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चर्चा में आए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष मेघवाल, BJP के वाॅकआउट के बाद भी सदन में ही बैठे रहे

वॉकआउट के दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और बीजेपी विधायक कैलाश मेघवाल सदन के अंदर ही बैठे रहे. 
वॉकआउट के दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और बीजेपी विधायक कैलाश मेघवाल सदन के अंदर ही बैठे रहे. 

विधानसभा के बजट सत्र में बीजेपी के वाॅकआउट के बाद भी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और बीजेपी विधायक कैलाश मेघवाल (Kailash Chandra Meghwal) सदन के अंदर ही बैठे रहे.

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जयपुर. राजस्थान की 15वीं विधानसभा (Rajastjhan VidhanSabha) का चौथा सत्र शुक्रवार को राज्यपाल कलराज मिश्र (Kalraj Mishra) के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ. भाजपा विधायक दल ने शाॅर्ट टर्म नोटिस पर सत्र बुलाए जाने का राज्यपाल अभिभाषण के दौरान विरोध किया और सदन से वाॅकआउट कर दिया. इस वाॅकआउट में बीजेपी के तमाम विधायक सदन से बाहर चले गए लेकिन पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और विधायक कैलाश मेघवाल (Kailash Chandra Meghwal) सदन के अंदर ही बैठे रहे. मेघवाल के सदन में ही बैठे रहने की बात चर्चा का विषय बन हुई. हालांकि इस बारे में पार्टी विधायकों को पता चलने पर मेघवाल को सदन के बाहर बुला लिया गया.

दो पर्ची भेजी तब बाहर आए मेघवाल

मेघवाल के वॉकआउट के समय सदन में ही बैठे रहने की बात का पता जब पार्टी विधायकों को लगा तो उन्होंने सदन में विधायक  कैलाश मेघवाल के पास पर्ची भेजी ताकि वह सदन से बाहर आ जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ. मेघवाल ने पर्ची अपने पास ही रख ली. फिर से दोबारा एक पर्ची लिखकर भेजी गई जिसके बाद विधायक कैलाश मेघवाल सदन से बाहर आए.



प्रदेशाध्यक्ष सतीन पूनिया ने दूर की विधायक की नाराजगी
पर्ची मिलने के बाद मेघवाल उठकर ना पक्ष लॉबी में पहुंचे और उन्होंने नाराजगी जताई और कहा कि जब 2019 में नई सरकार का गठन हुआ था तब विधानसभा अध्यक्ष पद पर मैं ही था और शाॅर्टटर्म नोटिस पर विधानसभा का सत्र आहूत करने के मामले में मैंने विरोध जताया था. इसके बाद भी सत्र आउट हुआ था. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वर्तमान विधायक कैलाश मेघवाल ने अपनी बात कहने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधायक सतीश पूनिया ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और मेघवाल की नाराजगी दूर की है.

यह था मामला

तत्कालीन राज्यपाल कल्याण सिंह के सामने कैलाश मेघवाल ने बतौर विधानसभा अध्यक्ष यह मामला उठाया था. तब नियमों का हवाला भी दिया गया था कि 21 दिन के नोटिस पर ही सत्र आहूत किया जा सकता है. हालांकि बाद में इस मामले का पटाक्षेप भी हो गया था.

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