Inside story: गहलोत मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ तो भी पूरे 30 मंत्री नहीं बनाए जाएंगे! जानिये क्या है रणनीति

जब भी मंत्रिमंडल का विस्तार होगा तो पूरे 30 मंत्री बनाने के बजाय उसमें कुछ पद खाली रखे जाएंगे.

जब भी मंत्रिमंडल का विस्तार होगा तो पूरे 30 मंत्री बनाने के बजाय उसमें कुछ पद खाली रखे जाएंगे.

राजस्‍थान में गहलोत सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार (Cabinet expansion) को लेकर चल रही चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है.

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जयपुर. राजस्‍थान में गहलोत मंत्रिमंडल के विस्तार (Cabinet Expansion) के कयासों पर फिलहाल विराम लग गया है. यह इंतजार अभी और कितना लम्बा होगा, इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं. मौजूदा हालात को अगर देखा जाए तो लगता है कि अब जून-जुलाई से पहले मंत्रिमंडल विस्तार मुमकिन नहीं होगा. वहीं, कयास ये भी हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार हुआ भी तो पूरे 30 मंत्री नहीं बनाए जाएंगे. इसके पीछे कई कारण और रणनीति (Strategy) बताई जा रही है.

राजस्थान में मंत्रिमंडल फेरबदल और विस्तार के कयास पिछले कई महीनों से लगाए जा रहे हैं, लेकिन गुरुवार को कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अजय माकन के बयान के बाद फिलहाल इन अटकलों पर विराम लग गया है. माकन ने साफ कर दिया है कि बजट सत्र के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार मुमकिन नहीं है. अब सवाल यह है कि आखिर यह इंतजार अभी और कितना लम्बा होगा? क्या बजट सत्र के बाद नये मंत्री बना दिए जाएंगे या फिर इसके लिए और भी लम्बा इंतजार करना होगा? कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अजय माकन ने हालांकि अभी बजट सत्र का हवाला दिया है, लेकिन देश-प्रदेश की राजनीतिक स्थितियों पर अगर गौर किया जाये तो ऐसा प्रतीत होता है कि मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए विधायकों को इसके बाद भी कुछ महीने और इंतजार करना पड़ सकता है.

इसके पीछे ये कारण गिनाये जा रहे हैं

- प्रदेश में बजट सत्र करीब 20 मार्च तक चलने की संभावना है.
- तब तक विधानसभा उपचुनाव का ऐलान भी होने की पूरी संभावना है.

- 6 अप्रैल से पहले प्रदेश की 4 सीटों पर उपचुनाव करवाए जाने हैं.

- ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार को टाला जा सकता है.



- इसके बाद 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों का ऐलान हो जाएगा.

- अप्रैल से जून तक इन राज्यों में विधानसभा चुनाव चलने की संभावना है.

- तमिलनाडू और पुड्डुचेरी में कांग्रेस मजबूत स्थिति में मानी जा रही है.

- केरल विधानसभा चुनाव में सीएम अशोक गहलोत खुद प्रभारी हैं.

- इन चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करना कांग्रेस की नाक का सवाल होगा.

- प्रदेश से भी सीनयर लीडर्स इन राज्यों के चुनाव में भेजे जाएंगे.

- मुख्यमंत्री और बड़े नेताओं के इन चुनावों में व्यस्तता के चलते भी डिले हो सकता है.

- इन स्थितियों के चलते जून-जुलाई तक प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की उम्मीदें कम ही हैं.

मंत्रिमंडल विस्तार होगा तो विरोध के कुछ स्वर भी फूटेंगे

इस दौरान प्रदेश में कुछ जिलों में पंचायतीराज चुनाव भी होने हैं जो मंत्रिमंडल विस्तार में बाधा बनेगा. प्रदेश में अधिकतम 30 मंत्री हो सकते हैं. अभी मुख्यमंत्री समेत प्रदेश में 21 मंत्री हैं. 9 और नये मंत्री बनाए जा सकते हैं. मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए कई विधायकों ने उम्मीदें संजोई हुई है. यह लगभग तय है कि जब भी मंत्रिमंडल विस्तार होगा तो विरोध के कुछ स्वर भी फूटेंगे. इन विरोध के स्वरों को थामने के लिए भी एक रणनीति पार्टी द्वारा आजमाई जा सकती है.

क्‍या हो सकती है संभावित रणनीति?

जब भी मंत्रिमंडल का विस्तार होगा तो पूरे 30 मंत्री बनाने के बजाय उसमें कुछ पद खाली रखे जाएंगे. ऐसा इसलिए किया जाएगा ताकि विरोध करने वाले विधायकों को उन खाली पदों पर नियुक्तियों का आश्वासन देकर शांत किया जा सके. वहीं जब भी मंत्रिमंडल विस्तार होगा तो नॉन परफॉर्मिंग कुछ पुराने मंत्रियों को हटाकर उनकी जगह नए लोगों को भी जगह मिलेगी. फिलहाल मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तरह-तरह की अटकलों का दौर जारी है और देखना होगा कि आखिर इन पर कब लगाम लगती है.
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