due) चल रहे हैं. अब र ...अधिक पढ़ें

जयपुर. प्रदेश में सहकारी समितियों (Co-operative societies) के चुनाव (Election) समय पर नहीं हो पा रहे हैं. राज्य में जितनी सहकारी समितियां चुनाव के योग्य हैं उनमें से आधी से ज्यादा के चुनाव ड्यू (Election due) चल रहे हैं. इसके पीछे राजनीतिक लाभ-हानि (Political profit and loss) प्रमुख कारण बना है. अब राज्य सरकार (State government) ने इन सहकारी समितियों के चुनाव जल्द पूरे करवाने के निर्देश (Instructions) दिए हैं.

13 प्रकार की सहकारी समितियों के निर्वाचन की जिम्मेदारी है
राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण के पास 13 प्रकार की सहकारी समितियों के निर्वाचन की जिम्मेदारी है. अब सीएम अशोक गहलोत से निर्देश मिलने के बाद प्राधिकरण हरकत में आ गया है. सहकारी समितियों के कई बरसों से लंबित चल रहे चुनाव जल्द संपन्न करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

प्रदेश में ये है सहकारी समितियों का पूरा गणित
- प्रदेश में 24,676 सहकारी संस्थाएं पंजीकृत हैं.
- इनमें से 17,697 सहकारी संस्थाएं निर्वाचन योग्य हैं.
- 8,217 सहकारी संस्थाओं के चुनाव संपन्न हो चुके हैं.
- 9,480 सहकारी संस्थाओं के चुनाव होना ड्यू हैं.
- करीब 53 फीसदी से ज्यादा समितियों में चुनाव ड्यू हैं.
- 15 शीर्ष सहकारी संस्थाओं में से 12 संस्थाओं के निर्वाचन ड्यू है.
- 29 कार्यरत केन्द्रीय सहकारी बैंकों में से 23 के निर्वाचन ड्यू हैं.
- 36 प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों में से 28 के निर्वाचन ड्यू हैं.
- 6,489 कार्यरत ग्राम सेवा सहकारी समितियों में से 5,907 के निर्वाचन ड्यू हैं.
- 222 क्रियाशील क्रय-विक्रय सहकारी समितियों में से 212 में निर्वाचन ड्यू हैं.
- 243 क्रियाशील गृह निर्माण सहकारी समितियों में से 123 के निर्वाचन ड्यू हैं.

2005 में राजस्थान राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण की स्थापना हुई थी
पंजीकृत सहकारी समितियों के चुनाव समय पर हो इसके लिए राज्य में वर्ष 2005 में ही राजस्थान राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण की स्थापना की थी. लेकिन प्राधिकरण को अधिकार कई बरसों बाद प्रदान किए गए. जुलाई 2017 के बाद से अब तक प्राधिकरण ने करीब 2 हजार समितियों के चुनाव संपन्न करवाए हैं. चूंकि सहकारी समितियों में निर्वाचन की प्रक्रिया नीचे से ऊपर की ओर चलती है लिहाजा छोटे स्तर की सहकारी समितियों के चुनाव नहीं होने से शीर्ष स्तर की समितियों के चुनाव भी पेंडिंग हैं.

सहकारी समितियों का जाल गांव-गांव में फैला हुआ है
ग्राम सेवा सहकारी समितियों का जाल प्रदेश के गांव-गांव में फैला हुआ है, लेकिन साल 2016 के बाद से इनके चुनाव नहीं हुए हैं. बीजेपी सरकार राजनीतिक लाभ-हानि के चलते इन समितियों के चुनाव को टालती रही. अब कांग्रेस सरकार ने इन चुनावों को समयबद्ध रूप से करवाने की प्रतिबद्धता जताई है.

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