प्रदेश में प्रतिवर्ष करीब 500 बच्चे हो रहे हैं HIV संक्रमण के शिकार, यह है प्रमुख कारण
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प्रदेश में प्रतिवर्ष करीब 500 बच्चे हो रहे हैं HIV संक्रमण के शिकार, यह है प्रमुख कारण
देश में वर्ष 2017 तक करीब 1 लाख 20 हजार बच्चे और किशोर एचआईवी संक्रमण से पीड़ित थे.

प्रदेश में एड्स (AIDS) रोगियों की लगातार बढ़ रही संख्या ने स्वास्थ्य विभाग (Health Department) की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि संख्या भले ही बढ़ी हो, लेकिन प्रतिशत में कमी (Percentage reduction) आई है. प्रतिवर्ष 5 साल से 14 साल तक की उम्र के करीब 500 बच्चे (Children) एचआईवी संक्रमण के शिकार हो रहे हैं.

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जयपुर. प्रदेश में एड्स (AIDS) रोगियों की लगातार बढ़ रही संख्या ने स्वास्थ्य विभाग (Health Department) की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि संख्या भले ही बढ़ी हो, लेकिन प्रतिशत में कमी (Percentage reduction) आई है. प्रतिवर्ष 5 साल से 14 साल तक की उम्र के करीब 500 बच्चे (Children) एचआईवी संक्रमण के शिकार हो रहे हैं. इसका कारण संक्रमित मां और असुरक्षित खून (Unsafe blood) का चढ़ाया जाना है. राजधानी जयपुर के एआरटी सेंटर (ART Center of Jaipur) पर इस समय नए व पुराने करीब 250 बच्चे पंजीकृत हैं. इससे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से संचालित कार्यक्रम पर सवालिया निशान लगता दिखाई दे रहा है.

पहले नंबर पर महाराष्ट्र है
देश में बच्चों में एचआईवी संक्रमण के शिकार में पहले नबंर पर महाराष्ट्र, दूसरे पर उत्तर प्रदेश और तीसरे नंबर पर कर्नाटक है. देश में वर्ष 2015-16 में 8702, वर्ष 2016-17 में 7939 और वर्ष 2017-18 में 7232 बच्चे एड्स रोग की गिरफ्त में पाए गए हैं. राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर व निदेशक डॉ. आरपी डोरिया का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को जानकारी देकर बच्चों को एचआईवी संक्रमण से बचाया जा सकता है.

बच्चे एचआईवी संक्रमण के साथ ही जन्म ले रहे हैं
देश में एचआईवी संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए विभिन्न फण्ड्स के जरिए करोडों रुपया भी मिलता है, लेकिन यह पैसा खर्च ही नहीं हो पाता है. समय पर संक्रमित गर्भवती मां की जांच नहीं होने के कारण बच्चे एचआईवी संक्रमण के साथ ही जन्म ले रहे हैं. यूनिसेफ की सर्वे रिपोर्ट की मानें तो उसके मुताबिक हर 14 सेकण्ड में एक बच्चे को एचआईवी संक्रमण होता है. देश में वर्ष 2017 तक करीब 1 लाख 20 हजार बच्चे और किशोर एचआईवी संक्रमण से पीड़ित थे. दक्षिण एशिया के किसी भी देश में यह सर्वाधिक है.



गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच कराया जाना अनिवार्य है
देश में 5 साल से 14 साल तक की उम्र के बच्चों में महाराष्ट्र, यूपी, कर्नाटक, बिहार, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मध्यप्रदेश शामिल हैं. निदेशक डॉ. आरपी डोरिया का कहना है कि नाको की गाइडलाइन के अनुसार निर्धारित एआरटी सेंटर्स पर पॉजिटिव मरीजों के लिए नि:शुल्क दवा और जांच की सुविधा उपलब्ध है. गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच कराया जाना भी अनिवार्य है.

प्रदेश में किस साल कितने पॉजिटिव
वर्ष                     एचआईवी बच्चे (5 से 14 साल)
2013-14           541
2014-15           576
2015-16           502
2016-17          466
2017-18          450
2018-19          502

अभी और अधिक प्रयासों की जरुरत है
प्रदेश में एड्स रोगियों की संख्या में लगातार हो रहा इजाफा बताता है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रयास अभी इस बीमारी को रोकने में नाकाफी साबित हो रहे हैं. इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए अभी और अधिक प्रयासों की जरुरत होगी. पुरुषों और महिलाओं के बाद अब बच्चों में भी एड्स रोग का संक्रमण अधिक संख्या में देखने को मिल रहा है.

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